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छत्तीसगढ़ में पहली बार एक शेड्यूल पर होंगी कक्षा 1 से 12वीं की परीक्षाएं
छत्तीसगढ़
तिमाही परीक्षा 21 सितंबर से, अर्धवार्षिक 1 दिसंबर से; प्रदेशभर के स्कूलों के लिए एक समान व्यवस्था
छत्तीसगढ़ के स्कूलों में परीक्षा व्यवस्था को लेकर इस शैक्षणिक सत्र से बड़ा बदलाव किया जा रहा है। अब कक्षा पहली से लेकर 12वीं तक की तिमाही और अर्धवार्षिक परीक्षाओं के आयोजन में पूरे प्रदेश में एकरूपता रहेगी। अलग-अलग जिलों में अलग तारीखों पर परीक्षा कराने के बजाय सभी जिलों में तय कार्यक्रम के अनुसार एक साथ परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी।
लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने तिमाही और अर्धवार्षिक परीक्षाओं का कार्यक्रम जारी कर दिया है। नए शेड्यूल के मुताबिक तिमाही परीक्षाएं 21 सितंबर से शुरू होकर 26 सितंबर 2026 तक चलेंगी। वहीं, विद्यार्थियों की अर्धवार्षिक परीक्षाएं 1 दिसंबर से 7 दिसंबर 2026 तक आयोजित की जाएंगी।
नई व्यवस्था का असर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले पहली से 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों पर होगा। स्कूलों को भी जारी समय-सारिणी के अनुसार अपनी परीक्षा संबंधी तैयारियां करनी होंगी।
सभी जिलों में एक जैसी परीक्षा व्यवस्था
इस बार केवल परीक्षा की तारीखों को लेकर ही बदलाव नहीं किया गया है, बल्कि प्रश्नपत्र और परीक्षा संचालन की प्रक्रिया में भी समान व्यवस्था लागू करने की तैयारी है। इसका उद्देश्य अलग-अलग जिलों में परीक्षा के स्तर और आयोजन के तरीके में होने वाले अंतर को कम करना है।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार परीक्षा कराने से स्कूलों के शैक्षणिक कैलेंडर को व्यवस्थित रखने में भी मदद मिलेगी। शिक्षकों को पाठ्यक्रम पूरा कराने और विद्यार्थियों को परीक्षा की तैयारी कराने के लिए पहले से निश्चित समय मिल सकेगा।
जिलों में बनेंगी परीक्षा समितियां
तिमाही और अर्धवार्षिक परीक्षाओं की जिम्मेदारी संभालने के लिए जिला स्तर पर विशेष परीक्षा समितियों का गठन किया जाएगा। इन समितियों को प्रश्नपत्र तैयार कराने से लेकर परीक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं की निगरानी तक की जिम्मेदारी दी जाएगी।
समितियां यह सुनिश्चित करेंगी कि निर्धारित समय पर प्रश्नपत्र तैयार हों और परीक्षा संचालन में तय प्रक्रिया का पालन किया जाए। जिला स्तर पर होने वाली तैयारियों के माध्यम से स्कूलों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की कोशिश भी की जाएगी।
21 सितंबर से तिमाही परीक्षा
नए परीक्षा कैलेंडर के अनुसार विद्यार्थियों की पहली बड़ी परीक्षा सितंबर के तीसरे सप्ताह से होगी। तिमाही परीक्षाओं के लिए 21 से 26 सितंबर तक का समय तय किया गया है। ऐसे में स्कूलों को सितंबर से पहले निर्धारित पाठ्यक्रम पूरा कराने पर ध्यान देना होगा।
तिमाही परीक्षा के जरिए शैक्षणिक सत्र के शुरुआती महीनों में विद्यार्थियों की पढ़ाई और विषयों की समझ का आकलन किया जाएगा। परीक्षा कार्यक्रम पहले जारी होने से विद्यार्थी भी विषयवार तैयारी की योजना बना सकेंगे।
दिसंबर के पहले सप्ताह में अर्धवार्षिक परीक्षा
अर्धवार्षिक परीक्षाओं के लिए 1 से 7 दिसंबर तक की अवधि निर्धारित की गई है। यानी दिसंबर के शुरुआती सप्ताह में ही कक्षा पहली से 12वीं तक के विद्यार्थियों की परीक्षाएं कराई जाएंगी।
अर्धवार्षिक परीक्षा के कार्यक्रम को ध्यान में रखते हुए स्कूलों को नवंबर तक संबंधित पाठ्यक्रम पूरा कराने और परीक्षा से जुड़ी तैयारियां करने का समय मिलेगा।
परीक्षा प्रणाली में एकरूपता पर जोर
प्रदेश स्तर पर एक साथ परीक्षा कराने के पीछे प्रमुख उद्देश्य स्कूल शिक्षा की मूल्यांकन व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित बनाना है। एक ही समय पर परीक्षा होने से अलग-अलग जिलों के स्कूलों में चल रही शैक्षणिक गतिविधियों को समान कैलेंडर के अनुसार संचालित किया जा सकेगा।
DPI के कार्यक्रम के बाद अब जिला स्तर पर परीक्षा समितियों के गठन, प्रश्नपत्र तैयार करने और परीक्षा केंद्रों से जुड़ी आवश्यक व्यवस्थाओं पर काम किया जाएगा।
