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फर्जी होम लोन के नाम पर करोड़ों की ठगी, संचालक गिरफ्तार
Digital Desk
सरगुजा में महिला टीचर समेत 9 लोगों को बनाया शिकार, बैंक लोन मंजूर कराकर करोड़ों रुपए हड़पने वाला आरोपी जेल भेजा गया
छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में फर्जी होम लोन दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपए की ठगी का बड़ा मामला सामने आया है। पुलिस ने महिला टीचर समेत 9 लोगों से करीब 3 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी करने वाले आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी खुद को लोन दिलाने वाला एजेंट बताकर लोगों को आसान किस्तों और बिना आर्थिक बोझ के होम लोन दिलाने का झांसा देता था। इसके बाद वह उनके दस्तावेज लेकर अलग-अलग बैंकों से भारी रकम का लोन मंजूर कराता और अधिकांश पैसा अपने खातों में ट्रांसफर करवा लेता था।
यह मामला गांधीनगर थाना क्षेत्र का है। पुलिस के मुताबिक आरोपी का नाम शिवशंकर दास है, जो बलरामपुर जिले के चंगोरी बरियों गांव का रहने वाला है। आरोपी ने ‘अनशिवआर्या फाउंडेशन ग्रुप’ नाम से कंपनी बना रखी थी और उसी के जरिए लोगों को अपने जाल में फंसाता था।
मामले का खुलासा तब हुआ जब सरगवां निवासी दिव्या एक्का ने 12 मई को गांधीनगर थाने में शिकायत दर्ज कराई। दिव्या राजपुर ब्लॉक में शिक्षिका के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने पुलिस को बताया कि जुलाई 2024 में उन्होंने जमीन खरीदी थी और घर बनाने के लिए लगभग 15 लाख रुपए के लोन की जरूरत थी। इसी दौरान उनके जीजा ने उन्हें एक ऐसे व्यक्ति के बारे में बताया, जो आसानी से बैंक से होम लोन दिलाने का काम करता था।
कुछ दिनों बाद शिवशंकर दास उनके घर पहुंचा और खुद को कंपनी संचालक बताते हुए भरोसा दिलाया कि वह कम समय में होम लोन मंजूर करवा देगा। आरोपी ने दिव्या को एक विशेष योजना के बारे में बताया। उसने कहा कि जितना भी लोन मंजूर होगा, उसका 60 प्रतिशत हिस्सा कंपनी में जमा करना होगा। बदले में कंपनी हर महीने बैंक की पूरी ईएमआई जमा करेगी और लाभार्थी को 40 प्रतिशत राशि मिल जाएगी। आरोपी ने यह भी कहा कि लोन लेने वाले व्यक्ति को अपनी जेब से कोई पैसा नहीं देना पड़ेगा।
आरोपी की बातों में आकर दिव्या एक्का ने अपने दस्तावेज उसे सौंप दिए। इनमें आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक स्टेटमेंट, सैलरी स्लिप, फॉर्म-16 और अन्य जरूरी कागजात शामिल थे। पीड़िता ने बताया कि वह केवल बैंक ऑफ इंडिया में फार्म पर हस्ताक्षर करने गई थीं। इसके अलावा उन्होंने किसी अन्य बैंक में जाकर कोई प्रक्रिया पूरी नहीं की थी।
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी ने महिला टीचर के नाम पर तीन अलग-अलग बैंकों से लोन मंजूर करवा लिया। आरोपी ने आईसीआईसीआई बैंक से 15 लाख रुपए, बैंक ऑफ इंडिया से 13.40 लाख रुपए और एचडीएफसी बैंक से 12.68 लाख रुपए का लोन मंजूर कराया। इस तरह कुल 41.08 लाख रुपए पीड़िता के खाते में आए।
इसके बाद आरोपी ने विभिन्न खातों के जरिए लगभग 28 लाख रुपए अपने कब्जे में ले लिए। शुरुआत में आरोपी कुछ समय तक किस्तें जमा करता रहा, ताकि पीड़िता को शक न हो। बाद में उसने संपर्क कम कर दिया और पैसे लौटाने से इनकार करने लगा। जब बैंक से ईएमआई को लेकर दबाव बढ़ा, तब महिला टीचर को ठगी का एहसास हुआ और उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
