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डीजल संकट से बिलासपुर बेहाल, 125 बसें बंद; उद्योगों पर कार्रवाई की तैयारी
Digital Desk
रिटेल पेट्रोल पंपों से सस्ता डीजल खरीद रहीं औद्योगिक कंपनियां, आम लोगों और ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर गहराया संकट; कलेक्टर ने पांच कंपनियों को नोटिस जारी किया
बिलासपुर में डीजल संकट अब आम जनता के लिए बड़ी परेशानी बनता जा रहा है। औद्योगिक कंपनियों द्वारा रिटेल पेट्रोल पंपों से बड़े पैमाने पर डीजल खरीदने के कारण जिले में ईंधन की भारी किल्लत पैदा हो गई है। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि 125 यात्री बसों का संचालन बंद करना पड़ा है, जबकि माल ढुलाई, ट्रांसपोर्ट और किसानों की आवाजाही भी प्रभावित होने लगी है। प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पांच बड़ी कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
जानकारी के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आने के बाद उद्योगों को मिलने वाला बल्क डीजल काफी महंगा हो गया है। वर्तमान में इंडस्ट्रियल डीजल की कीमत 160 रुपए प्रति लीटर से अधिक पहुंच चुकी है, जबकि सामान्य रिटेल पंपों पर डीजल करीब 100 रुपए प्रति लीटर में उपलब्ध है। दोनों कीमतों के बीच करीब 60 रुपए का अंतर होने से कई औद्योगिक इकाइयों ने अपने निर्धारित कंज्यूमर पंपों से डीजल लेना कम कर दिया है और अब वे सामान्य पेट्रोल पंपों से बड़े पैमाने पर डीजल खरीद रही हैं।
इस बदलाव का सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ा है। जिले के कई पेट्रोल पंपों पर डीजल की कमी देखी जा रही है। ट्रांसपोर्ट कंपनियों, बस ऑपरेटरों और किसानों को समय पर ईंधन नहीं मिल पा रहा है। डीजल संकट के कारण बिलासपुर जिले में 125 बसों का संचालन पूरी तरह ठप हो गया है। कई बस संचालकों ने लंबी दूरी की बुकिंग लेना भी बंद कर दिया है।
बस ऑपरेटरों का कहना है कि अधिकांश पंपों पर डीजल सीमित मात्रा में दिया जा रहा है। इससे नियमित रूट पर बसें चलाना मुश्किल हो गया है। यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई रूटों पर बसों की संख्या कम होने से किराया भी बढ़ने लगा है। कुछ निजी ऑपरेटर अतिरिक्त 10 से 15 रुपए तक वसूल रहे हैं।
प्रशासन की जांच में यह भी सामने आया है कि जिन औद्योगिक इकाइयों में पहले डीजल की खपत ज्यादा थी, वहां कीमतें बढ़ने के बाद अचानक खपत कम हो गई। अधिकारियों का मानना है कि यह संभव नहीं है कि उद्योगों की वास्तविक जरूरत अचानक इतनी कम हो जाए। इसी आधार पर खाद्य विभाग की समीक्षा रिपोर्ट के बाद पांच कंपनियों को नोटिस जारी किए गए हैं।
कलेक्टर संजय अग्रवाल ने स्पष्ट कहा है कि संबंधित कंपनियों को तीन दिनों के भीतर जवाब देना होगा। उनसे पूछा गया है कि पहले उनके कंज्यूमर पंपों से कितने वाहनों को डीजल दिया जाता था और अब डीजल उठाव में इतनी भारी कमी क्यों आई है। प्रशासन ने वाहन नंबर सहित पूरी जानकारी मांगी है।
कलेक्टर ने चेतावनी दी है कि यदि कंपनियां संतोषजनक जवाब नहीं देतीं, तो उनके कंज्यूमर पंप का लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा। प्रशासन का मानना है कि यदि उद्योग सामान्य रिटेल पंपों पर निर्भर रहेंगे तो आम लोगों के लिए ईंधन संकट और गहरा सकता है।
खाद्य नियंत्रक अमृत कुजुर ने भी तेल कंपनियों और विभागीय अधिकारियों को स्थिति पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन यह जांच भी कर रहा है कि कहीं रिटेल पंपों से अवैध रूप से औद्योगिक इकाइयों तक डीजल की सप्लाई तो नहीं की जा रही है।
डीजल संकट का असर सिर्फ बस सेवाओं तक सीमित नहीं है। ट्रक, ट्रेलर और मालवाहक वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित हो रही है। कई ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि समय पर डीजल नहीं मिलने से सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है। इससे बाजार में सामान पहुंचने में देरी हो रही है और माल ढुलाई की लागत बढ़ रही है। किसानों को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है। खेती और सिंचाई से जुड़े वाहनों के लिए पर्याप्त डीजल नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में कई किसान लंबी कतारों में खड़े होकर डीजल खरीदने को मजबूर हैं।
दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ यातायात महासंघ ने डीजल की बढ़ती कीमतों और संचालन लागत में इजाफे का हवाला देते हुए किराया बढ़ाने की मांग की है। महासंघ ने सरकार को पत्र लिखकर साधारण बसों के किराए में 50 प्रतिशत और डीलक्स बसों में 30 प्रतिशत वृद्धि की मांग की है।
बस संचालकों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में डीजल, टायर, बीमा, स्पेयर पार्ट्स और कर्मचारियों के वेतन में लगातार वृद्धि हुई है। इसके अलावा सुरक्षा उपकरणों जैसे पैनिक बटन, स्पीड गवर्नर और हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाने का खर्च भी बढ़ गया है। महासंघ ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो प्रदेशभर में यात्री बस सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। प्रशासन पूरे मामले की जांच में जुटा है और उम्मीद की जा रही है कि जल्द कोई ठोस कदम उठाया जाएगा ताकि आम लोगों को राहत मिल सके।
