छत्तीसगढ़ में मानसून फिर आक्रामक, कुसमी में 28 सेमी बारिश; अगले 48 घंटे कई इलाकों में भारी वर्षा का खतरा

छत्तीसगढ़

On

लो-प्रेशर सिस्टम और सक्रिय मानसूनी परिस्थितियों से उत्तर और मध्य छत्तीसगढ़ में बारिश का जोर बढ़ा, कुसमी में 24 घंटे में 28 सेमी पानी बरसा; रायपुर समेत कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश के आसार

छत्तीसगढ़ में मानसून ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। पिछले कुछ दिनों से प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में हो रही बारिश अब कई क्षेत्रों में तेज दौर में बदल गई है। खासकर उत्तर और मध्य छत्तीसगढ़ में मानसूनी गतिविधियां अधिक सक्रिय दिखाई दे रही हैं। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक कुसमी में 24 घंटे के दौरान करीब 28 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई। इससे पहले बिलासपुर में भी करीब इतनी ही भारी वर्षा दर्ज की गई थी। लगातार दो अलग-अलग अवधियों में इतनी अधिक बारिश दर्ज होना बताता है कि प्रदेश के कुछ हिस्सों में इस समय बेहद मजबूत वर्षा वाले बादल सक्रिय हो रहे हैं।

प्रदेश में बारिश का मौजूदा दौर केवल कुछ शहरों तक सीमित नहीं है। कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी वर्षा दर्ज की जा रही है। कुसमी के अलावा पुसौर में करीब 16 सेंटीमीटर, बिलासपुर और अकलतरा में लगभग 14-14 सेंटीमीटर, पामगढ़ में 12 सेंटीमीटर और पेंड्रा में करीब 10 सेंटीमीटर बारिश दर्ज होने की जानकारी है। मस्तूरी, लवन, बैकुंठपुर और पाली सहित कई इलाकों में भी अच्छी वर्षा हुई है।

इसके ठीक पहले बिलासपुर में बेहद तेज बारिश ने जनजीवन प्रभावित किया था। बिलासपुर में लगभग 276 मिलीमीटर वर्षा दर्ज होने के बाद कई निचले इलाकों में पानी भर गया था। अकलतरा, गिधौरी, मैनपुर, नवागढ़, सीपत और रायपुर के आसपास भी अच्छी बारिश दर्ज की गई थी। लगातार अलग-अलग क्षेत्रों में बन रहे भारी वर्षा के केंद्रों ने प्रशासन की चिंता बढ़ाई है, क्योंकि कम समय में बहुत ज्यादा पानी गिरने से शहरी जलभराव, नदी-नालों के जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी और निचले इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति बनने का जोखिम बढ़ जाता है।

मौसम में आए इस बदलाव के पीछे कई सक्रिय मौसमी प्रणालियों की भूमिका बताई जा रही है। बंगाल की खाड़ी और पूर्वी भारत के आसपास बने सिस्टम मानसूनी हवाओं को मजबूत कर रहे हैं। नमी से भरी हवाओं के लगातार मध्य और पूर्वी भारत की तरफ आने से छत्तीसगढ़ में बादल बनने और बारिश की परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं। मौसम विभाग ने पूर्वी और मध्य भारत के कई हिस्सों में सक्रिय मानसून के कारण तेज बारिश की संभावना जताई है।

छत्तीसगढ़ में अगले 48 घंटे मौसम के लिहाज से महत्वपूर्ण रह सकते हैं। उत्तर और मध्य हिस्सों में कुछ स्थानों पर भारी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। स्थानीय स्तर पर बादलों की मजबूत संरचना बनने पर बहुत भारी वर्षा भी हो सकती है। ऐसे में एक ही जिले के अलग-अलग इलाकों में बारिश की मात्रा में बड़ा अंतर देखने को मिल सकता है। कहीं लगातार हल्की-मध्यम बारिश हो सकती है तो कुछ किलोमीटर दूर कम समय में बहुत तेज पानी गिर सकता है।

