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तिलकुट चौथ व्रत 2026: जानें कथा और महत्व, माता-पिता जरूर पढ़ें
धर्म डेस्क
माघ मास की चतुर्थी पर संतान की लंबी आयु और परिवार की सुरक्षा के लिए किया जाता है तिलकुट चौथ व्रत, कथा सुनना अनिवार्य
माघ मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाने वाला तिलकुट चौथ व्रत हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। यह व्रत भगवान गणेश को समर्पित होता है और माता-पिता द्वारा संतान की लंबी आयु, विवाह तथा परिवार की सुरक्षा के लिए रखा जाता है। ज्यादातर माताएं शाम के शुभ मुहूर्त में पूजा करने के बाद व्रत कथा का पाठ अवश्य करती हैं।
क्या है तिलकुट चौथ की कथा
कथा के अनुसार, एक साहूकार और उसकी पत्नी धर्म और पुण्य को नहीं मानते थे, जिसके कारण उनका कोई संतान नहीं था। एक दिन साहूकारनी अपने पड़ोस गई, जहाँ पड़ोसिन सकट चौथ का व्रत कर रही थी और कथा सुना रही थी। पड़ोसिन ने बताया कि चौथ व्रत करने से अन्न, धन, सुहाग और पुत्र की प्राप्ति होती है। इसे सुनकर साहूकारनी ने संकल्प किया कि यदि उसे संतान प्राप्त हो, तो वह सवा सेर तिलकुट चढ़ाकर चौथ का व्रत रखेगी।
साहूकारनी की यह मनोकामना भगवान गणेश की कृपा से पूरी हुई और उसके घर पुत्र का जन्म हुआ। जैसे-जैसे समय बीतता गया, पुत्र का विवाह तय हुआ। लेकिन साहूकारनी ने तिलकुट चढ़ाने का व्रत नहीं किया। चौथ माता नाराज हो गईं और विवाह से पहले उसके पुत्र को पीपल के पेड़ पर बिठा दिया।
जब विवाह की होने वाली दुल्हन अपनी सहेलियों के साथ जंगल में दूब लेने गई, तब उसे पेड़ से आवाज सुनाई दी: “ओ मेरी अर्धब्यहि।” यह सुनकर माता ने साहूकारनी के घर जाकर स्थिति स्पष्ट की। अंततः साहूकारनी ने ढाई मन तिलकुट चढ़ाया। इससे श्री गणेश प्रसन्न हुए और पुत्र को विवाह स्थल पर सुरक्षित पहुंचा दिया।
कैसे रखें तिलकुट चौथ व्रत
विशेषज्ञ बताते हैं कि इस व्रत में माता तिल और गुड़ से भोग तैयार कर गणेश जी को अर्पित करती हैं। व्रत के दौरान कथा सुनना आवश्यक माना जाता है। यह व्रत संतान की लंबी आयु, परिवार में सुख-शांति और समृद्धि के लिए किया जाता है।
क्यों है महत्व
तिलकुट चौथ व्रत का मुख्य उद्देश्य माता-पिता और संतान के बीच आध्यात्मिक और मानसिक संबंध को मजबूत करना है। इसे करने से घर में सुख, समृद्धि और बाधाओं का निवारण होता है। कथा सुनने से बच्चों में माता-पिता के प्रति श्रद्धा और आस्था बढ़ती है।
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