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डीजल संकट से बिलासपुर बेहाल, 125 बसें बंद; उद्योगों पर कार्रवाई की तैयारी
Digital Desk
बिलासपुर में डीजल संकट अब आम जनता के लिए बड़ी परेशानी बनता जा रहा है। औद्योगिक कंपनियों द्वारा रिटेल पेट्रोल पंपों से बड़े पैमाने पर डीजल खरीदने के कारण जिले में ईंधन की भारी किल्लत पैदा हो गई है। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि 125 यात्री बसों का संचालन बंद करना पड़ा है, जबकि माल ढुलाई, ट्रांसपोर्ट और किसानों की आवाजाही भी प्रभावित होने लगी है। प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पांच बड़ी कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
जानकारी के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आने के बाद उद्योगों को मिलने वाला बल्क डीजल काफी महंगा हो गया है। वर्तमान में इंडस्ट्रियल डीजल की कीमत 160 रुपए प्रति लीटर से अधिक पहुंच चुकी है, जबकि सामान्य रिटेल पंपों पर डीजल करीब 100 रुपए प्रति लीटर में उपलब्ध है। दोनों कीमतों के बीच करीब 60 रुपए का अंतर होने से कई औद्योगिक इकाइयों ने अपने निर्धारित कंज्यूमर पंपों से डीजल लेना कम कर दिया है और अब वे सामान्य पेट्रोल पंपों से बड़े पैमाने पर डीजल खरीद रही हैं।
इस बदलाव का सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ा है। जिले के कई पेट्रोल पंपों पर डीजल की कमी देखी जा रही है। ट्रांसपोर्ट कंपनियों, बस ऑपरेटरों और किसानों को समय पर ईंधन नहीं मिल पा रहा है। डीजल संकट के कारण बिलासपुर जिले में 125 बसों का संचालन पूरी तरह ठप हो गया है। कई बस संचालकों ने लंबी दूरी की बुकिंग लेना भी बंद कर दिया है।
बस ऑपरेटरों का कहना है कि अधिकांश पंपों पर डीजल सीमित मात्रा में दिया जा रहा है। इससे नियमित रूट पर बसें चलाना मुश्किल हो गया है। यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई रूटों पर बसों की संख्या कम होने से किराया भी बढ़ने लगा है। कुछ निजी ऑपरेटर अतिरिक्त 10 से 15 रुपए तक वसूल रहे हैं।
प्रशासन की जांच में यह भी सामने आया है कि जिन औद्योगिक इकाइयों में पहले डीजल की खपत ज्यादा थी, वहां कीमतें बढ़ने के बाद अचानक खपत कम हो गई। अधिकारियों का मानना है कि यह संभव नहीं है कि उद्योगों की वास्तविक जरूरत अचानक इतनी कम हो जाए। इसी आधार पर खाद्य विभाग की समीक्षा रिपोर्ट के बाद पांच कंपनियों को नोटिस जारी किए गए हैं।
कलेक्टर संजय अग्रवाल ने स्पष्ट कहा है कि संबंधित कंपनियों को तीन दिनों के भीतर जवाब देना होगा। उनसे पूछा गया है कि पहले उनके कंज्यूमर पंपों से कितने वाहनों को डीजल दिया जाता था और अब डीजल उठाव में इतनी भारी कमी क्यों आई है। प्रशासन ने वाहन नंबर सहित पूरी जानकारी मांगी है।
कलेक्टर ने चेतावनी दी है कि यदि कंपनियां संतोषजनक जवाब नहीं देतीं, तो उनके कंज्यूमर पंप का लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा। प्रशासन का मानना है कि यदि उद्योग सामान्य रिटेल पंपों पर निर्भर रहेंगे तो आम लोगों के लिए ईंधन संकट और गहरा सकता है।
खाद्य नियंत्रक अमृत कुजुर ने भी तेल कंपनियों और विभागीय अधिकारियों को स्थिति पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन यह जांच भी कर रहा है कि कहीं रिटेल पंपों से अवैध रूप से औद्योगिक इकाइयों तक डीजल की सप्लाई तो नहीं की जा रही है।
डीजल संकट का असर सिर्फ बस सेवाओं तक सीमित नहीं है। ट्रक, ट्रेलर और मालवाहक वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित हो रही है। कई ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि समय पर डीजल नहीं मिलने से सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है। इससे बाजार में सामान पहुंचने में देरी हो रही है और माल ढुलाई की लागत बढ़ रही है। किसानों को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है। खेती और सिंचाई से जुड़े वाहनों के लिए पर्याप्त डीजल नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में कई किसान लंबी कतारों में खड़े होकर डीजल खरीदने को मजबूर हैं।
दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ यातायात महासंघ ने डीजल की बढ़ती कीमतों और संचालन लागत में इजाफे का हवाला देते हुए किराया बढ़ाने की मांग की है। महासंघ ने सरकार को पत्र लिखकर साधारण बसों के किराए में 50 प्रतिशत और डीलक्स बसों में 30 प्रतिशत वृद्धि की मांग की है।
बस संचालकों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में डीजल, टायर, बीमा, स्पेयर पार्ट्स और कर्मचारियों के वेतन में लगातार वृद्धि हुई है। इसके अलावा सुरक्षा उपकरणों जैसे पैनिक बटन, स्पीड गवर्नर और हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाने का खर्च भी बढ़ गया है। महासंघ ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो प्रदेशभर में यात्री बस सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। प्रशासन पूरे मामले की जांच में जुटा है और उम्मीद की जा रही है कि जल्द कोई ठोस कदम उठाया जाएगा ताकि आम लोगों को राहत मिल सके।
