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राम मंदिर चढ़ावा मामला: प्रायश्चित अनुष्ठान शुरू, शुद्धिकरण के लिए 10 दिन तक होंगे वैदिक कर्मकांड
भारत
दान राशि में कथित गड़बड़ी के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने विशेष पूजा और हवन का कराया शुभारंभ; जांच के बीच निर्माण प्रभारी गोपाल राव के अयोध्या छोड़ने की चर्चा
अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित गड़बड़ी के मामले के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने धार्मिक परंपराओं के अनुसार विशेष प्रायश्चित अनुष्ठान शुरू कराया है। शुक्रवार सुबह से मंदिर परिसर में वैदिक विधि-विधान के साथ पूजा-पाठ, हवन और अन्य धार्मिक अनुष्ठान प्रारंभ हुए। ट्रस्ट की ओर से इसे मंदिर परिसर के शुद्धिकरण और भगवान श्रीराम से क्षमा-प्रार्थना की प्रक्रिया का हिस्सा बताया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार यह विशेष अनुष्ठान लगातार दस दिनों तक चलेगा। इस दौरान मंदिर के गर्भगृह और परकोटा क्षेत्र में निर्धारित समय के अनुसार धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए जाएंगे। वैदिक परंपराओं के अनुरूप पूजा कराने के लिए बड़ी संख्या में विद्वान पुजारियों और आचार्यों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
मंदिर परिसर में चल रहे इस धार्मिक आयोजन में 18 पुजारी और पांच आचार्य शामिल हैं। वे प्रतिदिन वेद मंत्रों का उच्चारण, विशेष पूजा-अर्चना, रुद्राभिषेक, हवन और अन्य वैदिक अनुष्ठान कर रहे हैं। इसके साथ ही विष्णु सहस्रनाम का नियमित पाठ भी कार्यक्रम का हिस्सा बनाया गया है। बताया जा रहा है कि प्रतिदिन दो बार विशेष पूजन और हवन आयोजित किए जाएंगे।
ट्रस्ट से जुड़े सूत्रों का कहना है कि चढ़ावे से जुड़ी कथित घटना को केवल प्रशासनिक मामला नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे धार्मिक आस्था से जुड़ा विषय भी समझा गया है। उनका मानना है कि ऐसी घटना से देश और विदेश में रहने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाएं प्रभावित हुई हैं। इसी कारण धार्मिक परंपरा के अनुसार प्रायश्चित और शुद्धिकरण का निर्णय लिया गया।
मंदिर परिसर में इन दिनों पूजा-अर्चना का वातावरण बना हुआ है। निर्धारित वैदिक विधियों के अनुसार सभी अनुष्ठान संपन्न कराए जा रहे हैं। पुजारी विशेष मंत्रोच्चार के साथ धार्मिक प्रक्रियाओं को पूरा कर रहे हैं, जबकि ट्रस्ट के प्रतिनिधि भी व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे हैं। श्रद्धालुओं की आवाजाही सामान्य रूप से जारी है, हालांकि अनुष्ठान के कारण कुछ स्थानों पर विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं।
इसी बीच मंदिर निर्माण से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारी गोपाल राव को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। सूत्रों के अनुसार वह अयोध्या छोड़कर चले गए हैं। यह भी दावा किया जा रहा है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने उनके दायित्व में बदलाव किया है। हालांकि उन्हें नई जिम्मेदारी कहां सौंपी गई है, इसकी आधिकारिक पुष्टि अब तक सामने नहीं आई है।
गोपाल राव लंबे समय से राम मंदिर निर्माण कार्य की निगरानी से जुड़े रहे थे। हाल ही में मंदिर निर्माण समिति की बैठक के बाद उनके दायित्व में बदलाव किया गया था। इसके बाद उनके अयोध्या से जाने की जानकारी सामने आई। हालांकि इस बदलाव को लेकर किसी आधिकारिक बयान में चढ़ावा मामले से सीधा संबंध नहीं जोड़ा गया है।
दूसरी ओर चढ़ावे में कथित गड़बड़ी की जांच भी लगातार आगे बढ़ रही है। पुलिस मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है और संबंधित लोगों से पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियां वित्तीय रिकॉर्ड, जब्त किए गए दस्तावेज और अन्य साक्ष्यों का भी परीक्षण कर रही हैं ताकि पूरे घटनाक्रम की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सके।
सूत्रों के अनुसार पुलिस इस मामले में गिरफ्तार रामशंकर यादव उर्फ 'टिन्नू' और उसके भतीजे मनीष यादव को दोबारा रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है। इसके लिए अदालत में आवेदन दाखिल किए जाने की संभावना जताई गई है। जांच अधिकारियों का मानना है कि दोनों से विस्तृत पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं।
पुलिस जांच में यह भी देखा जा रहा है कि मंदिर के दानपात्रों की देखरेख, चढ़ावे की गिनती और धनराशि के प्रबंधन की पूरी प्रक्रिया किस प्रकार संचालित होती थी। अधिकारियों का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कथित अनियमितता किस स्तर पर हुई और उसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।
जांच के दौरान पहले ही कुछ नकदी बरामद होने की जानकारी सामने आ चुकी है। इसी आधार पर पुलिस अब धन के स्रोत, उसके उपयोग और कथित लेनदेन की पूरी श्रृंखला की पड़ताल कर रही है। इसके अलावा डिजिटल रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मंदिर प्रशासन, ट्रस्ट और जांच एजेंसियां अपने-अपने स्तर पर कार्रवाई कर रही हैं। जहां एक ओर धार्मिक परंपराओं के तहत प्रायश्चित और शुद्धिकरण का क्रम जारी है, वहीं दूसरी ओर पुलिस कानूनी पहलुओं की जांच को आगे बढ़ा रही है। दोनों प्रक्रियाएं समानांतर रूप से चल रही हैं और आने वाले दिनों में जांच से जुड़े नए तथ्य सामने आने की संभावना जताई जा रही है।
