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मौनी अमावस्या पर माघ मेले का तीसरा शाही स्नान: संगम में आस्था का सैलाब, लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की तैयारी
धर्म डेस्क
18 जनवरी को मौनी अमावस्या, शुभ योगों में होगा शाही स्नान; प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए
माघ मेले का तीसरा और अत्यंत महत्वपूर्ण शाही स्नान मौनी अमावस्या के अवसर पर 18 जनवरी को संगम तट पर संपन्न होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन संगम में स्नान करने से जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसे देखते हुए देशभर से लाखों श्रद्धालुओं, संतों और कल्पवासियों के प्रयागराज पहुंचने की संभावना है।
क्या है मौनी अमावस्या और क्यों है विशेष
हिंदू पंचांग के अनुसार, मौनी अमावस्या माघ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को आती है। वर्ष 2026 में इसकी तिथि 18 जनवरी की रात 12 बजकर 3 मिनट से प्रारंभ होकर 19 जनवरी की रात 1 बजकर 21 मिनट तक रहेगी। हालांकि धार्मिक परंपराओं में रात्रि तिथि के महत्व के कारण मौनी अमावस्या का पर्व 18 जनवरी को मनाया जाएगा। इस दिन मौन व्रत रखकर पवित्र नदियों में स्नान और दान-पुण्य का विशेष महत्व माना गया है।
शाही स्नान का शुभ मुहूर्त और योग
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, ब्रह्म मुहूर्त में सुबह 5:27 से 6:21 बजे तक संगम में स्नान को अमृत स्नान माना गया है। इसके अलावा पंचग्रही योग पूरे दिन रहेगा, जबकि सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 10:14 बजे से अगले दिन तक प्रभावी रहेगा। वृंदावन के ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स के अनुसार, इन योगों में किया गया स्नान और जप अक्षय फल देता है।
कौन-कौन करेगा शाही स्नान
परंपरा के अनुसार, मौनी अमावस्या के दिन विभिन्न अखाड़ों के साधु-संत, नागा साधु और ऋषि-मुनि सबसे पहले गाजे-बाजे के साथ संगम में डुबकी लगाएंगे। इसके बाद कल्पवासी और आम श्रद्धालु स्नान करेंगे। मान्यता है कि अखाड़ों के स्नान के बाद संगम जल में विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है।
प्रशासन की तैयारियां
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन और मेला प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात और स्वास्थ्य सेवाओं के पुख्ता इंतजाम किए हैं। संगम क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल, मेडिकल कैंप, अस्थायी पुल और दिशा-सूचक लगाए गए हैं। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे निर्धारित घाटों पर ही स्नान करें और सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।
महाशिवरात्रि तक चलेगा माघ मेला
माघ मेला महाशिवरात्रि के दिन समाप्त होगा। धार्मिक मान्यता है कि माघ माह में सभी देवी-देवता संगम तट पर निवास करते हैं। ऐसे में मौनी अमावस्या का शाही स्नान माघ मेले का सबसे महत्वपूर्ण स्नान पर्व माना जाता है।
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