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लाफिंग बुद्धा और गौतम बुद्ध एक नहीं, जानिए दोनों में क्या है बड़ा अंतर
धर्म डेस्क
लाफिंग बुद्धा और गौतम बुद्ध को एक जैसा मानना गलत है। जानिए दोनों का इतिहास, पहचान, महत्व और घर में रखने की सही जगह।
आपने देखा होगा कि लोग अपने घर में लाफिंग बुद्धा या गौतम बुद्ध की मूर्ति रखते हैं। वैसे लोग इसे एक ही समझ लेते हैं, लेकिन दोनों में बहुत बड़ा अंतर है। जाहिर है कि दोनों कहीं न कहीं देखने में एक जैसे लगते हैं, यानी दोनों बौद्ध परंपरा से जुड़े हुए दिखाई देते हैं, लेकिन इन दोनों पहचान, इतिहास और महत्व अलग-अलग है। भगवान बुद्ध को जीवन, ध्यान और मोक्ष का संदेश देने का प्रतीक माना जाता है। वहीं लाफिंग बुद्धा को ख़ुशी और पॉजिटिविटी का प्रतीक माना जाता है। पर लोग कंफ्यूज होकर इसे एक जैसा ही समझ लेते हैं। आइए जानते हैं कि दोनों तो में क्या-क्या अंतर होता है।
गौतम बुद्ध के बारे में जानें
आपको बता दें कि गौतम बुद्ध का जन्म 563 ईसा पहले नेपाल में हुआ था। इनका जन्म पहले राजकुमार सिद्धार्थ के रूप में हुआ था, लेकिन बाद में जीवन क दुखों के बारे में जानकर राजमहल और सुख सुविधाओं का त्याग कर दिया था और इसके बाद कठोर तपस्या करके बोधगया में ज्ञान प्राप्त किया था। उन्होंने पूरा जीवन आत्मज्ञान और मोक्ष की खोज में बिता दिया।
बता दें कि वैशाख पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा भी कहा जाता है। इसे पूरे भारत में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। इस तिथि को भगवान बुद्ध के जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण (देह त्याग) तीनों घटनाओं से जोड़कर देखा जाता है।
कौन हैं लाफिंग बुद्धा
आपको जानकारी के लिए बता दें कि लाफिंग बुद्धा का असली नाम बुदाई था। ये 10वीं शताब्दी के एक चीनी बौद्ध भिक्षु थे। वो हमेशा खुश रहते थे और अपने साथ हरदम एक झोला रखते थे। कहा जाता है कि वो बच्चों और गरीबों में खुशियां बांटते थे। वो लोगों को उपहार और मिठाइयां भी बांटते थे। चीनी परंपरा में इनको भविष्य का बुद्ध यानी मैत्रेय बुद्ध का प्रतीक माना जाता है। पर ये गौतम बुद्ध नहीं हैं।
दोनों में अंतर
गौतम बुद्ध की मूर्ति देखने में शांत, गंभीर और ध्यानमग्न मुद्रा में होती है। सिर पर ज्ञान का प्रतीक ऊर्जा से भरा होता है और चेहरे पर गहरी शांति दिखाई देती है। वहीं लाफिंग बुद्धा की मूर्ति देखने में मोटा पेट, खुली मुस्कान और गंजा सिर होता है, जिसे आनंद और संतोष का प्रतीक माना जाता है।
गौतम बुद्ध सामान्य भिक्षु वस्त्र में दिखाई देते हैं और वो ध्यान मुद्रा, अभय मुद्रा या भूमिस्पर्श मुद्रा रहते हैं। दूसरी तरफ लाफिंग बुद्धा खुले वस्त्रों में दिखाई देते हैं और उनके हाथ में माला, पोटली या धन का प्रतीक वू लू भी दिखती है।
क्यों रखते हैं घर में
गौतम बुद्ध की मूर्ति को ध्यान और पूजा की जगह पर रखना शुभ माना जाता है, जहां व्यक्ति मानसिक शांति और ध्यान पा सके। जबकि लाफिंग बुद्धा को ज्यादातर घर के ड्रॉइंग रूम या मेन दरवाजे पर रखा जाता है, जिससे कि घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो और खुशहाली आए।