गांधीनगर पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी शिवशंकर दास को हिरासत में लिया। पूछताछ में उसने कई चौंकाने वाले खुलासे किए। आरोपी ने बताया कि पहले वह किराए पर क्रशर मशीन चलाता था, लेकिन व्यापार में नुकसान होने के बाद उसने फर्जी तरीके से लोगों को लोन दिलाने का काम शुरू किया। उसने ‘अनशिवआर्या फाउंडेशन ग्रुप’ नाम से कंपनी बनाकर लोगों को बड़े मुनाफे और आसान लोन का लालच देना शुरू किया।
पुलिस जांच में पता चला है कि आरोपी ने केवल दिव्या एक्का ही नहीं, बल्कि 9 अन्य लोगों को भी इसी तरह अपने जाल में फंसाया। सभी मामलों को मिलाकर अब तक करीब 3 करोड़ रुपए से अधिक की ठगी सामने आ चुकी है। पुलिस को आशंका है कि पीड़ितों की संख्या और बढ़ सकती है।
थाना प्रभारी प्रवीण कुमार द्विवेदी ने बताया कि आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। आरोपी शिवशंकर दास को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है। पुलिस अब आरोपी के बैंक खातों, ट्रांजैक्शन और कंपनी से जुड़े अन्य दस्तावेजों की जांच कर रही है।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी व्यक्ति या संस्था के झांसे में आकर अपने दस्तावेज न सौंपें। बैंक लोन या निवेश से जुड़ी किसी भी योजना को अपनाने से पहले उसकी पूरी जांच-पड़ताल जरूर करें। अधिकारियों का कहना है कि तेजी से बढ़ते साइबर और वित्तीय अपराधों के दौर में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।
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फर्जी होम लोन के नाम पर करोड़ों की ठगी, संचालक गिरफ्तार
Digital Desk
छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में फर्जी होम लोन दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपए की ठगी का बड़ा मामला सामने आया है। पुलिस ने महिला टीचर समेत 9 लोगों से करीब 3 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी करने वाले आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी खुद को लोन दिलाने वाला एजेंट बताकर लोगों को आसान किस्तों और बिना आर्थिक बोझ के होम लोन दिलाने का झांसा देता था। इसके बाद वह उनके दस्तावेज लेकर अलग-अलग बैंकों से भारी रकम का लोन मंजूर कराता और अधिकांश पैसा अपने खातों में ट्रांसफर करवा लेता था।
यह मामला गांधीनगर थाना क्षेत्र का है। पुलिस के मुताबिक आरोपी का नाम शिवशंकर दास है, जो बलरामपुर जिले के चंगोरी बरियों गांव का रहने वाला है। आरोपी ने ‘अनशिवआर्या फाउंडेशन ग्रुप’ नाम से कंपनी बना रखी थी और उसी के जरिए लोगों को अपने जाल में फंसाता था।
मामले का खुलासा तब हुआ जब सरगवां निवासी दिव्या एक्का ने 12 मई को गांधीनगर थाने में शिकायत दर्ज कराई। दिव्या राजपुर ब्लॉक में शिक्षिका के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने पुलिस को बताया कि जुलाई 2024 में उन्होंने जमीन खरीदी थी और घर बनाने के लिए लगभग 15 लाख रुपए के लोन की जरूरत थी। इसी दौरान उनके जीजा ने उन्हें एक ऐसे व्यक्ति के बारे में बताया, जो आसानी से बैंक से होम लोन दिलाने का काम करता था।
