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आज का पंचांग : विनायक चतुर्थी पर गणेश पूजा का विशेष योग, जानें शुभ मुहूर्त और राहुकाल
धर्म डेस्क
माघ शुक्ल चतुर्थी पर शतभिषा नक्षत्र और वरीयान योग का संयोग, गणपति की कृपा पाने के लिए आज का दिन शुभ
आज 22 जनवरी 2026, गुरुवार को माघ माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि है, जिसे विनायक चतुर्थी और तिल चतुर्थी के रूप में मनाया जा रहा है। पंचांग के अनुसार यह दिन भगवान गणेश की पूजा-अर्चना के लिए विशेष फलदायी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आज शुभ मुहूर्त में गणपति पूजन करने से विघ्न दूर होते हैं और कार्यों में सफलता मिलती है।
राष्ट्रीय पंचांग के अनुसार आज की तिथि माघ शुक्ल चतुर्थी है, जो अर्धरात्रि के बाद रात 2 बजकर 29 मिनट तक रहेगी, इसके बाद पंचमी तिथि प्रारंभ होगी। शक संवत 1947 और विक्रम संवत 2082 चल रहा है। सूर्य उत्तरायण और शिशिर ऋतु का प्रभाव बना हुआ है। चंद्रमा पूरे दिन और रात कुंभ राशि में संचार करेगा, जिससे बौद्धिक कार्यों और योजनाओं के लिए दिन अनुकूल माना जा रहा है।
आज शतभिषा नक्षत्र दोपहर 2 बजकर 27 मिनट तक रहेगा, इसके बाद पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र आरंभ होगा। योग की बात करें तो वरीयान योग सुबह 5 बजकर 48 मिनट तक रहेगा, जिसके बाद परिधि योग लगेगा। करण के रूप में वणिज करण दोपहर 2 बजकर 43 मिनट तक और फिर बव करण प्रभावी रहेगा।
शुभ मुहूर्त की बात करें तो
ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 11 मिनट से 6 बजकर 4 मिनट तक रहेगा। विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 8 मिनट से 2 बजकर 51 मिनट तक है। इसके अलावा गोधूलि बेला शाम 5 बजकर 41 मिनट से 6 बजकर 7 मिनट तक मानी गई है, जो पूजा-पाठ और संकल्प के लिए उपयुक्त है।
अशुभ समय में
दोपहर 1 बजकर 30 मिनट से 3 बजे तक राहुकाल रहेगा। सुबह 9 बजे से 10 बजकर 30 मिनट तक गुलिक काल और सुबह 6 बजे से 7 बजकर 30 मिनट तक यमगंड का समय है। पंचक आज पूरे दिन रहेगा, इसलिए कुछ कार्यों में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
सूर्योदय और सूर्यास्त
आज सूर्योदय सुबह 7 बजकर 13 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 5 बजकर 51 मिनट पर होगा।
धार्मिक महत्व और उपाय
विनायक चतुर्थी के दिन गणेश जी को मोदक अर्पित करना, विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना और जरूरतमंद को मिठाई या तिल का दान करना विशेष लाभकारी माना गया है। ज्योतिषीय दृष्टि से आज का दिन बाधाओं से मुक्ति और नई शुरुआत के लिए अनुकूल है।
आज का पंचांग धार्मिक कार्यों, व्रत और पूजा की योजना बनाने वालों के लिए मार्गदर्शक है। तिथि, नक्षत्र और मुहूर्त का ध्यान रखकर किए गए कर्म अधिक फलदायी माने जाते हैं।
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