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लाफिंग बुद्धा और गौतम बुद्ध एक नहीं, जानिए दोनों में क्या है बड़ा अंतर
धर्म डेस्क
आपने देखा होगा कि लोग अपने घर में लाफिंग बुद्धा या गौतम बुद्ध की मूर्ति रखते हैं। वैसे लोग इसे एक ही समझ लेते हैं, लेकिन दोनों में बहुत बड़ा अंतर है। जाहिर है कि दोनों कहीं न कहीं देखने में एक जैसे लगते हैं, यानी दोनों बौद्ध परंपरा से जुड़े हुए दिखाई देते हैं, लेकिन इन दोनों पहचान, इतिहास और महत्व अलग-अलग है। भगवान बुद्ध को जीवन, ध्यान और मोक्ष का संदेश देने का प्रतीक माना जाता है। वहीं लाफिंग बुद्धा को ख़ुशी और पॉजिटिविटी का प्रतीक माना जाता है। पर लोग कंफ्यूज होकर इसे एक जैसा ही समझ लेते हैं। आइए जानते हैं कि दोनों तो में क्या-क्या अंतर होता है।
गौतम बुद्ध के बारे में जानें
आपको बता दें कि गौतम बुद्ध का जन्म 563 ईसा पहले नेपाल में हुआ था। इनका जन्म पहले राजकुमार सिद्धार्थ के रूप में हुआ था, लेकिन बाद में जीवन क दुखों के बारे में जानकर राजमहल और सुख सुविधाओं का त्याग कर दिया था और इसके बाद कठोर तपस्या करके बोधगया में ज्ञान प्राप्त किया था। उन्होंने पूरा जीवन आत्मज्ञान और मोक्ष की खोज में बिता दिया।
बता दें कि वैशाख पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा भी कहा जाता है। इसे पूरे भारत में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। इस तिथि को भगवान बुद्ध के जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण (देह त्याग) तीनों घटनाओं से जोड़कर देखा जाता है।
कौन हैं लाफिंग बुद्धा
आपको जानकारी के लिए बता दें कि लाफिंग बुद्धा का असली नाम बुदाई था। ये 10वीं शताब्दी के एक चीनी बौद्ध भिक्षु थे। वो हमेशा खुश रहते थे और अपने साथ हरदम एक झोला रखते थे। कहा जाता है कि वो बच्चों और गरीबों में खुशियां बांटते थे। वो लोगों को उपहार और मिठाइयां भी बांटते थे। चीनी परंपरा में इनको भविष्य का बुद्ध यानी मैत्रेय बुद्ध का प्रतीक माना जाता है। पर ये गौतम बुद्ध नहीं हैं।
दोनों में अंतर
गौतम बुद्ध की मूर्ति देखने में शांत, गंभीर और ध्यानमग्न मुद्रा में होती है। सिर पर ज्ञान का प्रतीक ऊर्जा से भरा होता है और चेहरे पर गहरी शांति दिखाई देती है। वहीं लाफिंग बुद्धा की मूर्ति देखने में मोटा पेट, खुली मुस्कान और गंजा सिर होता है, जिसे आनंद और संतोष का प्रतीक माना जाता है।
गौतम बुद्ध सामान्य भिक्षु वस्त्र में दिखाई देते हैं और वो ध्यान मुद्रा, अभय मुद्रा या भूमिस्पर्श मुद्रा रहते हैं। दूसरी तरफ लाफिंग बुद्धा खुले वस्त्रों में दिखाई देते हैं और उनके हाथ में माला, पोटली या धन का प्रतीक वू लू भी दिखती है।
क्यों रखते हैं घर में
गौतम बुद्ध की मूर्ति को ध्यान और पूजा की जगह पर रखना शुभ माना जाता है, जहां व्यक्ति मानसिक शांति और ध्यान पा सके। जबकि लाफिंग बुद्धा को ज्यादातर घर के ड्रॉइंग रूम या मेन दरवाजे पर रखा जाता है, जिससे कि घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो और खुशहाली आए।