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छत्तीसगढ़ में पहली बार एक शेड्यूल पर होंगी कक्षा 1 से 12वीं की परीक्षाएं
छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ के स्कूलों में परीक्षा व्यवस्था को लेकर इस शैक्षणिक सत्र से बड़ा बदलाव किया जा रहा है। अब कक्षा पहली से लेकर 12वीं तक की तिमाही और अर्धवार्षिक परीक्षाओं के आयोजन में पूरे प्रदेश में एकरूपता रहेगी। अलग-अलग जिलों में अलग तारीखों पर परीक्षा कराने के बजाय सभी जिलों में तय कार्यक्रम के अनुसार एक साथ परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी।
लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने तिमाही और अर्धवार्षिक परीक्षाओं का कार्यक्रम जारी कर दिया है। नए शेड्यूल के मुताबिक तिमाही परीक्षाएं 21 सितंबर से शुरू होकर 26 सितंबर 2026 तक चलेंगी। वहीं, विद्यार्थियों की अर्धवार्षिक परीक्षाएं 1 दिसंबर से 7 दिसंबर 2026 तक आयोजित की जाएंगी।
नई व्यवस्था का असर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले पहली से 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों पर होगा। स्कूलों को भी जारी समय-सारिणी के अनुसार अपनी परीक्षा संबंधी तैयारियां करनी होंगी।
सभी जिलों में एक जैसी परीक्षा व्यवस्था
इस बार केवल परीक्षा की तारीखों को लेकर ही बदलाव नहीं किया गया है, बल्कि प्रश्नपत्र और परीक्षा संचालन की प्रक्रिया में भी समान व्यवस्था लागू करने की तैयारी है। इसका उद्देश्य अलग-अलग जिलों में परीक्षा के स्तर और आयोजन के तरीके में होने वाले अंतर को कम करना है।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार परीक्षा कराने से स्कूलों के शैक्षणिक कैलेंडर को व्यवस्थित रखने में भी मदद मिलेगी। शिक्षकों को पाठ्यक्रम पूरा कराने और विद्यार्थियों को परीक्षा की तैयारी कराने के लिए पहले से निश्चित समय मिल सकेगा।
जिलों में बनेंगी परीक्षा समितियां
तिमाही और अर्धवार्षिक परीक्षाओं की जिम्मेदारी संभालने के लिए जिला स्तर पर विशेष परीक्षा समितियों का गठन किया जाएगा। इन समितियों को प्रश्नपत्र तैयार कराने से लेकर परीक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं की निगरानी तक की जिम्मेदारी दी जाएगी।
समितियां यह सुनिश्चित करेंगी कि निर्धारित समय पर प्रश्नपत्र तैयार हों और परीक्षा संचालन में तय प्रक्रिया का पालन किया जाए। जिला स्तर पर होने वाली तैयारियों के माध्यम से स्कूलों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की कोशिश भी की जाएगी।
21 सितंबर से तिमाही परीक्षा
नए परीक्षा कैलेंडर के अनुसार विद्यार्थियों की पहली बड़ी परीक्षा सितंबर के तीसरे सप्ताह से होगी। तिमाही परीक्षाओं के लिए 21 से 26 सितंबर तक का समय तय किया गया है। ऐसे में स्कूलों को सितंबर से पहले निर्धारित पाठ्यक्रम पूरा कराने पर ध्यान देना होगा।
तिमाही परीक्षा के जरिए शैक्षणिक सत्र के शुरुआती महीनों में विद्यार्थियों की पढ़ाई और विषयों की समझ का आकलन किया जाएगा। परीक्षा कार्यक्रम पहले जारी होने से विद्यार्थी भी विषयवार तैयारी की योजना बना सकेंगे।
दिसंबर के पहले सप्ताह में अर्धवार्षिक परीक्षा
अर्धवार्षिक परीक्षाओं के लिए 1 से 7 दिसंबर तक की अवधि निर्धारित की गई है। यानी दिसंबर के शुरुआती सप्ताह में ही कक्षा पहली से 12वीं तक के विद्यार्थियों की परीक्षाएं कराई जाएंगी।
अर्धवार्षिक परीक्षा के कार्यक्रम को ध्यान में रखते हुए स्कूलों को नवंबर तक संबंधित पाठ्यक्रम पूरा कराने और परीक्षा से जुड़ी तैयारियां करने का समय मिलेगा।
परीक्षा प्रणाली में एकरूपता पर जोर
प्रदेश स्तर पर एक साथ परीक्षा कराने के पीछे प्रमुख उद्देश्य स्कूल शिक्षा की मूल्यांकन व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित बनाना है। एक ही समय पर परीक्षा होने से अलग-अलग जिलों के स्कूलों में चल रही शैक्षणिक गतिविधियों को समान कैलेंडर के अनुसार संचालित किया जा सकेगा।
DPI के कार्यक्रम के बाद अब जिला स्तर पर परीक्षा समितियों के गठन, प्रश्नपत्र तैयार करने और परीक्षा केंद्रों से जुड़ी आवश्यक व्यवस्थाओं पर काम किया जाएगा।
