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बलात्कार मामले में पीड़िता को हाईकोर्ट से बड़ी राहत
ग्वालियर (म.प्र.)
ग्वालियर खंडपीठ ने IG को दिए निर्देश, ट्रायल खत्म होने तक गवाहों और परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आदेश
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने एक बलात्कार पीड़िता को राहत देते हुए उसकी और उसके परिजनों की सुरक्षा को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने ग्वालियर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IG) को आदेश दिया है कि मामले से जुड़े सभी गवाहों, जिनमें पीड़िता स्वयं भी शामिल है, को सत्र परीक्षण की समाप्ति तक पूर्ण सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की संवैधानिक और कानूनी जिम्मेदारी है।
यह आदेश न्यायमूर्ति मिलिंद रमेश फडके ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत दायर याचिका पर सुनवाई के बाद पारित किया। याचिका में पीड़िता ने आरोप लगाया था कि न केवल उसे और उसके परिवार को लगातार धमकियां मिल रही हैं, बल्कि प्रारंभिक स्तर पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने में भी लापरवाही बरती थी।
क्या है पूरा मामला
याचिकाकर्ता के अनुसार, वह एक गंभीर आपराधिक मामले में पीड़िता है और आरोपी पक्ष की ओर से लगातार दबाव बनाया जा रहा है। एफआईआर दर्ज होने के बाद भी हालात नहीं बदले और उसे व उसके परिजनों को धमकियां मिलती रहीं। इन परिस्थितियों में पीड़िता ने हाईकोर्ट का रुख करते हुए सुरक्षा की मांग की थी, ताकि वह बिना डर के न्यायिक प्रक्रिया में हिस्सा ले सके।
पहले भी दिए जा चुके हैं निर्देश
सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि इससे पहले भी हाईकोर्ट ने संबंधित पुलिस अधिकारियों को सुरक्षा मुहैया कराने के निर्देश दिए थे। हालांकि, याचिकाकर्ता का कहना था कि जमीनी स्तर पर उन आदेशों का प्रभावी पालन नहीं हुआ। लगातार मिल रही धमकियों के कारण पीड़िता और उसके परिवार में भय का माहौल बना हुआ है, जिससे निष्पक्ष ट्रायल प्रभावित होने की आशंका है।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा कि यदि गवाह सुरक्षित नहीं होंगे, तो न्यायिक प्रक्रिया पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि किसी भी आपराधिक मुकदमे में निष्पक्ष सुनवाई तभी संभव है, जब पीड़ित और गवाह बिना किसी भय, दबाव या प्रलोभन के बयान दे सकें। कोर्ट ने IG को निर्देश दिए कि वे स्वयं या किसी सक्षम वरिष्ठ अधिकारी के माध्यम से सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी सुनिश्चित करें।
प्रशासन की जिम्मेदारी तय
अदालत ने यह भी कहा कि बलात्कार जैसे गंभीर अपराधों में पीड़िता की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि सुरक्षा में कोई चूक होती है, तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जा सकती है। कोर्ट ने ट्रायल समाप्त होने तक सुरक्षा देने के निर्देश के साथ यह भी संकेत दिया कि आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त सुरक्षात्मक कदम उठाए जाएं।
आगे की स्थिति
हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अब पुलिस प्रशासन पर यह जिम्मेदारी है कि वह पीड़िता, उसके परिजनों और सभी गवाहों की सुरक्षा को लेकर ठोस और प्रभावी व्यवस्था करे। मामले में सत्र न्यायालय में ट्रायल जारी है और हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन रिपोर्ट के माध्यम से सुनिश्चित किया जाएगा।
यह फैसला न केवल पीड़िता के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि न्याय प्रक्रिया में भय और दबाव को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
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