कोरबा और मुंगेली जैसे क्षेत्रों के लिए भी भारी बारिश और गरज-चमक की संभावना वाले संकेत हैं। मौसम विभाग के कृषि-मौसम पूर्वानुमान में 19 जुलाई के लिए कोरबा और मुंगेली में भारी वर्षा के साथ गरज-चमक की संभावना दर्शाई गई है। इसके बाद मौसम प्रणाली की स्थिति के अनुसार बारिश की तीव्रता में बदलाव हो सकता है।

राजधानी रायपुर में भी दिनभर मौसम बदला हुआ रहने की संभावना है। आसमान में बादलों की आवाजाही के बीच कुछ दौर में बारिश हो सकती है। स्थानीय स्तर पर गरज-चमक के साथ तेज बौछारें पड़ने की स्थिति भी बन सकती है। ऐसे मौसम में घर से बाहर निकलने वालों के लिए छाता या रेनकोट साथ रखना उपयोगी रहेगा। बारिश के दौरान सड़कों पर पानी जमा होने और ट्रैफिक की गति धीमी होने की आशंका भी रहती है।

प्रदेश के जिन जिलों में बारिश की गतिविधि बनी रहने की संभावना है, उनमें कोंडागांव, कांकेर, धमतरी, बालोद, राजनांदगांव, गरियाबंद, महासमुंद, रायपुर, बलौदाबाजार, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, बिलासपुर, कोरबा, जशपुर, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, दुर्ग, बेमेतरा, कबीरधाम, मुंगेली, सरगुजा, सूरजपुर, कोरिया और बलरामपुर जैसे क्षेत्र शामिल हैं। हालांकि बारिश की तीव्रता हर जिले और हर स्थान पर समान नहीं रहने वाली है।

उत्तर छत्तीसगढ़ में सरगुजा संभाग के इलाकों पर विशेष नजर बनी हुई है। पहाड़ी और ढलान वाले क्षेत्रों में लगातार तेज बारिश होने पर छोटे नदी-नालों में अचानक पानी बढ़ सकता है। कुसमी में दर्ज हुई 28 सेंटीमीटर बारिश इस बात का उदाहरण है कि स्थानीय स्तर पर बादल बेहद तीव्र वर्षा करा सकते हैं। ऐसी स्थिति में निचले इलाकों, पुल-पुलियों और तेज बहाव वाले रास्तों पर अतिरिक्त सावधानी की जरूरत रहती है।

बिलासपुर संभाग में भी बारिश का असर पिछले दिनों काफी मजबूत रहा है। बिलासपुर शहर में हुई अत्यधिक वर्षा के बाद जलभराव की स्थिति सामने आई थी। अब यदि कैचमेंट क्षेत्रों में दोबारा तेज बारिश होती है तो नदी-नालों और जलाशयों में पानी की आवक तेजी से बढ़ सकती है। ग्रामीण इलाकों में खेतों में पानी भरने और कच्चे रास्तों के प्रभावित होने जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं।

मानसून की सक्रियता खेती के लिहाज से राहत भी लेकर आई है। धान की खेती वाले छत्तीसगढ़ में जुलाई की बारिश बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। खेतों में पर्याप्त पानी मिलने से रोपाई और अन्य कृषि गतिविधियों को गति मिलती है। जिन इलाकों में पहले बारिश कमजोर थी, वहां नई वर्षा से मिट्टी की नमी बेहतर हो सकती है। हालांकि बहुत कम समय में अत्यधिक बारिश होने पर खेतों में जलभराव भी फसलों के लिए समस्या बन सकता है।

