छत्तीसगढ़ विधानसभा का आज आखिरी दिन, अविश्वास प्रस्ताव पर सदन में होगी बड़ी बहस

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मानसून सत्र के समापन दिवस पर प्रश्नकाल, CAG रिपोर्ट पेश होगी; सरकार और विपक्ष आमने-सामने, कई अहम प्रतिवेदन भी सदन में रखे जाएंगे

रायपुर में छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र का शुक्रवार को अंतिम दिन कई अहम राजनीतिक घटनाक्रमों का गवाह बनने जा रहा है। पांच दिवसीय सत्र के समापन दिवस पर सदन की कार्यवाही प्रश्नकाल से शुरू हुई, जिसके बाद सरकारी और गैर-सरकारी कार्यों पर चर्चा निर्धारित है। हालांकि पूरे दिन की कार्यवाही का सबसे महत्वपूर्ण विषय विपक्ष की ओर से लाया गया अविश्वास प्रस्ताव रहेगा, जिस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच विस्तृत बहस होने की संभावना है।

विधानसभा के अंतिम दिन राजनीतिक माहौल पहले से ही गरम है। विपक्ष सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने की रणनीति के साथ सदन में उतरा है, जबकि सरकार अपनी उपलब्धियों और नीतिगत फैसलों के आधार पर जवाब देने की तैयारी में है। ऐसे में अविश्वास प्रस्ताव पर होने वाली चर्चा पूरे सत्र का सबसे अहम राजनीतिक पड़ाव मानी जा रही है।

कार्यसूची के अनुसार प्रश्नकाल में महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े तथा खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री दयालदास बघेल अपने-अपने विभागों से जुड़े सवालों के जवाब देंगे। सदन में विधायकों द्वारा उठाए गए विभिन्न जनहित के मुद्दों पर सरकार का पक्ष सामने आएगा। प्रश्नकाल के दौरान योजनाओं के क्रियान्वयन, विभागीय कार्यों और प्रशासनिक फैसलों से जुड़े सवालों पर चर्चा होने की संभावना है।

विधानसभा की कार्यवाही के दौरान वित्त मंत्री ओपी चौधरी भी महत्वपूर्ण भूमिका में रहेंगे। वे भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की स्थानीय निकायों से संबंधित ऑडिट रिपोर्ट सदन के पटल पर प्रस्तुत करेंगे। यह रिपोर्ट नगरीय निकायों और पंचायतों के वित्तीय प्रबंधन, व्यय और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जुड़े विभिन्न पहलुओं को सामने लाएगी। रिपोर्ट पेश होने के बाद उस पर आगे की संसदीय प्रक्रिया तय की जाएगी।

सदन की कार्यवाही में कई विधायकों द्वारा अलग-अलग समितियों और विभागों से जुड़े प्रतिवेदन भी प्रस्तुत किए जाएंगे। विधायक गोमती साय, धर्मजीत सिंह और भैयालाल राजवाड़े अपने-अपने प्रतिवेदन विधानसभा के पटल पर रखेंगे। इन दस्तावेजों में विभिन्न समितियों की सिफारिशें, विभागीय समीक्षा और अन्य प्रशासनिक विषय शामिल हो सकते हैं।

मानसून सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर तीखी बहस देखने को मिली है। कानून-व्यवस्था, किसानों से जुड़े विषय, विकास योजनाएं, वित्तीय प्रबंधन और विभिन्न विभागों के कामकाज को लेकर विपक्ष लगातार सरकार से जवाब मांगता रहा है। अंतिम दिन भी इन मुद्दों की गूंज सदन में सुनाई देने की संभावना है।

विपक्ष द्वारा पेश किए गए अविश्वास प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक हलकों में विशेष चर्चा बनी हुई है। विपक्ष का प्रयास रहेगा कि वह सरकार की कार्यशैली, नीतियों और प्रशासनिक निर्णयों पर सवाल उठाए, जबकि सत्ता पक्ष इन आरोपों का जवाब देते हुए अपने कार्यकाल की उपलब्धियां और योजनाओं का विवरण सदन के सामने रखेगा। इस बहस के दौरान मुख्यमंत्री सहित कई वरिष्ठ मंत्रियों के भी अपनी बात रखने की संभावना है।

अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा विधानसभा की संसदीय परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। इस दौरान विपक्ष सरकार के खिलाफ अपने आरोपों और तर्कों को विस्तार से रखता है, जबकि सरकार सदन के माध्यम से अपना पक्ष स्पष्ट करती है। चर्चा के बाद प्रस्ताव पर सदन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

विधानसभा परिसर के बाहर भी राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। विभिन्न संगठन और कर्मचारी समूह अपनी मांगों को लेकर सक्रिय हैं। कई सामाजिक और कर्मचारी संगठनों ने राजधानी रायपुर में प्रदर्शन और विरोध कार्यक्रमों की घोषणा की है, जिसके चलते विधानसभा परिसर और आसपास सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई गई है।

सरकार की ओर से यह भी संकेत दिए गए हैं कि अंतिम दिन की कार्यवाही के दौरान विभिन्न विभागों की उपलब्धियों और आगामी योजनाओं पर भी जानकारी दी जा सकती है। वहीं विपक्ष अपने आरोपों के समर्थन में विभिन्न आंकड़े और दस्तावेज सदन के सामने रख सकता है।

पांच दिनों तक चले मानसून सत्र में कई विधेयकों, प्रश्नों, ध्यानाकर्षण प्रस्तावों और विभिन्न जनहित के मुद्दों पर चर्चा हुई। अंतिम दिन की कार्यवाही में अब सभी की नजरें अविश्वास प्रस्ताव पर होने वाली बहस और सरकार के जवाब पर टिकी हुई हैं। सदन के भीतर पूरे दिन राजनीतिक बयानबाजी, तीखी बहस और विभिन्न संसदीय प्रक्रियाओं के चलते गतिविधियां तेज रहने की संभावना है।

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17 Jul 2026 By Priyanka

छत्तीसगढ़ विधानसभा का आज आखिरी दिन, अविश्वास प्रस्ताव पर सदन में होगी बड़ी बहस

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रायपुर में छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र का शुक्रवार को अंतिम दिन कई अहम राजनीतिक घटनाक्रमों का गवाह बनने जा रहा है। पांच दिवसीय सत्र के समापन दिवस पर सदन की कार्यवाही प्रश्नकाल से शुरू हुई, जिसके बाद सरकारी और गैर-सरकारी कार्यों पर चर्चा निर्धारित है। हालांकि पूरे दिन की कार्यवाही का सबसे महत्वपूर्ण विषय विपक्ष की ओर से लाया गया अविश्वास प्रस्ताव रहेगा, जिस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच विस्तृत बहस होने की संभावना है।

विधानसभा के अंतिम दिन राजनीतिक माहौल पहले से ही गरम है। विपक्ष सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने की रणनीति के साथ सदन में उतरा है, जबकि सरकार अपनी उपलब्धियों और नीतिगत फैसलों के आधार पर जवाब देने की तैयारी में है। ऐसे में अविश्वास प्रस्ताव पर होने वाली चर्चा पूरे सत्र का सबसे अहम राजनीतिक पड़ाव मानी जा रही है।

कार्यसूची के अनुसार प्रश्नकाल में महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े तथा खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री दयालदास बघेल अपने-अपने विभागों से जुड़े सवालों के जवाब देंगे। सदन में विधायकों द्वारा उठाए गए विभिन्न जनहित के मुद्दों पर सरकार का पक्ष सामने आएगा। प्रश्नकाल के दौरान योजनाओं के क्रियान्वयन, विभागीय कार्यों और प्रशासनिक फैसलों से जुड़े सवालों पर चर्चा होने की संभावना है।

