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अंतिम संस्कार को लेकर छत्तीसगढ़ में विवाद: 'संविधान चाहिए, कब्रिस्तान चाहिए' के नारे लगाते हुए सड़क पर शव रखकर ईसाई समुदाय ने किया प्रदर्शन
Jagdalpur
बस्तर जिले के बकावंड ब्लॉक में अंतिम संस्कार की विधि को लेकर दो समुदायों के बीच गहराया विवाद अब प्रशासन के लिए चुनौती बनता जा रहा है।
21 मई को सड़क हादसे में मृत युवक अजय बघेल के अंतिम संस्कार को लेकर ईसाई और हिंदू रीति-रिवाजों के बीच टकराव उत्पन्न हो गया, जिसके बाद नाराज परिजनों और समुदाय के लोगों ने शव को सड़क पर रखकर चक्काजाम करते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
प्रदर्शन कर रहे लोगों ने "संविधान चाहिए, कब्रिस्तान चाहिए" और "धार्मिक स्वतंत्रता हमारा अधिकार है" जैसे नारे लगाए। इससे पूरे क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया और यातायात भी घंटों बाधित रहा।
क्या है विवाद की जड़?
जानकारी के अनुसार, अजय बघेल का सड़क हादसे के बाद ढिमरापाल मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान निधन हो गया था। परिजन, जो उसे ईसाई समुदाय का मानते हैं, उसका अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाजों के तहत करना चाह रहे थे। इस पर दशापाल गांव के कुछ ग्रामीणों ने कड़ा विरोध जताया और अंतिम संस्कार रोक दिया।
दूसरी ओर, सरगीपाल गांव के ग्रामीणों ने परिजनों का समर्थन करते हुए कहा कि मृतक का परिवार वर्षों से हिंदू परंपराओं का पालन करता आ रहा है, इसलिए अंतिम संस्कार उसी रीति से होना चाहिए।
सड़क पर शव रखकर प्रदर्शन
स्थानीय प्रशासन द्वारा समझाइश देने के प्रयासों के बावजूद प्रदर्शनकारी नहीं माने। बकावंड एसडीएम ऋषिकेश तिवारी, तहसीलदार जागेश्वरी गावडे और थाना प्रभारी डोमेंद्र शिन्हा मौके पर पहुंचे और वार्ता की कोशिश की, लेकिन नाराज ईसाई समुदाय के लोग धरने पर डटे रहे। उनका स्पष्ट कहना है कि जब तक उन्हें धार्मिक स्वतंत्रता नहीं दी जाएगी, वे अंतिम संस्कार नहीं करने देंगे और विरोध जारी रहेगा।
संवेदनशीलता और शांति की अपील
घटना के बाद से प्रशासन मामले को सुलझाने के लिए मध्यस्थता में जुटा है और क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। वहीं, सामाजिक संगठनों और स्थानीय नेताओं ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और संवैधानिक व्यवस्था के तहत समाधान निकालने की अपील की है।
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21 मई को सड़क हादसे में मृत युवक अजय बघेल के अंतिम संस्कार को लेकर ईसाई और हिंदू रीति-रिवाजों के बीच टकराव उत्पन्न हो गया, जिसके बाद नाराज परिजनों और समुदाय के लोगों ने शव को सड़क पर रखकर चक्काजाम करते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
प्रदर्शन कर रहे लोगों ने "संविधान चाहिए, कब्रिस्तान चाहिए" और "धार्मिक स्वतंत्रता हमारा अधिकार है" जैसे नारे लगाए। इससे पूरे क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया और यातायात भी घंटों बाधित रहा।
क्या है विवाद की जड़?
जानकारी के अनुसार, अजय बघेल का सड़क हादसे के बाद ढिमरापाल मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान निधन हो गया था। परिजन, जो उसे ईसाई समुदाय का मानते हैं, उसका अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाजों के तहत करना चाह रहे थे। इस पर दशापाल गांव के कुछ ग्रामीणों ने कड़ा विरोध जताया और अंतिम संस्कार रोक दिया।
दूसरी ओर, सरगीपाल गांव के ग्रामीणों ने परिजनों का समर्थन करते हुए कहा कि मृतक का परिवार वर्षों से हिंदू परंपराओं का पालन करता आ रहा है, इसलिए अंतिम संस्कार उसी रीति से होना चाहिए।
सड़क पर शव रखकर प्रदर्शन
स्थानीय प्रशासन द्वारा समझाइश देने के प्रयासों के बावजूद प्रदर्शनकारी नहीं माने। बकावंड एसडीएम ऋषिकेश तिवारी, तहसीलदार जागेश्वरी गावडे और थाना प्रभारी डोमेंद्र शिन्हा मौके पर पहुंचे और वार्ता की कोशिश की, लेकिन नाराज ईसाई समुदाय के लोग धरने पर डटे रहे। उनका स्पष्ट कहना है कि जब तक उन्हें धार्मिक स्वतंत्रता नहीं दी जाएगी, वे अंतिम संस्कार नहीं करने देंगे और विरोध जारी रहेगा।
संवेदनशीलता और शांति की अपील
घटना के बाद से प्रशासन मामले को सुलझाने के लिए मध्यस्थता में जुटा है और क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। वहीं, सामाजिक संगठनों और स्थानीय नेताओं ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और संवैधानिक व्यवस्था के तहत समाधान निकालने की अपील की है।
