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तेल कीमतों में उछाल से बढ़ा दबाव: पेट्रोल-डीजल और LPG महंगे होने के संकेत
Business News
कच्चा तेल 120 डॉलर पार, सरकारी कंपनियों ने बढ़ते घाटे का दिया हवाला; सरकार फिलहाल राहत के मूड में
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी ने भारत में ईंधन की कीमतों को लेकर नई चिंता खड़ी कर दी है। तेल कंपनियों पर बढ़ते दबाव के बीच आने वाले दिनों में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के दाम बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियां लगातार घाटे में चल रही हैं और उन्होंने कीमतों में संशोधन की जरूरत बताई है। हाल ही में वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं, जिससे आयात लागत में भारी इजाफा हुआ है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में तनाव और आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण कीमतों में यह उछाल आया है। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका से बाजार में अस्थिरता बढ़ी है।
हालांकि, सरकार फिलहाल आम उपभोक्ताओं पर सीधा असर कम रखने के पक्ष में नजर आ रही है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और कीमतों में तत्काल बढ़ोतरी का कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
गौरतलब है कि हाल के महीनों में वाणिज्यिक गैस सिलेंडर और विमान ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी की जा चुकी है, जबकि पेट्रोल और डीजल के दाम लंबे समय से स्थिर बने हुए हैं। घरेलू एलपीजी में भी सीमित वृद्धि ही की गई है।
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतों में तेजी बनी रहती है, तो सरकार के सामने दो विकल्प होंगे—या तो उपभोक्ताओं पर बोझ डाला जाए या फिर कंपनियों को सब्सिडी देकर राहत दी जाए। दोनों ही स्थितियों में आर्थिक संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
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तेल कीमतों में उछाल से बढ़ा दबाव: पेट्रोल-डीजल और LPG महंगे होने के संकेत
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अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी ने भारत में ईंधन की कीमतों को लेकर नई चिंता खड़ी कर दी है। तेल कंपनियों पर बढ़ते दबाव के बीच आने वाले दिनों में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के दाम बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियां लगातार घाटे में चल रही हैं और उन्होंने कीमतों में संशोधन की जरूरत बताई है। हाल ही में वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं, जिससे आयात लागत में भारी इजाफा हुआ है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में तनाव और आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण कीमतों में यह उछाल आया है। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका से बाजार में अस्थिरता बढ़ी है।
हालांकि, सरकार फिलहाल आम उपभोक्ताओं पर सीधा असर कम रखने के पक्ष में नजर आ रही है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और कीमतों में तत्काल बढ़ोतरी का कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
गौरतलब है कि हाल के महीनों में वाणिज्यिक गैस सिलेंडर और विमान ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी की जा चुकी है, जबकि पेट्रोल और डीजल के दाम लंबे समय से स्थिर बने हुए हैं। घरेलू एलपीजी में भी सीमित वृद्धि ही की गई है।
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतों में तेजी बनी रहती है, तो सरकार के सामने दो विकल्प होंगे—या तो उपभोक्ताओं पर बोझ डाला जाए या फिर कंपनियों को सब्सिडी देकर राहत दी जाए। दोनों ही स्थितियों में आर्थिक संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
