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बस्तर के तेंदूपत्ता गोदाम में भीषण आग, हजार बोरे राख; बीजापुर मामले में DFO हटाए गए
Digital Desk
सरगीपाल गोदाम में आग से बड़ा नुकसान, शॉर्ट सर्किट और लापरवाही की आशंका; बीजापुर अग्निकांड के बाद सरकार सख्त, सागर जाधव को नई जिम्मेदारी
छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में तेंदूपत्ता गोदाम में लगी भीषण आग ने वन विभाग और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। बुधवार शाम सरगीपाल स्थित गोदाम में अचानक आग भड़क उठी, जिसने देखते ही देखते पूरे परिसर को अपनी चपेट में ले लिया। इस हादसे में करीब एक हजार बोरा तेंदूपत्ता जलकर राख हो गया। आग इतनी तेजी से फैली कि मौके पर मौजूद कर्मचारियों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। घंटों की मशक्कत के बाद वन विभाग और दमकल टीम ने आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक भारी नुकसान हो चुका था।
जानकारी के अनुसार गोदाम में बड़ी मात्रा में तेंदूपत्ता का स्टॉक रखा गया था, जिसे सुकमा जिले से लाकर यहां सुरक्षित रखा गया था। यह तेंदूपत्ता पिछले साल का संग्रहित स्टॉक बताया जा रहा है। आग लगने की सूचना मिलते ही वन अमला, दमकल विभाग और स्थानीय प्रशासन की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं। आग पर नियंत्रण पाने के लिए कई दमकल वाहनों का इस्तेमाल किया गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक आग की लपटें काफी ऊंचाई तक उठ रही थीं और धुएं का गुबार दूर-दूर तक दिखाई दे रहा था। आसपास के ग्रामीण भी आग बुझाने के प्रयास में जुट गए थे। हालांकि सूखे तेंदूपत्ते और गर्म मौसम के कारण आग तेजी से फैलती चली गई। अधिकारियों ने समय रहते आसपास के हिस्सों को खाली कराया, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई।
वन विभाग के शुरुआती अनुमान के अनुसार करीब एक हजार बोरा तेंदूपत्ता पूरी तरह जल चुका है। फिलहाल नुकसान का सटीक आंकलन किया जा रहा है। आग लगने के कारणों की जांच भी शुरू कर दी गई है। शुरुआती तौर पर शॉर्ट सर्किट या किसी प्रकार की लापरवाही को वजह माना जा रहा है। हालांकि अधिकारी किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले विस्तृत जांच की बात कह रहे हैं।
यह घटना ऐसे समय हुई है जब कुछ दिन पहले ही बीजापुर जिले में एक निजी तेंदूपत्ता गोदाम में भीषण आग लगी थी। उस हादसे में करीब 18 हजार बोरे जलकर खाक हो गए थे। शुरुआती अनुमान के मुताबिक बीजापुर की घटना में 10 करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान हुआ था। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने वन विभाग की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बीजापुर अग्निकांड के बाद राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। वन मंत्री केदार कश्यप ने मामले की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक ली थी। इसके बाद प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए बीजापुर के डीएफओ रमेश कुमार जांगड़े को उनके पद से हटा दिया गया। उनकी जगह सागर जाधव को नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। सरकार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए हैं।
सरकार का मानना है कि तेंदूपत्ता जैसे महत्वपूर्ण वन उत्पाद के संरक्षण में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यही कारण है कि लगातार दूसरी बड़ी आग की घटना के बाद विभागीय स्तर पर भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। अधिकारियों को गोदामों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने और आग से बचाव के इंतजाम मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं।
तेंदूपत्ता छत्तीसगढ़ के वन क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा माना जाता है। हजारों ग्रामीण और वनवासी परिवार इसकी तुड़ाई और व्यापार से जुड़े हुए हैं। ऐसे में बड़े पैमाने पर तेंदूपत्ता का नुकसान न केवल सरकारी राजस्व को प्रभावित करता है बल्कि स्थानीय रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी असर डालता है।
इन घटनाओं के बाद बीमा क्लेम को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। जानकारी के मुताबिक तेंदूपत्ता के बड़े स्टॉक का अक्सर बीमा कराया जाता है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि कहीं इन घटनाओं के पीछे बीमा क्लेम का एंगल तो नहीं हो सकता। हालांकि अधिकारियों ने अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। जांच एजेंसियां अब यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि संबंधित गोदामों का बीमा हुआ था या नहीं और सुरक्षा मानकों का पालन किस हद तक किया गया।
वन विभाग का कहना है कि जांच में यह भी देखा जाएगा कि गोदामों में अग्निशमन उपकरण उपलब्ध थे या नहीं, बिजली व्यवस्था सुरक्षित थी या नहीं और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की गई थी या नहीं। लगातार हो रही आग की घटनाओं ने विभाग को अलर्ट मोड पर ला दिया है। गर्मियों के मौसम में सूखे तेंदूपत्ते अत्यधिक ज्वलनशील हो जाते हैं। यदि गोदामों में पर्याप्त वेंटिलेशन, बिजली सुरक्षा और अग्निशमन व्यवस्था न हो तो छोटी सी चिंगारी भी बड़े हादसे में बदल सकती है। इसलिए गोदामों की नियमित जांच और आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था बेहद जरूरी है।
