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20 जुलाई से संसद का मानसून सत्र, सरकार का फोकस 7 अहम विधेयकों पर
भारत
वंदे मातरम अपमान, विदेशी फंडिंग, जन्म-मृत्यु पंजीकरण और MSME समेत कई विधेयक होंगे पेश; विपक्ष NEET और राम मंदिर दान विवाद पर सरकार को घेरेगा
20 जुलाई से संसद का मानसून सत्र शुरू होने जा रहा है। करीब चार सप्ताह तक चलने वाले इस सत्र के लिए केंद्र सरकार ने अपना विधायी एजेंडा लगभग तय कर लिया है। इस दौरान लोकसभा में सात महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए जाने की तैयारी है। इनमें राष्ट्रीय महत्व से जुड़े कई विषय शामिल हैं, जिनमें विदेशी चंदे के नियमन, वंदे मातरम के अपमान को लेकर प्रस्तावित कानून, जन्म और मृत्यु पंजीकरण व्यवस्था में बदलाव, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र से जुड़े प्रावधान और आयकर से जुड़े विधेयक प्रमुख हैं।
संसद का यह मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलेगा। कुल 25 दिनों की अवधि वाले इस सत्र में 19 बैठकें प्रस्तावित हैं। सरकार का प्रयास लंबित विधेयकों को आगे बढ़ाने के साथ-साथ कुछ नए कानूनों को भी संसद के समक्ष रखने का रहेगा। वहीं विपक्ष भी कई राष्ट्रीय मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति बना चुका है।
विधायी कार्यसूची में इस बार जिन सात विधेयकों को शामिल किया गया है, उनमें दो ऐसे हैं जो पहले ही लोकसभा में पेश किए जा चुके हैं, जबकि तीन नए विधेयक पहली बार सदन में आएंगे। सरकार की ओर से तैयार की गई सूची में फिलहाल किसी भी संविधान संशोधन विधेयक का उल्लेख नहीं किया गया है। खास तौर पर परिसीमन या महिला आरक्षण के क्रियान्वयन से जुड़े किसी नए प्रस्ताव को एजेंडे में जगह नहीं मिली है।
लोकसभा में दोबारा चर्चा के लिए जिन विधेयकों को शामिल किया गया है, उनमें विदेशी अंशदान विनियमन कानून (FCRA) में संशोधन से जुड़ा विधेयक प्रमुख है। यह विधेयक पहले मार्च 2026 में सदन में प्रस्तुत किया गया था। इसके अलावा विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान से संबंधित विधेयक भी कार्यसूची में शामिल है। यह प्रस्ताव दिसंबर 2025 में लोकसभा में पेश किया गया था और बाद में विस्तृत अध्ययन के लिए संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेज दिया गया था।
सरकार इस सत्र में आयकर कानून से जुड़े नए विधेयक को भी आगे बढ़ाएगी। यह प्रस्ताव उस अध्यादेश का स्थान लेगा जिसे पहले लागू किया गया था। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने से संबंधित विधेयक भी सदन में लाया जाएगा। न्यायपालिका में लंबित मामलों का बोझ कम करने और अदालत की कार्यक्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से इस प्रस्ताव को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इसके अलावा तीन नए विधेयक पहली बार संसद के सामने रखे जाएंगे। इनमें वंदे मातरम के अपमान से संबंधित प्रस्तावित कानून, जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण व्यवस्था में बदलाव करने वाला विधेयक और MSME क्षेत्र से जुड़ा नया विधेयक शामिल है। माना जा रहा है कि इन कानूनों के जरिए प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने और कुछ मौजूदा कानूनी प्रावधानों में संशोधन का प्रयास किया जाएगा।
दूसरी ओर मानसून सत्र शुरू होने से पहले विपक्षी दलों ने भी अपनी रणनीति तैयार कर ली है। कांग्रेस समेत कई विपक्षी पार्टियों का कहना है कि वे संसद में युवाओं, शिक्षा व्यवस्था, रोजगार और राष्ट्रीय महत्व के अन्य मुद्दों को प्रमुखता से उठाएंगे। विपक्ष का आरोप है कि कई ऐसे विषय हैं जिन पर सरकार को जवाब देना चाहिए और संसद इसके लिए सबसे उपयुक्त मंच है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि पार्टी संसद में NEET-UG परीक्षा से जुड़े विवाद, भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और अयोध्या राम मंदिर से जुड़े दान प्रबंधन के मुद्दे को प्रमुखता से उठाएगी। उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों ने छात्रों और अभिभावकों दोनों की चिंता बढ़ाई है तथा सरकार को इस पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पहले भी महिला आरक्षण का समर्थन करती रही है और आज भी उसके पक्ष में है। हालांकि उनका कहना है कि महिला आरक्षण को परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ना उचित नहीं माना जा सकता। उनके अनुसार महिलाओं को आरक्षण का लाभ जल्द से जल्द मिलना चाहिए।
लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने कहा कि विपक्ष जनता से जुड़े हर महत्वपूर्ण विषय को सदन में उठाएगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा, रोजगार, अयोध्या, ऑटोमोबाइल सेक्टर, विदेश नीति और मणिपुर जैसे मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगा जाएगा। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सरकार इन विषयों पर विस्तृत चर्चा के लिए तैयार होगी।
संसद सत्र से पहले शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के नेताओं की बैठक भी हुई। बैठक में भाजपा अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, पंचायती राज मंत्री ललन सिंह सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। बैठक में संसद की रणनीति, विधायी कार्यक्रम और विभिन्न मुद्दों पर सरकार के रुख को लेकर चर्चा की गई। माना जा रहा है कि सरकार सत्र के दौरान विधायी कार्यों को सुचारु रूप से आगे बढ़ाने के लिए सहयोगी दलों के साथ लगातार समन्वय बनाए रखेगी।
मानसून सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के बीच कई मुद्दों पर तीखी बहस देखने को मिल सकती है। एक ओर सरकार अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगी, वहीं दूसरी ओर विपक्ष शिक्षा, परीक्षा प्रणाली, आर्थिक चुनौतियों, विदेश नीति, धार्मिक संस्थानों से जुड़े विवादों और अन्य जनहित के विषयों पर सरकार से जवाब मांगने की तैयारी में है। ऐसे में आने वाले दिनों में संसद का यह सत्र राजनीतिक और विधायी दोनों दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण रहने वाला माना जा रहा है।
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20 जुलाई से संसद का मानसून सत्र, सरकार का फोकस 7 अहम विधेयकों पर
भारत
20 जुलाई से संसद का मानसून सत्र शुरू होने जा रहा है। करीब चार सप्ताह तक चलने वाले इस सत्र के लिए केंद्र सरकार ने अपना विधायी एजेंडा लगभग तय कर लिया है। इस दौरान लोकसभा में सात महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए जाने की तैयारी है। इनमें राष्ट्रीय महत्व से जुड़े कई विषय शामिल हैं, जिनमें विदेशी चंदे के नियमन, वंदे मातरम के अपमान को लेकर प्रस्तावित कानून, जन्म और मृत्यु पंजीकरण व्यवस्था में बदलाव, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र से जुड़े प्रावधान और आयकर से जुड़े विधेयक प्रमुख हैं।
संसद का यह मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलेगा। कुल 25 दिनों की अवधि वाले इस सत्र में 19 बैठकें प्रस्तावित हैं। सरकार का प्रयास लंबित विधेयकों को आगे बढ़ाने के साथ-साथ कुछ नए कानूनों को भी संसद के समक्ष रखने का रहेगा। वहीं विपक्ष भी कई राष्ट्रीय मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति बना चुका है।
विधायी कार्यसूची में इस बार जिन सात विधेयकों को शामिल किया गया है, उनमें दो ऐसे हैं जो पहले ही लोकसभा में पेश किए जा चुके हैं, जबकि तीन नए विधेयक पहली बार सदन में आएंगे। सरकार की ओर से तैयार की गई सूची में फिलहाल किसी भी संविधान संशोधन विधेयक का उल्लेख नहीं किया गया है। खास तौर पर परिसीमन या महिला आरक्षण के क्रियान्वयन से जुड़े किसी नए प्रस्ताव को एजेंडे में जगह नहीं मिली है।
लोकसभा में दोबारा चर्चा के लिए जिन विधेयकों को शामिल किया गया है, उनमें विदेशी अंशदान विनियमन कानून (FCRA) में संशोधन से जुड़ा विधेयक प्रमुख है। यह विधेयक पहले मार्च 2026 में सदन में प्रस्तुत किया गया था। इसके अलावा विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान से संबंधित विधेयक भी कार्यसूची में शामिल है। यह प्रस्ताव दिसंबर 2025 में लोकसभा में पेश किया गया था और बाद में विस्तृत अध्ययन के लिए संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेज दिया गया था।