गरज-चमक के दौरान आकाशीय बिजली भी मानसून सीजन का बड़ा जोखिम है। खुले खेतों, ऊंचे पेड़ों के नीचे या खुले मैदान में मौजूद लोगों को बिजली चमकने और बादल गरजने की स्थिति में सुरक्षित पक्की जगह पर जाना चाहिए। बारिश के दौरान उफनते नालों और जलमग्न पुलों को पार करने से बचना भी जरूरी है।

हाल की तेज बारिश से प्रदेश में मानसून की समग्र स्थिति में भी सुधार देखने को मिला है। जुलाई के शुरुआती दिनों में लगातार दो दिन हुई व्यापक बारिश ने राज्य की मौसमी वर्षा की कमी को घटाकर लगभग 13 प्रतिशत तक पहुंचा दिया था, जो मौसम विभाग की सामान्य वर्षा की श्रेणी के दायरे में आता है। इसके बाद अलग-अलग जिलों में हुई भारी बारिश से स्थानीय स्तर पर वर्षा के आंकड़ों में और बदलाव हो रहा है।

पिछले कुछ दिनों के आंकड़े बताते हैं कि छत्तीसगढ़ में बारिश का पैटर्न काफी असमान है। एक समय बिलासपुर में करीब 28 सेंटीमीटर बारिश रिकॉर्ड हुई और इसके बाद कुसमी में भी 28 सेंटीमीटर के आसपास वर्षा दर्ज की गई। इसका मतलब यह नहीं कि पूरे प्रदेश में समान मात्रा में बारिश हो रही है, बल्कि मानसूनी सिस्टम के प्रभाव से अलग-अलग समय पर अलग क्षेत्रों में अत्यधिक बारिश वाले पॉकेट बन रहे हैं।

मौसम विभाग के व्यापक पूर्वानुमान में 19 और 20 जुलाई के दौरान छत्तीसगढ़ में बारिश की गतिविधियां बने रहने के संकेत हैं। इसके साथ गरज-चमक और कुछ स्थानों पर भारी वर्षा की स्थिति पैदा हो सकती है। पूर्वी और मध्य भारत में सक्रिय मौसम प्रणालियों के कारण आने वाले दिनों में मौसम तेजी से बदल सकता है।

-----------------

हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनलhttps://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुकDainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम@dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूबDainik Jagran MPCG Digital

📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए

www.dainikjagranmpcg.com
19 Jul 2026 By Priyanka

छत्तीसगढ़ में मानसून फिर आक्रामक, कुसमी में 28 सेमी बारिश; अगले 48 घंटे कई इलाकों में भारी वर्षा का खतरा

छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में मानसून ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। पिछले कुछ दिनों से प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में हो रही बारिश अब कई क्षेत्रों में तेज दौर में बदल गई है। खासकर उत्तर और मध्य छत्तीसगढ़ में मानसूनी गतिविधियां अधिक सक्रिय दिखाई दे रही हैं। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक कुसमी में 24 घंटे के दौरान करीब 28 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई। इससे पहले बिलासपुर में भी करीब इतनी ही भारी वर्षा दर्ज की गई थी। लगातार दो अलग-अलग अवधियों में इतनी अधिक बारिश दर्ज होना बताता है कि प्रदेश के कुछ हिस्सों में इस समय बेहद मजबूत वर्षा वाले बादल सक्रिय हो रहे हैं।

प्रदेश में बारिश का मौजूदा दौर केवल कुछ शहरों तक सीमित नहीं है। कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी वर्षा दर्ज की जा रही है। कुसमी के अलावा पुसौर में करीब 16 सेंटीमीटर, बिलासपुर और अकलतरा में लगभग 14-14 सेंटीमीटर, पामगढ़ में 12 सेंटीमीटर और पेंड्रा में करीब 10 सेंटीमीटर बारिश दर्ज होने की जानकारी है। मस्तूरी, लवन, बैकुंठपुर और पाली सहित कई इलाकों में भी अच्छी वर्षा हुई है।

