100% टैरिफ की चेतावनी के बाद बदला कनाडा का रुख, चीन से फ्री ट्रेड की अटकलों पर विराम

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अमेरिकी दबाव के बीच ओटावा ने स्पष्ट किया—चीन के साथ किसी मुक्त व्यापार समझौते पर न काम, न विचार

ओटावा।कनाडा ने चीन के साथ संभावित मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement) को लेकर चल रही अटकलों को आज को विराम लगा दिया। सरकार ने साफ किया कि न तो चीन के साथ किसी फ्री ट्रेड डील पर काम हो रहा है और न ही भविष्य में ऐसा कोई इरादा है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका ने चेतावनी दी थी कि अगर कनाडा चीन के साथ व्यापारिक समझौते की दिशा में बढ़ता है, तो कनाडाई उत्पादों पर 100% तक टैरिफ लगाया जा सकता है।

सरकारी बयान में कहा गया कि कनाडा अपनी मौजूदा उत्तर अमेरिकी व्यापार प्रतिबद्धताओं को प्राथमिकता देता है और किसी भी गैर-बाजार अर्थव्यवस्था के साथ बड़े व्यापारिक करार से पहले साझेदार देशों को औपचारिक सूचना देना उसकी नीति का हिस्सा है। सरकार ने यह भी दोहराया कि चीन के साथ संबंधों में फिलहाल किसी नए मुक्त व्यापार ढांचे पर चर्चा नहीं हो रही है।

क्या है पूरा मामला
पिछले सप्ताह अमेरिका की ओर से सार्वजनिक रूप से यह संकेत दिया गया था कि यदि कनाडा, चीन को अमेरिका के लिए व्यापारिक “ट्रांजिट रूट” बनने देता है, तो उसे कड़े आर्थिक परिणाम भुगतने होंगे। इसी के तहत टैरिफ बढ़ाने की चेतावनी दी गई। इसके बाद ओटावा पर यह दबाव बढ़ा कि वह चीन के साथ अपने हालिया व्यापारिक संवाद को स्पष्ट करे।

क्यों बढ़ी चिंता
हाल के महीनों में कनाडा और चीन के बीच कुछ सेक्टोरल समझौतों की खबरें सामने आई थीं, खासकर इलेक्ट्रिक वाहन और कृषि उत्पादों को लेकर। इन्हीं चर्चाओं ने अमेरिका में यह आशंका पैदा की कि चीन, कनाडा के जरिए अमेरिकी बाजार में प्रवेश कर सकता है। अमेरिकी प्रशासन ने इसे क्षेत्रीय सुरक्षा और व्यापार संतुलन के लिए खतरा बताया।

कैसे बदली रणनीति
कनाडाई सरकार ने अब स्पष्ट संदेश दिया है कि वह अमेरिका-कनाडा-मेक्सिको व्यापार समझौते (USMCA) के दायरे से बाहर जाकर कोई ऐसा कदम नहीं उठाएगी, जिससे साझेदार देशों के हित प्रभावित हों। अधिकारियों के अनुसार, किसी भी बड़े व्यापारिक फैसले में पारदर्शिता और साझेदारों से संवाद अनिवार्य रहेगा।

अमेरिका और कनाडा एक-दूसरे के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार हैं। हर दिन अरबों डॉलर के सामान और सेवाओं का आदान-प्रदान होता है। ऊर्जा, ऑटो पार्ट्स, लकड़ी और कृषि उत्पादों में अमेरिका काफी हद तक कनाडा पर निर्भर है। ऐसे में टैरिफ बढ़ने की स्थिति दोनों अर्थव्यवस्थाओं को प्रभावित कर सकती थी।

विशेषज्ञों का मानना है कि कनाडा फिलहाल किसी भी ऐसे कदम से बचेगा, जिससे उत्तर अमेरिकी व्यापार संतुलन बिगड़े। आने वाले महीनों में व्यापार समझौतों की समीक्षा और वैश्विक सप्लाई चेन पर नए सिरे से फोकस देखने को मिल सकता है। सरकार ने संकेत दिया है कि प्राथमिकता घरेलू अर्थव्यवस्था की स्थिरता और मौजूदा अंतरराष्ट्रीय समझौतों को मजबूत करना ही रहेगी।