सरकार इस सत्र में आयकर कानून से जुड़े नए विधेयक को भी आगे बढ़ाएगी। यह प्रस्ताव उस अध्यादेश का स्थान लेगा जिसे पहले लागू किया गया था। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने से संबंधित विधेयक भी सदन में लाया जाएगा। न्यायपालिका में लंबित मामलों का बोझ कम करने और अदालत की कार्यक्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से इस प्रस्ताव को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इसके अलावा तीन नए विधेयक पहली बार संसद के सामने रखे जाएंगे। इनमें वंदे मातरम के अपमान से संबंधित प्रस्तावित कानून, जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण व्यवस्था में बदलाव करने वाला विधेयक और MSME क्षेत्र से जुड़ा नया विधेयक शामिल है। माना जा रहा है कि इन कानूनों के जरिए प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने और कुछ मौजूदा कानूनी प्रावधानों में संशोधन का प्रयास किया जाएगा।
दूसरी ओर मानसून सत्र शुरू होने से पहले विपक्षी दलों ने भी अपनी रणनीति तैयार कर ली है। कांग्रेस समेत कई विपक्षी पार्टियों का कहना है कि वे संसद में युवाओं, शिक्षा व्यवस्था, रोजगार और राष्ट्रीय महत्व के अन्य मुद्दों को प्रमुखता से उठाएंगे। विपक्ष का आरोप है कि कई ऐसे विषय हैं जिन पर सरकार को जवाब देना चाहिए और संसद इसके लिए सबसे उपयुक्त मंच है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि पार्टी संसद में NEET-UG परीक्षा से जुड़े विवाद, भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और अयोध्या राम मंदिर से जुड़े दान प्रबंधन के मुद्दे को प्रमुखता से उठाएगी। उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों ने छात्रों और अभिभावकों दोनों की चिंता बढ़ाई है तथा सरकार को इस पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पहले भी महिला आरक्षण का समर्थन करती रही है और आज भी उसके पक्ष में है। हालांकि उनका कहना है कि महिला आरक्षण को परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ना उचित नहीं माना जा सकता। उनके अनुसार महिलाओं को आरक्षण का लाभ जल्द से जल्द मिलना चाहिए।
लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने कहा कि विपक्ष जनता से जुड़े हर महत्वपूर्ण विषय को सदन में उठाएगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा, रोजगार, अयोध्या, ऑटोमोबाइल सेक्टर, विदेश नीति और मणिपुर जैसे मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगा जाएगा। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सरकार इन विषयों पर विस्तृत चर्चा के लिए तैयार होगी।
संसद सत्र से पहले शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के नेताओं की बैठक भी हुई। बैठक में भाजपा अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, पंचायती राज मंत्री ललन सिंह सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। बैठक में संसद की रणनीति, विधायी कार्यक्रम और विभिन्न मुद्दों पर सरकार के रुख को लेकर चर्चा की गई। माना जा रहा है कि सरकार सत्र के दौरान विधायी कार्यों को सुचारु रूप से आगे बढ़ाने के लिए सहयोगी दलों के साथ लगातार समन्वय बनाए रखेगी।
मानसून सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के बीच कई मुद्दों पर तीखी बहस देखने को मिल सकती है। एक ओर सरकार अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगी, वहीं दूसरी ओर विपक्ष शिक्षा, परीक्षा प्रणाली, आर्थिक चुनौतियों, विदेश नीति, धार्मिक संस्थानों से जुड़े विवादों और अन्य जनहित के विषयों पर सरकार से जवाब मांगने की तैयारी में है। ऐसे में आने वाले दिनों में संसद का यह सत्र राजनीतिक और विधायी दोनों दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण रहने वाला माना जा रहा है।
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