इसके ठीक पहले बिलासपुर में बेहद तेज बारिश ने जनजीवन प्रभावित किया था। बिलासपुर में लगभग 276 मिलीमीटर वर्षा दर्ज होने के बाद कई निचले इलाकों में पानी भर गया था। अकलतरा, गिधौरी, मैनपुर, नवागढ़, सीपत और रायपुर के आसपास भी अच्छी बारिश दर्ज की गई थी। लगातार अलग-अलग क्षेत्रों में बन रहे भारी वर्षा के केंद्रों ने प्रशासन की चिंता बढ़ाई है, क्योंकि कम समय में बहुत ज्यादा पानी गिरने से शहरी जलभराव, नदी-नालों के जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी और निचले इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति बनने का जोखिम बढ़ जाता है।

मौसम में आए इस बदलाव के पीछे कई सक्रिय मौसमी प्रणालियों की भूमिका बताई जा रही है। बंगाल की खाड़ी और पूर्वी भारत के आसपास बने सिस्टम मानसूनी हवाओं को मजबूत कर रहे हैं। नमी से भरी हवाओं के लगातार मध्य और पूर्वी भारत की तरफ आने से छत्तीसगढ़ में बादल बनने और बारिश की परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं। मौसम विभाग ने पूर्वी और मध्य भारत के कई हिस्सों में सक्रिय मानसून के कारण तेज बारिश की संभावना जताई है।

छत्तीसगढ़ में अगले 48 घंटे मौसम के लिहाज से महत्वपूर्ण रह सकते हैं। उत्तर और मध्य हिस्सों में कुछ स्थानों पर भारी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। स्थानीय स्तर पर बादलों की मजबूत संरचना बनने पर बहुत भारी वर्षा भी हो सकती है। ऐसे में एक ही जिले के अलग-अलग इलाकों में बारिश की मात्रा में बड़ा अंतर देखने को मिल सकता है। कहीं लगातार हल्की-मध्यम बारिश हो सकती है तो कुछ किलोमीटर दूर कम समय में बहुत तेज पानी गिर सकता है।

कोरबा और मुंगेली जैसे क्षेत्रों के लिए भी भारी बारिश और गरज-चमक की संभावना वाले संकेत हैं। मौसम विभाग के कृषि-मौसम पूर्वानुमान में 19 जुलाई के लिए कोरबा और मुंगेली में भारी वर्षा के साथ गरज-चमक की संभावना दर्शाई गई है। इसके बाद मौसम प्रणाली की स्थिति के अनुसार बारिश की तीव्रता में बदलाव हो सकता है।

राजधानी रायपुर में भी दिनभर मौसम बदला हुआ रहने की संभावना है। आसमान में बादलों की आवाजाही के बीच कुछ दौर में बारिश हो सकती है। स्थानीय स्तर पर गरज-चमक के साथ तेज बौछारें पड़ने की स्थिति भी बन सकती है। ऐसे मौसम में घर से बाहर निकलने वालों के लिए छाता या रेनकोट साथ रखना उपयोगी रहेगा। बारिश के दौरान सड़कों पर पानी जमा होने और ट्रैफिक की गति धीमी होने की आशंका भी रहती है।

प्रदेश के जिन जिलों में बारिश की गतिविधि बनी रहने की संभावना है, उनमें कोंडागांव, कांकेर, धमतरी, बालोद, राजनांदगांव, गरियाबंद, महासमुंद, रायपुर, बलौदाबाजार, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, बिलासपुर, कोरबा, जशपुर, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, दुर्ग, बेमेतरा, कबीरधाम, मुंगेली, सरगुजा, सूरजपुर, कोरिया और बलरामपुर जैसे क्षेत्र शामिल हैं। हालांकि बारिश की तीव्रता हर जिले और हर स्थान पर समान नहीं रहने वाली है।

