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आज का पंचांग : वरुथिनी एकादशी व्रत आज, जानें शुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय
धर्म डेस्क
वैशाख कृष्ण एकादशी पर बन रहा शुभ संयोग, धनिष्ठा नक्षत्र और शुभ योग के बीच व्रत-पूजन का विशेष महत्व
आज सोमवार, 13 अप्रैल 2026 को वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि है, जिसे वरुथिनी एकादशी के रूप में मनाया जा रहा है। पंचांग के अनुसार, इस दिन धनिष्ठा नक्षत्र और शुभ योग का संयोग बन रहा है, जो धार्मिक अनुष्ठानों और व्रत-पूजन के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
एकादशी तिथि का प्रारंभ 13 अप्रैल को तड़के 01:16 बजे से हो चुका है और यह 14 अप्रैल को रात्रि 01:08 बजे तक रहेगी। इसके बाद द्वादशी तिथि प्रारंभ होगी। व्रत रखने वाले श्रद्धालु 14 अप्रैल को सुबह 06:54 से 08:31 बजे के बीच पारण कर सकते हैं।
आज सूर्योदय प्रातः 05:58 बजे और सूर्यास्त सायं 06:46 बजे होगा। चंद्रमा दिनभर कुंभ राशि में संचार करेगा। धनिष्ठा नक्षत्र सायं 04:03 बजे तक रहेगा, जिसके बाद शतभिषा नक्षत्र का आरंभ होगा। शुभ योग सायं 05:17 बजे तक रहेगा, इसके बाद शुक्ल योग शुरू होगा।
शुभ मुहूर्त की बात करें तो अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:56 से 12:47 बजे तक रहेगा, जबकि ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:30 से 05:14 बजे तक है।
अशुभ समय में राहुकाल सुबह 07:30 से 09:00 बजे तक रहेगा। इसके अलावा यमगंड काल सुबह 10:30 से 12:00 बजे तक और गुलिक काल दोपहर 01:30 से 03:00 बजे तक रहेगा। इन समयों में शुभ कार्य करने से बचने की सलाह दी जाती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वरुथिनी एकादशी का व्रत भगवान विष्णु के वराह स्वरूप की पूजा के लिए समर्पित है। इस दिन व्रत और पूजा करने से पापों का क्षय होता है और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। पौराणिक मान्यता है कि इस व्रत का फल कन्यादान और कठिन तपस्या के बराबर माना जाता है।
आज के दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु को पीले फल और तुलसी दल अर्पित करना शुभ माना गया है। साथ ही दीपदान और व्रत का पालन जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है।
यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पंचांग गणनाओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी प्रदान करना है। किसी भी व्रत या पूजा को करने से पहले अपनी श्रद्धा और परंपराओं के अनुसार निर्णय लें।
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आज का पंचांग : वरुथिनी एकादशी व्रत आज, जानें शुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय
धर्म डेस्क
आज सोमवार, 13 अप्रैल 2026 को वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि है, जिसे वरुथिनी एकादशी के रूप में मनाया जा रहा है। पंचांग के अनुसार, इस दिन धनिष्ठा नक्षत्र और शुभ योग का संयोग बन रहा है, जो धार्मिक अनुष्ठानों और व्रत-पूजन के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
एकादशी तिथि का प्रारंभ 13 अप्रैल को तड़के 01:16 बजे से हो चुका है और यह 14 अप्रैल को रात्रि 01:08 बजे तक रहेगी। इसके बाद द्वादशी तिथि प्रारंभ होगी। व्रत रखने वाले श्रद्धालु 14 अप्रैल को सुबह 06:54 से 08:31 बजे के बीच पारण कर सकते हैं।
आज सूर्योदय प्रातः 05:58 बजे और सूर्यास्त सायं 06:46 बजे होगा। चंद्रमा दिनभर कुंभ राशि में संचार करेगा। धनिष्ठा नक्षत्र सायं 04:03 बजे तक रहेगा, जिसके बाद शतभिषा नक्षत्र का आरंभ होगा। शुभ योग सायं 05:17 बजे तक रहेगा, इसके बाद शुक्ल योग शुरू होगा।
शुभ मुहूर्त की बात करें तो अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:56 से 12:47 बजे तक रहेगा, जबकि ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:30 से 05:14 बजे तक है।
अशुभ समय में राहुकाल सुबह 07:30 से 09:00 बजे तक रहेगा। इसके अलावा यमगंड काल सुबह 10:30 से 12:00 बजे तक और गुलिक काल दोपहर 01:30 से 03:00 बजे तक रहेगा। इन समयों में शुभ कार्य करने से बचने की सलाह दी जाती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वरुथिनी एकादशी का व्रत भगवान विष्णु के वराह स्वरूप की पूजा के लिए समर्पित है। इस दिन व्रत और पूजा करने से पापों का क्षय होता है और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। पौराणिक मान्यता है कि इस व्रत का फल कन्यादान और कठिन तपस्या के बराबर माना जाता है।
आज के दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु को पीले फल और तुलसी दल अर्पित करना शुभ माना गया है। साथ ही दीपदान और व्रत का पालन जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है।
यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पंचांग गणनाओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी प्रदान करना है। किसी भी व्रत या पूजा को करने से पहले अपनी श्रद्धा और परंपराओं के अनुसार निर्णय लें।