कुछ दिनों बाद शिवशंकर दास उनके घर पहुंचा और खुद को कंपनी संचालक बताते हुए भरोसा दिलाया कि वह कम समय में होम लोन मंजूर करवा देगा। आरोपी ने दिव्या को एक विशेष योजना के बारे में बताया। उसने कहा कि जितना भी लोन मंजूर होगा, उसका 60 प्रतिशत हिस्सा कंपनी में जमा करना होगा। बदले में कंपनी हर महीने बैंक की पूरी ईएमआई जमा करेगी और लाभार्थी को 40 प्रतिशत राशि मिल जाएगी। आरोपी ने यह भी कहा कि लोन लेने वाले व्यक्ति को अपनी जेब से कोई पैसा नहीं देना पड़ेगा।
आरोपी की बातों में आकर दिव्या एक्का ने अपने दस्तावेज उसे सौंप दिए। इनमें आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक स्टेटमेंट, सैलरी स्लिप, फॉर्म-16 और अन्य जरूरी कागजात शामिल थे। पीड़िता ने बताया कि वह केवल बैंक ऑफ इंडिया में फार्म पर हस्ताक्षर करने गई थीं। इसके अलावा उन्होंने किसी अन्य बैंक में जाकर कोई प्रक्रिया पूरी नहीं की थी।
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी ने महिला टीचर के नाम पर तीन अलग-अलग बैंकों से लोन मंजूर करवा लिया। आरोपी ने आईसीआईसीआई बैंक से 15 लाख रुपए, बैंक ऑफ इंडिया से 13.40 लाख रुपए और एचडीएफसी बैंक से 12.68 लाख रुपए का लोन मंजूर कराया। इस तरह कुल 41.08 लाख रुपए पीड़िता के खाते में आए।
इसके बाद आरोपी ने विभिन्न खातों के जरिए लगभग 28 लाख रुपए अपने कब्जे में ले लिए। शुरुआत में आरोपी कुछ समय तक किस्तें जमा करता रहा, ताकि पीड़िता को शक न हो। बाद में उसने संपर्क कम कर दिया और पैसे लौटाने से इनकार करने लगा। जब बैंक से ईएमआई को लेकर दबाव बढ़ा, तब महिला टीचर को ठगी का एहसास हुआ और उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
गांधीनगर पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी शिवशंकर दास को हिरासत में लिया। पूछताछ में उसने कई चौंकाने वाले खुलासे किए। आरोपी ने बताया कि पहले वह किराए पर क्रशर मशीन चलाता था, लेकिन व्यापार में नुकसान होने के बाद उसने फर्जी तरीके से लोगों को लोन दिलाने का काम शुरू किया। उसने ‘अनशिवआर्या फाउंडेशन ग्रुप’ नाम से कंपनी बनाकर लोगों को बड़े मुनाफे और आसान लोन का लालच देना शुरू किया।
पुलिस जांच में पता चला है कि आरोपी ने केवल दिव्या एक्का ही नहीं, बल्कि 9 अन्य लोगों को भी इसी तरह अपने जाल में फंसाया। सभी मामलों को मिलाकर अब तक करीब 3 करोड़ रुपए से अधिक की ठगी सामने आ चुकी है। पुलिस को आशंका है कि पीड़ितों की संख्या और बढ़ सकती है।
थाना प्रभारी प्रवीण कुमार द्विवेदी ने बताया कि आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। आरोपी शिवशंकर दास को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है। पुलिस अब आरोपी के बैंक खातों, ट्रांजैक्शन और कंपनी से जुड़े अन्य दस्तावेजों की जांच कर रही है।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी व्यक्ति या संस्था के झांसे में आकर अपने दस्तावेज न सौंपें। बैंक लोन या निवेश से जुड़ी किसी भी योजना को अपनाने से पहले उसकी पूरी जांच-पड़ताल जरूर करें। अधिकारियों का कहना है कि तेजी से बढ़ते साइबर और वित्तीय अपराधों के दौर में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।
