वेनेजुएला की विपक्षी नेता मचाडो ने ट्रम्प को सौंपा नोबेल शांति पुरस्कार का मेडल, वॉशिंगटन में बढ़ी सियासी हलचल

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व्हाइट हाउस में हुई बंद कमरे की मुलाकात के बाद मचाडो बोलीं— अमेरिकी राष्ट्रपति पर भरोसा, लेकिन समर्थन पर ट्रम्प अब भी खामोश

वेनेजुएला की प्रमुख विपक्षी नेता और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मारिया कोरिना मचाडो ने गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से व्हाइट हाउस में मुलाकात की और उन्हें अपना नोबेल शांति पुरस्कार का मेडल भेंट किया। यह मुलाकात ऐसे समय पर हुई है जब वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन, अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप और नेतृत्व को लेकर बहस तेज है। मचाडो द्वारा पुरस्कार सौंपे जाने को प्रतीकात्मक राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

यह मुलाकात ट्रम्प के उस फैसले के बाद पहली प्रत्यक्ष बैठक मानी जा रही है, जब जनवरी की शुरुआत में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अमेरिकी कार्रवाई के तहत हिरासत में लिया गया था। बैठक बंद कमरे में हुई और इसके बाद व्हाइट हाउस की ओर से कोई औपचारिक संयुक्त बयान जारी नहीं किया गया।

मुलाकात के बाद पत्रकारों से बातचीत में मचाडो ने कहा कि उन्होंने नोबेल शांति पुरस्कार का मेडल राष्ट्रपति ट्रम्प को सौंपा है। उन्होंने इसे वेनेजुएला के लोगों की ओर से सम्मान बताया और कहा कि यह दिन उनके देश के लिए ऐतिहासिक है। हालांकि, व्हाइट हाउस ने यह स्पष्ट नहीं किया कि ट्रम्प ने मेडल औपचारिक रूप से स्वीकार किया या नहीं।

व्हाइट हाउस से बाहर निकलने के बाद मचाडो ने पेंसिल्वेनिया एवेन्यू पर जुटे समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा, “हम राष्ट्रपति ट्रम्प पर भरोसा कर सकते हैं।” यह बयान ऐसे समय आया है जब ट्रम्प ने अब तक मचाडो को वेनेजुएला की वैध या अंतरिम राष्ट्रपति के रूप में समर्थन नहीं दिया है। फिलहाल अमेरिका डेल्सी रोड्रिग्ज के नेतृत्व वाली अंतरिम व्यवस्था के साथ काम कर रहा है।

नोबेल फाउंडेशन ने इस घटनाक्रम पर पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि नोबेल शांति पुरस्कार की उपाधि किसी और को हस्तांतरित नहीं की जा सकती। फाउंडेशन के मुताबिक, पुरस्कार मिलने के बाद विजेता की पहचान स्थायी रहती है, हालांकि पदक व्यक्तिगत संपत्ति होने के कारण उसे उपहार में दिया जा सकता है। इसी संदर्भ में नोबेल संस्थान ने सोशल मीडिया पर कहा कि “पदक के मालिक बदल सकते हैं, लेकिन नोबेल विजेता की उपाधि नहीं।”

मचाडो को अक्टूबर 2025 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उन्हें यह सम्मान वेनेजुएला में लोकतांत्रिक अधिकारों की बहाली और तानाशाही के खिलाफ शांतिपूर्ण संघर्ष के लिए दिया गया। 2024 में वे विपक्ष की राष्ट्रपति उम्मीदवार थीं, लेकिन उनकी उम्मीदवारी को सरकारी आदेश के तहत रद्द कर दिया गया था।

राष्ट्रपति ट्रम्प ने बाद में सोशल मीडिया मंच ‘ट्रुथ सोशल’ पर मचाडो को “अद्भुत और साहसी महिला” बताते हुए उनसे मुलाकात को सम्मानजनक करार दिया। हालांकि, वेनेजुएला में चुनाव, सत्ता हस्तांतरण या नई राजनीतिक व्यवस्था को लेकर दोनों नेताओं के बीच किसी ठोस सहमति के संकेत नहीं मिले।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुलाकात और नोबेल मेडल सौंपने की घटना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव बना रणनीति हो सकती है, लेकिन वेनेजुएला की सत्ता संरचना में तत्काल बदलाव की संभावना फिलहाल सीमित दिखती है।