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www.dainikjagranmpcg.com
26 Jan 2026 By Nitin Trivedi

100% टैरिफ की चेतावनी के बाद बदला कनाडा का रुख, चीन से फ्री ट्रेड की अटकलों पर विराम

अंतराष्ट्रीय न्यूज

ओटावा।कनाडा ने चीन के साथ संभावित मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement) को लेकर चल रही अटकलों को आज को विराम लगा दिया। सरकार ने साफ किया कि न तो चीन के साथ किसी फ्री ट्रेड डील पर काम हो रहा है और न ही भविष्य में ऐसा कोई इरादा है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका ने चेतावनी दी थी कि अगर कनाडा चीन के साथ व्यापारिक समझौते की दिशा में बढ़ता है, तो कनाडाई उत्पादों पर 100% तक टैरिफ लगाया जा सकता है।

सरकारी बयान में कहा गया कि कनाडा अपनी मौजूदा उत्तर अमेरिकी व्यापार प्रतिबद्धताओं को प्राथमिकता देता है और किसी भी गैर-बाजार अर्थव्यवस्था के साथ बड़े व्यापारिक करार से पहले साझेदार देशों को औपचारिक सूचना देना उसकी नीति का हिस्सा है। सरकार ने यह भी दोहराया कि चीन के साथ संबंधों में फिलहाल किसी नए मुक्त व्यापार ढांचे पर चर्चा नहीं हो रही है।

क्या है पूरा मामला
पिछले सप्ताह अमेरिका की ओर से सार्वजनिक रूप से यह संकेत दिया गया था कि यदि कनाडा, चीन को अमेरिका के लिए व्यापारिक “ट्रांजिट रूट” बनने देता है, तो उसे कड़े आर्थिक परिणाम भुगतने होंगे। इसी के तहत टैरिफ बढ़ाने की चेतावनी दी गई। इसके बाद ओटावा पर यह दबाव बढ़ा कि वह चीन के साथ अपने हालिया व्यापारिक संवाद को स्पष्ट करे।

क्यों बढ़ी चिंता
हाल के महीनों में कनाडा और चीन के बीच कुछ सेक्टोरल समझौतों की खबरें सामने आई थीं, खासकर इलेक्ट्रिक वाहन और कृषि उत्पादों को लेकर। इन्हीं चर्चाओं ने अमेरिका में यह आशंका पैदा की कि चीन, कनाडा के जरिए अमेरिकी बाजार में प्रवेश कर सकता है। अमेरिकी प्रशासन ने इसे क्षेत्रीय सुरक्षा और व्यापार संतुलन के लिए खतरा बताया।

कैसे बदली रणनीति
कनाडाई सरकार ने अब स्पष्ट संदेश दिया है कि वह अमेरिका-कनाडा-मेक्सिको व्यापार समझौते (USMCA) के दायरे से बाहर जाकर कोई ऐसा कदम नहीं उठाएगी, जिससे साझेदार देशों के हित प्रभावित हों। अधिकारियों के अनुसार, किसी भी बड़े व्यापारिक फैसले में पारदर्शिता और साझेदारों से संवाद अनिवार्य रहेगा।

अमेरिका और कनाडा एक-दूसरे के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार हैं। हर दिन अरबों डॉलर के सामान और सेवाओं का आदान-प्रदान होता है। ऊर्जा, ऑटो पार्ट्स, लकड़ी और कृषि उत्पादों में अमेरिका काफी हद तक कनाडा पर निर्भर है। ऐसे में टैरिफ बढ़ने की स्थिति दोनों अर्थव्यवस्थाओं को प्रभावित कर सकती थी।

विशेषज्ञों का मानना है कि कनाडा फिलहाल किसी भी ऐसे कदम से बचेगा, जिससे उत्तर अमेरिकी व्यापार संतुलन बिगड़े। आने वाले महीनों में व्यापार समझौतों की समीक्षा और वैश्विक सप्लाई चेन पर नए सिरे से फोकस देखने को मिल सकता है। सरकार ने संकेत दिया है कि प्राथमिकता घरेलू अर्थव्यवस्था की स्थिरता और मौजूदा अंतरराष्ट्रीय समझौतों को मजबूत करना ही रहेगी।

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