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एनएसईएफआई ने इंटीग्रेटेड डीकार्बोनाइजेशन को गति देने के लिए नई सहायक इकाई की शुरुआत की
Digital Desk
एनएसईएफआई सस्टेनेबल एनर्जी फेडरेशन ऑफ इंडस्ट्री भारत को नेट ज़ीरो अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए एक साझा मंच के रूप में उभरेगा
नेशनल सोलर एनर्जी फेडरेशन ऑफ इंडिया (एनएसईएफआई) ने आज अपने संगठनात्मक ढांचे में एक अहम बदलाव का ऐलान किया है। इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए, संस्था ने अपनी नई सहायक इकाई एनएसईएफआई सस्टेनेबल एनर्जी फेडरेशन ऑफ इंडस्ट्री की शुरुआत की है। यह पहल एनएसईएफआई के उस बदलाव को दर्शाती है, जिसमें वह अब केवल सौर ऊर्जा तक सीमित न रहकर, देश के व्यापक और इंटीग्रेटेडडीकार्बोनाइजेशन एजेंडे पर काम करेगा।
नई सहायक इकाई के माध्यम से एनएसईएफआई अब अपनी पहुंच को सौर ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण (शॉर्ट और लॉन्ग ड्यूरेशन) और रिन्यूएबल मैन्युफैक्चरिंग से आगे बढ़ाते हुए ग्रीन हाइड्रोजन और अन्य ग्रीन मॉलिक्यूल्स जैसे उभरते क्षेत्रों तक विस्तारित करेगा। इसके साथ ही, यह इकाई उद्योग और मोबिलिटी सेक्टर में डीकार्बोनाइजेशन पर भी विशेष ध्यान देगी, जिससे भारत के नेट ज़ीरो लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा ।
इस घोषणा पर बोलते हुए एनएसईएफआई के सीईओ सुब्रह्मण्यम पुलिपाका ने कहा,
“बिजली उत्पादन के क्षेत्र में डीकार्बोनाइजेशन को लेकर भारत ने जो प्रगति की है, वह वैश्विक स्तर पर एक मिसाल बन चुकी है। हमारे पास 1,000 से अधिक हितधारकों का मजबूत नेटवर्क है, और इसी आधार पर अब समय आ गया है कि हम केवल सप्लाई साइड तक सीमित न रहकर डिमांड साइड को भी अपने दायरे में शामिल करें। 2030 के लक्ष्यों की ओर बढ़ते हुए, विभिन्न क्षेत्रों के बीच समन्वित दृष्टिकोण अपनाना बेहद जरूरी होगा, ताकि 2047 तक विकसित भारत के विज़न और 2070 तक नेट ज़ीरो के लक्ष्य को साकार किया जा सके।”
भारत में डीकार्बोनाइजेशन चार प्रमुख स्तंभों—बिजली, कृषि, उद्योग और मोबिलिटी—पर आधारित है। पिछले 13 वर्षों में एनएसईएफआई ने अपने सदस्यों के सहयोग से बिजली के क्षेत्र में डीकार्बोनाइजेशन को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। वर्ष 2023 में फेडरेशन ने इंडिया एग्रीवोल्टाइक्स एलायंस की शुरुआत की थी , जिसका उद्देश्य कृषि-खाद्य श्रृंखला में टिकाऊ डीकार्बोनाइजेशन को बढ़ावा देना है। इसके बाद, तेजी से बढ़ते डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए एनएसईएफआई ग्रीन डेटा सेंटर कोएलिशन का गठन किया गया।
अब एनएसईएफआई सस्टेनेबल एनर्जी फेडरेशन ऑफ इंडस्ट्री के गठन के साथ, बिजली और कृषि क्षेत्रों में अपने मौजूदा प्रयासों को उद्योग और मोबिलिटी के नए फोकस क्षेत्रों के साथ जोड़ते हुए एक समेकित मंच तैयार करेगा। इसका उद्देश्य भारत को नेट ज़ीरो अर्थव्यवस्था की ओर तेजी से अग्रसर करना है।
