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शनिवार का व्रत: शनिदेव की कृपा पाने के लिए कब और कैसे करें व्रत, जानें पूरी पूजा विधि और नियम
धर्म डेस्क
शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या से राहत के लिए शनिवार व्रत को माना जाता है प्रभावी; पूजा से लेकर उद्यापन तक जानिए पूरी प्रक्रिया
हिंदू धर्म में शनिवार का दिन न्याय के देवता शनिदेव को समर्पित माना गया है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, कुंडली में शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या महादशा के कारण जीवन में आने वाली बाधाओं से मुक्ति के लिए शनिवार का व्रत विशेष फलदायी माना जाता है। 17 जनवरी 2026, शनिवार के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु शनिदेव की पूजा और व्रत का संकल्प लेते देखे गए।
कब और क्यों किया जाता है शनिवार का व्रत
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, शनिदेव कर्म के अनुसार फल देने वाले देवता हैं। ऐसे में उनका व्रत व्यक्ति के जीवन में अनुशासन, धैर्य और न्याय की भावना को मजबूत करता है। यह व्रत वर्ष के किसी भी शनिवार से शुरू किया जा सकता है, लेकिन सावन मास या किसी महीने के शुक्ल पक्ष का शनिवार विशेष शुभ माना गया है। परंपरा के अनुसार, शनिवार का व्रत कम से कम 19 शनिवार तक किया जाता है।
कैसे करें व्रत की शुरुआत
शनिवार व्रत की शुरुआत प्रातः स्नान-ध्यान के बाद की जाती है। साधक शनिदेव के मंदिर जाकर या घर में उनकी प्रतिमा के समक्ष व्रत का संकल्प लेता है। इसके बाद शनिदेव को सरसों के तेल से अभिषेक किया जाता है। पूजा में नीले या काले पुष्प, काला तिल, काली उड़द, लोहे से संबंधित वस्तुएं, शमी पत्र और दीपदान का विशेष महत्व बताया गया है। शनि मंत्र या शनि स्तोत्र का जप कर कथा का पाठ किया जाता है।
व्रत के दौरान क्या करें और क्या न करें
शनिवार व्रत के दौरान संयम और नियमों का पालन अनिवार्य माना गया है। व्रती को तामसिक भोजन, मांस-मदिरा और तीखे मसालों से दूर रहना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन किसी कमजोर, कर्मचारी या जरूरतमंद को कष्ट पहुंचाना वर्जित है। इसके विपरीत, काले वस्त्र, काला कंबल, तेल और अन्न का दान शुभ फल देता है।
उद्यापन और व्रत का समापन
जब व्रत की निर्धारित संख्या पूरी हो जाए, तो उद्यापन किया जाता है। इसके लिए किसी योग्य पंडित से विधि-विधानपूर्वक पूजा और हवन कराया जाता है। शनि से जुड़ी वस्तुओं का दान किया जाता है और ब्राह्मण को भोजन कराकर दक्षिणा दी जाती है। इसके बाद व्रत का पारण किया जाता है, जिसमें खिचड़ी या काली उड़द की दाल ग्रहण की जाती है।
शनिवार का व्रत न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा है, बल्कि इसे आत्मसंयम और कर्म सुधार का माध्यम भी माना जाता है। आज की ताज़ा ख़बरें और भारत समाचार अपडेट के अंतर्गत यह पब्लिक इंटरेस्ट स्टोरी उन श्रद्धालुओं के लिए उपयोगी है, जो शनिदेव की कृपा से जीवन की बाधाओं से मुक्ति पाना चाहते हैं।
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