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बस्तर के तेंदूपत्ता गोदाम में भीषण आग, हजार बोरे राख; बीजापुर मामले में DFO हटाए गए
Digital Desk
छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में तेंदूपत्ता गोदाम में लगी भीषण आग ने वन विभाग और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। बुधवार शाम सरगीपाल स्थित गोदाम में अचानक आग भड़क उठी, जिसने देखते ही देखते पूरे परिसर को अपनी चपेट में ले लिया। इस हादसे में करीब एक हजार बोरा तेंदूपत्ता जलकर राख हो गया। आग इतनी तेजी से फैली कि मौके पर मौजूद कर्मचारियों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। घंटों की मशक्कत के बाद वन विभाग और दमकल टीम ने आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक भारी नुकसान हो चुका था।
जानकारी के अनुसार गोदाम में बड़ी मात्रा में तेंदूपत्ता का स्टॉक रखा गया था, जिसे सुकमा जिले से लाकर यहां सुरक्षित रखा गया था। यह तेंदूपत्ता पिछले साल का संग्रहित स्टॉक बताया जा रहा है। आग लगने की सूचना मिलते ही वन अमला, दमकल विभाग और स्थानीय प्रशासन की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं। आग पर नियंत्रण पाने के लिए कई दमकल वाहनों का इस्तेमाल किया गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक आग की लपटें काफी ऊंचाई तक उठ रही थीं और धुएं का गुबार दूर-दूर तक दिखाई दे रहा था। आसपास के ग्रामीण भी आग बुझाने के प्रयास में जुट गए थे। हालांकि सूखे तेंदूपत्ते और गर्म मौसम के कारण आग तेजी से फैलती चली गई। अधिकारियों ने समय रहते आसपास के हिस्सों को खाली कराया, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई।
वन विभाग के शुरुआती अनुमान के अनुसार करीब एक हजार बोरा तेंदूपत्ता पूरी तरह जल चुका है। फिलहाल नुकसान का सटीक आंकलन किया जा रहा है। आग लगने के कारणों की जांच भी शुरू कर दी गई है। शुरुआती तौर पर शॉर्ट सर्किट या किसी प्रकार की लापरवाही को वजह माना जा रहा है। हालांकि अधिकारी किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले विस्तृत जांच की बात कह रहे हैं।
यह घटना ऐसे समय हुई है जब कुछ दिन पहले ही बीजापुर जिले में एक निजी तेंदूपत्ता गोदाम में भीषण आग लगी थी। उस हादसे में करीब 18 हजार बोरे जलकर खाक हो गए थे। शुरुआती अनुमान के मुताबिक बीजापुर की घटना में 10 करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान हुआ था। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने वन विभाग की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बीजापुर अग्निकांड के बाद राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। वन मंत्री केदार कश्यप ने मामले की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक ली थी। इसके बाद प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए बीजापुर के डीएफओ रमेश कुमार जांगड़े को उनके पद से हटा दिया गया। उनकी जगह सागर जाधव को नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। सरकार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए हैं।
सरकार का मानना है कि तेंदूपत्ता जैसे महत्वपूर्ण वन उत्पाद के संरक्षण में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यही कारण है कि लगातार दूसरी बड़ी आग की घटना के बाद विभागीय स्तर पर भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। अधिकारियों को गोदामों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने और आग से बचाव के इंतजाम मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं।
तेंदूपत्ता छत्तीसगढ़ के वन क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा माना जाता है। हजारों ग्रामीण और वनवासी परिवार इसकी तुड़ाई और व्यापार से जुड़े हुए हैं। ऐसे में बड़े पैमाने पर तेंदूपत्ता का नुकसान न केवल सरकारी राजस्व को प्रभावित करता है बल्कि स्थानीय रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी असर डालता है।
इन घटनाओं के बाद बीमा क्लेम को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। जानकारी के मुताबिक तेंदूपत्ता के बड़े स्टॉक का अक्सर बीमा कराया जाता है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि कहीं इन घटनाओं के पीछे बीमा क्लेम का एंगल तो नहीं हो सकता। हालांकि अधिकारियों ने अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। जांच एजेंसियां अब यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि संबंधित गोदामों का बीमा हुआ था या नहीं और सुरक्षा मानकों का पालन किस हद तक किया गया।
वन विभाग का कहना है कि जांच में यह भी देखा जाएगा कि गोदामों में अग्निशमन उपकरण उपलब्ध थे या नहीं, बिजली व्यवस्था सुरक्षित थी या नहीं और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की गई थी या नहीं। लगातार हो रही आग की घटनाओं ने विभाग को अलर्ट मोड पर ला दिया है। गर्मियों के मौसम में सूखे तेंदूपत्ते अत्यधिक ज्वलनशील हो जाते हैं। यदि गोदामों में पर्याप्त वेंटिलेशन, बिजली सुरक्षा और अग्निशमन व्यवस्था न हो तो छोटी सी चिंगारी भी बड़े हादसे में बदल सकती है। इसलिए गोदामों की नियमित जांच और आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था बेहद जरूरी है।