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एनएसईएफआई ने इंटीग्रेटेड डीकार्बोनाइजेशन को गति देने के लिए नई सहायक इकाई की शुरुआत की
Digital Desk
नेशनल सोलर एनर्जी फेडरेशन ऑफ इंडिया (एनएसईएफआई) ने आज अपने संगठनात्मक ढांचे में एक अहम बदलाव का ऐलान किया है। इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए, संस्था ने अपनी नई सहायक इकाई एनएसईएफआई सस्टेनेबल एनर्जी फेडरेशन ऑफ इंडस्ट्री की शुरुआत की है। यह पहल एनएसईएफआई के उस बदलाव को दर्शाती है, जिसमें वह अब केवल सौर ऊर्जा तक सीमित न रहकर, देश के व्यापक और इंटीग्रेटेडडीकार्बोनाइजेशन एजेंडे पर काम करेगा।
नई सहायक इकाई के माध्यम से एनएसईएफआई अब अपनी पहुंच को सौर ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण (शॉर्ट और लॉन्ग ड्यूरेशन) और रिन्यूएबल मैन्युफैक्चरिंग से आगे बढ़ाते हुए ग्रीन हाइड्रोजन और अन्य ग्रीन मॉलिक्यूल्स जैसे उभरते क्षेत्रों तक विस्तारित करेगा। इसके साथ ही, यह इकाई उद्योग और मोबिलिटी सेक्टर में डीकार्बोनाइजेशन पर भी विशेष ध्यान देगी, जिससे भारत के नेट ज़ीरो लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा ।
इस घोषणा पर बोलते हुए एनएसईएफआई के सीईओ सुब्रह्मण्यम पुलिपाका ने कहा,
“बिजली उत्पादन के क्षेत्र में डीकार्बोनाइजेशन को लेकर भारत ने जो प्रगति की है, वह वैश्विक स्तर पर एक मिसाल बन चुकी है। हमारे पास 1,000 से अधिक हितधारकों का मजबूत नेटवर्क है, और इसी आधार पर अब समय आ गया है कि हम केवल सप्लाई साइड तक सीमित न रहकर डिमांड साइड को भी अपने दायरे में शामिल करें। 2030 के लक्ष्यों की ओर बढ़ते हुए, विभिन्न क्षेत्रों के बीच समन्वित दृष्टिकोण अपनाना बेहद जरूरी होगा, ताकि 2047 तक विकसित भारत के विज़न और 2070 तक नेट ज़ीरो के लक्ष्य को साकार किया जा सके।”
भारत में डीकार्बोनाइजेशन चार प्रमुख स्तंभों—बिजली, कृषि, उद्योग और मोबिलिटी—पर आधारित है। पिछले 13 वर्षों में एनएसईएफआई ने अपने सदस्यों के सहयोग से बिजली के क्षेत्र में डीकार्बोनाइजेशन को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। वर्ष 2023 में फेडरेशन ने इंडिया एग्रीवोल्टाइक्स एलायंस की शुरुआत की थी , जिसका उद्देश्य कृषि-खाद्य श्रृंखला में टिकाऊ डीकार्बोनाइजेशन को बढ़ावा देना है। इसके बाद, तेजी से बढ़ते डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए एनएसईएफआई ग्रीन डेटा सेंटर कोएलिशन का गठन किया गया।
अब एनएसईएफआई सस्टेनेबल एनर्जी फेडरेशन ऑफ इंडस्ट्री के गठन के साथ, बिजली और कृषि क्षेत्रों में अपने मौजूदा प्रयासों को उद्योग और मोबिलिटी के नए फोकस क्षेत्रों के साथ जोड़ते हुए एक समेकित मंच तैयार करेगा। इसका उद्देश्य भारत को नेट ज़ीरो अर्थव्यवस्था की ओर तेजी से अग्रसर करना है।