उत्तर छत्तीसगढ़ में सरगुजा संभाग के इलाकों पर विशेष नजर बनी हुई है। पहाड़ी और ढलान वाले क्षेत्रों में लगातार तेज बारिश होने पर छोटे नदी-नालों में अचानक पानी बढ़ सकता है। कुसमी में दर्ज हुई 28 सेंटीमीटर बारिश इस बात का उदाहरण है कि स्थानीय स्तर पर बादल बेहद तीव्र वर्षा करा सकते हैं। ऐसी स्थिति में निचले इलाकों, पुल-पुलियों और तेज बहाव वाले रास्तों पर अतिरिक्त सावधानी की जरूरत रहती है।

बिलासपुर संभाग में भी बारिश का असर पिछले दिनों काफी मजबूत रहा है। बिलासपुर शहर में हुई अत्यधिक वर्षा के बाद जलभराव की स्थिति सामने आई थी। अब यदि कैचमेंट क्षेत्रों में दोबारा तेज बारिश होती है तो नदी-नालों और जलाशयों में पानी की आवक तेजी से बढ़ सकती है। ग्रामीण इलाकों में खेतों में पानी भरने और कच्चे रास्तों के प्रभावित होने जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं।

मानसून की सक्रियता खेती के लिहाज से राहत भी लेकर आई है। धान की खेती वाले छत्तीसगढ़ में जुलाई की बारिश बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। खेतों में पर्याप्त पानी मिलने से रोपाई और अन्य कृषि गतिविधियों को गति मिलती है। जिन इलाकों में पहले बारिश कमजोर थी, वहां नई वर्षा से मिट्टी की नमी बेहतर हो सकती है। हालांकि बहुत कम समय में अत्यधिक बारिश होने पर खेतों में जलभराव भी फसलों के लिए समस्या बन सकता है।

गरज-चमक के दौरान आकाशीय बिजली भी मानसून सीजन का बड़ा जोखिम है। खुले खेतों, ऊंचे पेड़ों के नीचे या खुले मैदान में मौजूद लोगों को बिजली चमकने और बादल गरजने की स्थिति में सुरक्षित पक्की जगह पर जाना चाहिए। बारिश के दौरान उफनते नालों और जलमग्न पुलों को पार करने से बचना भी जरूरी है।

हाल की तेज बारिश से प्रदेश में मानसून की समग्र स्थिति में भी सुधार देखने को मिला है। जुलाई के शुरुआती दिनों में लगातार दो दिन हुई व्यापक बारिश ने राज्य की मौसमी वर्षा की कमी को घटाकर लगभग 13 प्रतिशत तक पहुंचा दिया था, जो मौसम विभाग की सामान्य वर्षा की श्रेणी के दायरे में आता है। इसके बाद अलग-अलग जिलों में हुई भारी बारिश से स्थानीय स्तर पर वर्षा के आंकड़ों में और बदलाव हो रहा है।

पिछले कुछ दिनों के आंकड़े बताते हैं कि छत्तीसगढ़ में बारिश का पैटर्न काफी असमान है। एक समय बिलासपुर में करीब 28 सेंटीमीटर बारिश रिकॉर्ड हुई और इसके बाद कुसमी में भी 28 सेंटीमीटर के आसपास वर्षा दर्ज की गई। इसका मतलब यह नहीं कि पूरे प्रदेश में समान मात्रा में बारिश हो रही है, बल्कि मानसूनी सिस्टम के प्रभाव से अलग-अलग समय पर अलग क्षेत्रों में अत्यधिक बारिश वाले पॉकेट बन रहे हैं।

मौसम विभाग के व्यापक पूर्वानुमान में 19 और 20 जुलाई के दौरान छत्तीसगढ़ में बारिश की गतिविधियां बने रहने के संकेत हैं। इसके साथ गरज-चमक और कुछ स्थानों पर भारी वर्षा की स्थिति पैदा हो सकती है। पूर्वी और मध्य भारत में सक्रिय मौसम प्रणालियों के कारण आने वाले दिनों में मौसम तेजी से बदल सकता है।

https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/monsoon-again-aggressive-in-chhattisgarh-28-cm-rain-in-kusmi/article-59158