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भारत
अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित गड़बड़ी के मामले के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने धार्मिक परंपराओं के अनुसार विशेष प्रायश्चित अनुष्ठान शुरू कराया है। शुक्रवार सुबह से मंदिर परिसर में वैदिक विधि-विधान के साथ पूजा-पाठ, हवन और अन्य धार्मिक अनुष्ठान प्रारंभ हुए। ट्रस्ट की ओर से इसे मंदिर परिसर के शुद्धिकरण और भगवान श्रीराम से क्षमा-प्रार्थना की प्रक्रिया का हिस्सा बताया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार यह विशेष अनुष्ठान लगातार दस दिनों तक चलेगा। इस दौरान मंदिर के गर्भगृह और परकोटा क्षेत्र में निर्धारित समय के अनुसार धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए जाएंगे। वैदिक परंपराओं के अनुरूप पूजा कराने के लिए बड़ी संख्या में विद्वान पुजारियों और आचार्यों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
मंदिर परिसर में चल रहे इस धार्मिक आयोजन में 18 पुजारी और पांच आचार्य शामिल हैं। वे प्रतिदिन वेद मंत्रों का उच्चारण, विशेष पूजा-अर्चना, रुद्राभिषेक, हवन और अन्य वैदिक अनुष्ठान कर रहे हैं। इसके साथ ही विष्णु सहस्रनाम का नियमित पाठ भी कार्यक्रम का हिस्सा बनाया गया है। बताया जा रहा है कि प्रतिदिन दो बार विशेष पूजन और हवन आयोजित किए जाएंगे।
ट्रस्ट से जुड़े सूत्रों का कहना है कि चढ़ावे से जुड़ी कथित घटना को केवल प्रशासनिक मामला नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे धार्मिक आस्था से जुड़ा विषय भी समझा गया है। उनका मानना है कि ऐसी घटना से देश और विदेश में रहने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाएं प्रभावित हुई हैं। इसी कारण धार्मिक परंपरा के अनुसार प्रायश्चित और शुद्धिकरण का निर्णय लिया गया।
मंदिर परिसर में इन दिनों पूजा-अर्चना का वातावरण बना हुआ है। निर्धारित वैदिक विधियों के अनुसार सभी अनुष्ठान संपन्न कराए जा रहे हैं। पुजारी विशेष मंत्रोच्चार के साथ धार्मिक प्रक्रियाओं को पूरा कर रहे हैं, जबकि ट्रस्ट के प्रतिनिधि भी व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे हैं। श्रद्धालुओं की आवाजाही सामान्य रूप से जारी है, हालांकि अनुष्ठान के कारण कुछ स्थानों पर विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं।
इसी बीच मंदिर निर्माण से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारी गोपाल राव को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। सूत्रों के अनुसार वह अयोध्या छोड़कर चले गए हैं। यह भी दावा किया जा रहा है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने उनके दायित्व में बदलाव किया है। हालांकि उन्हें नई जिम्मेदारी कहां सौंपी गई है, इसकी आधिकारिक पुष्टि अब तक सामने नहीं आई है।
गोपाल राव लंबे समय से राम मंदिर निर्माण कार्य की निगरानी से जुड़े रहे थे। हाल ही में मंदिर निर्माण समिति की बैठक के बाद उनके दायित्व में बदलाव किया गया था। इसके बाद उनके अयोध्या से जाने की जानकारी सामने आई। हालांकि इस बदलाव को लेकर किसी आधिकारिक बयान में चढ़ावा मामले से सीधा संबंध नहीं जोड़ा गया है।
दूसरी ओर चढ़ावे में कथित गड़बड़ी की जांच भी लगातार आगे बढ़ रही है। पुलिस मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है और संबंधित लोगों से पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियां वित्तीय रिकॉर्ड, जब्त किए गए दस्तावेज और अन्य साक्ष्यों का भी परीक्षण कर रही हैं ताकि पूरे घटनाक्रम की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सके।
सूत्रों के अनुसार पुलिस इस मामले में गिरफ्तार रामशंकर यादव उर्फ 'टिन्नू' और उसके भतीजे मनीष यादव को दोबारा रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है। इसके लिए अदालत में आवेदन दाखिल किए जाने की संभावना जताई गई है। जांच अधिकारियों का मानना है कि दोनों से विस्तृत पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं।
पुलिस जांच में यह भी देखा जा रहा है कि मंदिर के दानपात्रों की देखरेख, चढ़ावे की गिनती और धनराशि के प्रबंधन की पूरी प्रक्रिया किस प्रकार संचालित होती थी। अधिकारियों का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कथित अनियमितता किस स्तर पर हुई और उसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।
जांच के दौरान पहले ही कुछ नकदी बरामद होने की जानकारी सामने आ चुकी है। इसी आधार पर पुलिस अब धन के स्रोत, उसके उपयोग और कथित लेनदेन की पूरी श्रृंखला की पड़ताल कर रही है। इसके अलावा डिजिटल रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मंदिर प्रशासन, ट्रस्ट और जांच एजेंसियां अपने-अपने स्तर पर कार्रवाई कर रही हैं। जहां एक ओर धार्मिक परंपराओं के तहत प्रायश्चित और शुद्धिकरण का क्रम जारी है, वहीं दूसरी ओर पुलिस कानूनी पहलुओं की जांच को आगे बढ़ा रही है। दोनों प्रक्रियाएं समानांतर रूप से चल रही हैं और आने वाले दिनों में जांच से जुड़े नए तथ्य सामने आने की संभावना जताई जा रही है।
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