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16 Jan 2026 By Nitin Trivedi

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वेनेजुएला की प्रमुख विपक्षी नेता और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मारिया कोरिना मचाडो ने गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से व्हाइट हाउस में मुलाकात की और उन्हें अपना नोबेल शांति पुरस्कार का मेडल भेंट किया। यह मुलाकात ऐसे समय पर हुई है जब वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन, अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप और नेतृत्व को लेकर बहस तेज है। मचाडो द्वारा पुरस्कार सौंपे जाने को प्रतीकात्मक राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

यह मुलाकात ट्रम्प के उस फैसले के बाद पहली प्रत्यक्ष बैठक मानी जा रही है, जब जनवरी की शुरुआत में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अमेरिकी कार्रवाई के तहत हिरासत में लिया गया था। बैठक बंद कमरे में हुई और इसके बाद व्हाइट हाउस की ओर से कोई औपचारिक संयुक्त बयान जारी नहीं किया गया।

मुलाकात के बाद पत्रकारों से बातचीत में मचाडो ने कहा कि उन्होंने नोबेल शांति पुरस्कार का मेडल राष्ट्रपति ट्रम्प को सौंपा है। उन्होंने इसे वेनेजुएला के लोगों की ओर से सम्मान बताया और कहा कि यह दिन उनके देश के लिए ऐतिहासिक है। हालांकि, व्हाइट हाउस ने यह स्पष्ट नहीं किया कि ट्रम्प ने मेडल औपचारिक रूप से स्वीकार किया या नहीं।

व्हाइट हाउस से बाहर निकलने के बाद मचाडो ने पेंसिल्वेनिया एवेन्यू पर जुटे समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा, “हम राष्ट्रपति ट्रम्प पर भरोसा कर सकते हैं।” यह बयान ऐसे समय आया है जब ट्रम्प ने अब तक मचाडो को वेनेजुएला की वैध या अंतरिम राष्ट्रपति के रूप में समर्थन नहीं दिया है। फिलहाल अमेरिका डेल्सी रोड्रिग्ज के नेतृत्व वाली अंतरिम व्यवस्था के साथ काम कर रहा है।

नोबेल फाउंडेशन ने इस घटनाक्रम पर पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि नोबेल शांति पुरस्कार की उपाधि किसी और को हस्तांतरित नहीं की जा सकती। फाउंडेशन के मुताबिक, पुरस्कार मिलने के बाद विजेता की पहचान स्थायी रहती है, हालांकि पदक व्यक्तिगत संपत्ति होने के कारण उसे उपहार में दिया जा सकता है। इसी संदर्भ में नोबेल संस्थान ने सोशल मीडिया पर कहा कि “पदक के मालिक बदल सकते हैं, लेकिन नोबेल विजेता की उपाधि नहीं।”

मचाडो को अक्टूबर 2025 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उन्हें यह सम्मान वेनेजुएला में लोकतांत्रिक अधिकारों की बहाली और तानाशाही के खिलाफ शांतिपूर्ण संघर्ष के लिए दिया गया। 2024 में वे विपक्ष की राष्ट्रपति उम्मीदवार थीं, लेकिन उनकी उम्मीदवारी को सरकारी आदेश के तहत रद्द कर दिया गया था।

राष्ट्रपति ट्रम्प ने बाद में सोशल मीडिया मंच ‘ट्रुथ सोशल’ पर मचाडो को “अद्भुत और साहसी महिला” बताते हुए उनसे मुलाकात को सम्मानजनक करार दिया। हालांकि, वेनेजुएला में चुनाव, सत्ता हस्तांतरण या नई राजनीतिक व्यवस्था को लेकर दोनों नेताओं के बीच किसी ठोस सहमति के संकेत नहीं मिले।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुलाकात और नोबेल मेडल सौंपने की घटना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव बना रणनीति हो सकती है, लेकिन वेनेजुएला की सत्ता संरचना में तत्काल बदलाव की संभावना फिलहाल सीमित दिखती है।

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