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गरुड़ पुराण में अकाल मृत्यु का रहस्य: कौन से 5 पाप घटा देते हैं इंसान की आयु
धर्म डेस्क
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, व्यक्ति के कर्म ही तय करते हैं प्राकृतिक मृत्यु या असमय अंत, गरुड़ पुराण में बताए गए गंभीर कारण
गरुड़ पुराण में जीवन और मृत्यु को कर्मों से जोड़कर देखा गया है। इस धर्मग्रंथ के अनुसार, हर व्यक्ति की मृत्यु निश्चित है, लेकिन यह तय कर्म करते हैं कि मृत्यु प्राकृतिक होगी या असमय। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब कोई व्यक्ति अपनी निर्धारित आयु पूरी होने से पहले किसी दुर्घटना, हिंसा या आत्मघाती कारणों से प्राण त्याग देता है, तो उसे अकाल मृत्यु कहा जाता है। हाल के दिनों में इस विषय पर धार्मिक और सामाजिक चर्चाएं फिर तेज हुई हैं, जिससे यह प्रश्न उठ रहा है कि आखिर अकाल मृत्यु क्यों आती है।
गरुड़ पुराण के अनुसार, अत्यधिक भूख, हिंसक पशु के हमले, आग, जहर, फांसी, जल में डूबना, सर्पदंश या भीषण दुर्घटनाओं में होने वाली मौतें अकाल मृत्यु की श्रेणी में आती हैं। शास्त्र यह भी कहते हैं कि ऐसी मृत्यु केवल संयोग नहीं होती, बल्कि व्यक्ति के पूर्व और वर्तमान कर्मों का परिणाम होती है।
ग्रंथ में पांच ऐसे प्रमुख पाप कर्मों का उल्लेख है, जिन्हें अकाल मृत्यु का कारण माना गया है। पहला, विवाह के बाद जीवनसाथी के प्रति विश्वासघात और परस्त्री या परपुरुष से संबंध। इसे सामाजिक और धार्मिक दोनों स्तरों पर गंभीर अपराध माना गया है। दूसरा, तीर्थ स्थलों, मंदिरों और पवित्र नदियों को अपवित्र करना या वहां अनैतिक आचरण करना। मान्यता है कि इससे व्यक्ति का पुण्य नष्ट हो जाता है।
तीसरा बड़ा पाप माता-पिता, गुरु और साधु-संतों का अपमान करना बताया गया है। गरुड़ पुराण में इसे ब्रह्महत्या के समान गंभीर माना गया है। चौथा, बुजुर्गों, निर्बलों और निर्दोष लोगों को शारीरिक, मानसिक या आर्थिक कष्ट देना। ऐसे कर्म व्यक्ति की आयु को तेजी से घटाते हैं। पांचवां, धर्म के नियमों का उपहास करना और मानवता के विरुद्ध कार्य करना, जिससे व्यक्ति का अंत दुखद और आकस्मिक बताया गया है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्राकृतिक मृत्यु के बाद आत्मा को अपेक्षाकृत शीघ्र नया शरीर प्राप्त हो जाता है, जबकि अकाल मृत्यु वाली आत्माएं असंतुष्ट मानी जाती हैं। उनकी इच्छाएं अधूरी रह जाती हैं और वे प्रेत योनि में भटकती हैं। इसे आत्मा की दुर्गति कहा गया है।
हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि ये व्याख्याएं आस्था और परंपरा से जुड़ी हैं। आधुनिक समाज में इन्हें नैतिक जीवन, सामाजिक जिम्मेदारी और मानवीय मूल्यों के प्रतीक के रूप में देखा जाना चाहिए।
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