विधानसभा की कार्यवाही के दौरान वित्त मंत्री ओपी चौधरी भी महत्वपूर्ण भूमिका में रहेंगे। वे भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की स्थानीय निकायों से संबंधित ऑडिट रिपोर्ट सदन के पटल पर प्रस्तुत करेंगे। यह रिपोर्ट नगरीय निकायों और पंचायतों के वित्तीय प्रबंधन, व्यय और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जुड़े विभिन्न पहलुओं को सामने लाएगी। रिपोर्ट पेश होने के बाद उस पर आगे की संसदीय प्रक्रिया तय की जाएगी।

सदन की कार्यवाही में कई विधायकों द्वारा अलग-अलग समितियों और विभागों से जुड़े प्रतिवेदन भी प्रस्तुत किए जाएंगे। विधायक गोमती साय, धर्मजीत सिंह और भैयालाल राजवाड़े अपने-अपने प्रतिवेदन विधानसभा के पटल पर रखेंगे। इन दस्तावेजों में विभिन्न समितियों की सिफारिशें, विभागीय समीक्षा और अन्य प्रशासनिक विषय शामिल हो सकते हैं।

मानसून सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर तीखी बहस देखने को मिली है। कानून-व्यवस्था, किसानों से जुड़े विषय, विकास योजनाएं, वित्तीय प्रबंधन और विभिन्न विभागों के कामकाज को लेकर विपक्ष लगातार सरकार से जवाब मांगता रहा है। अंतिम दिन भी इन मुद्दों की गूंज सदन में सुनाई देने की संभावना है।

विपक्ष द्वारा पेश किए गए अविश्वास प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक हलकों में विशेष चर्चा बनी हुई है। विपक्ष का प्रयास रहेगा कि वह सरकार की कार्यशैली, नीतियों और प्रशासनिक निर्णयों पर सवाल उठाए, जबकि सत्ता पक्ष इन आरोपों का जवाब देते हुए अपने कार्यकाल की उपलब्धियां और योजनाओं का विवरण सदन के सामने रखेगा। इस बहस के दौरान मुख्यमंत्री सहित कई वरिष्ठ मंत्रियों के भी अपनी बात रखने की संभावना है।

अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा विधानसभा की संसदीय परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। इस दौरान विपक्ष सरकार के खिलाफ अपने आरोपों और तर्कों को विस्तार से रखता है, जबकि सरकार सदन के माध्यम से अपना पक्ष स्पष्ट करती है। चर्चा के बाद प्रस्ताव पर सदन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

विधानसभा परिसर के बाहर भी राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। विभिन्न संगठन और कर्मचारी समूह अपनी मांगों को लेकर सक्रिय हैं। कई सामाजिक और कर्मचारी संगठनों ने राजधानी रायपुर में प्रदर्शन और विरोध कार्यक्रमों की घोषणा की है, जिसके चलते विधानसभा परिसर और आसपास सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई गई है।

सरकार की ओर से यह भी संकेत दिए गए हैं कि अंतिम दिन की कार्यवाही के दौरान विभिन्न विभागों की उपलब्धियों और आगामी योजनाओं पर भी जानकारी दी जा सकती है। वहीं विपक्ष अपने आरोपों के समर्थन में विभिन्न आंकड़े और दस्तावेज सदन के सामने रख सकता है।

पांच दिनों तक चले मानसून सत्र में कई विधेयकों, प्रश्नों, ध्यानाकर्षण प्रस्तावों और विभिन्न जनहित के मुद्दों पर चर्चा हुई। अंतिम दिन की कार्यवाही में अब सभी की नजरें अविश्वास प्रस्ताव पर होने वाली बहस और सरकार के जवाब पर टिकी हुई हैं। सदन के भीतर पूरे दिन राजनीतिक बयानबाजी, तीखी बहस और विभिन्न संसदीय प्रक्रियाओं के चलते गतिविधियां तेज रहने की संभावना है।

https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/there-will-be-a-big-debate-in-the-house-on/article-59025

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