खबरें और भी हैं

APS यूनिवर्सिटी ने मनाया 59वां स्थापना दिवस, भारतीय ज्ञान परंपरा और मातृभाषा आधारित शिक्षा पर जोर
कौन होगा दतिया विधानसभा उपचुनाव में जनता की पहली पसंद?
Select one option below:

टाप न्यूज

APS यूनिवर्सिटी ने मनाया 59वां स्थापना दिवस, भारतीय ज्ञान परंपरा और मातृभाषा आधारित शिक्षा पर जोर

रीवा के अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय में स्थापना दिवस पर वृक्षारोपण से लेकर सम्मान समारोह तक हुए आयोजन, कुलगुरु ने...
विंध्य/रीवा 
APS यूनिवर्सिटी ने मनाया 59वां स्थापना दिवस, भारतीय ज्ञान परंपरा और मातृभाषा आधारित शिक्षा पर जोर

रीवा में 10 हजार का इनामी आरोपी गिरफ्तार, डकैती और NDPS समेत तीन मामलों में था फरार

मनगवां पुलिस ने 21 वर्षीय जितेंद्र सिंह उर्फ राका को दबोचा, लंबे समय से चल रही थी तलाश; गंभीर मामलों...
विंध्य/रीवा 
रीवा में 10 हजार का इनामी आरोपी गिरफ्तार, डकैती और NDPS समेत तीन मामलों में था फरार

CJP प्रतिनिधियों ने जेपी नड्डा से की मुलाकात, मांगों का पत्र सौंपा; शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर अड़े प्रदर्शनकारी

NEET-UG पेपर लीक समेत परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दे उठाए, नड्डा से करीब 10 मिनट हुई बातचीत; CJP का दावा-...
देश विदेश  टॉप न्यूज़ 
CJP प्रतिनिधियों ने जेपी नड्डा से की मुलाकात, मांगों का पत्र सौंपा; शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर अड़े प्रदर्शनकारी

भारत को मिली पहली डेंगू वैक्सीन, 4 से 60 साल तक के लोगों के लिए QDENGA को मंजूरी

डेंगू के चारों प्रकार के वायरस को ध्यान में रखकर तैयार हुई वैक्सीन, पहले संक्रमण की जांच जरूरी नहीं; तीन...
देश विदेश 
भारत को मिली पहली डेंगू वैक्सीन, 4 से 60 साल तक के लोगों के लिए QDENGA को मंजूरी

बिजनेस

सर्राफा बाजार में फिर चमका सोना-चांदी, गोल्ड ₹1.42 लाख के करीब; चांदी ₹2.19 लाख प्रति किलो सर्राफा बाजार में फिर चमका सोना-चांदी, गोल्ड ₹1.42 लाख के करीब; चांदी ₹2.19 लाख प्रति किलो
एक दिन में सोना ₹756 और चांदी ₹3,493 महंगी, जुलाई में गोल्ड ने दिखाई मजबूती लेकिन सिल्वर अब भी महीने...
महंगे कच्चे तेल ने बढ़ाई भारत की चिंता, ब्रेंट $90 के पार; महंगाई से रुपए तक दिख सकता है असर
भारतीय फिल्म निर्माता साजिद कुरैशी ने डिजिटल मीडिया में रखा कदम, Buzzzooka (बजूका) के रूप में लॉन्च किया नया मनोरंजन नेटवर्क
शेयर बाजार की तेजी से दिग्गज कंपनियों की बढ़ी दौलत, TCS ने एक हफ्ते में जोड़े ₹72 हजार करोड़
UAN Activation: EPFO का बड़ा बदलाव, अब उमंग ऐप से एक्टिवेट होगा UAN, फेस ऑथेंटिकेशन भी जरूरी
Copyright (c) Dainik Jagran All Rights Reserved.