महतारी वंदन योजना पर विधानसभा में सियासी संग्राम, 1.55 लाख महिलाओं के नाम हटने पर सरकार विपक्ष आमने-सामने

छत्तीसगढ़

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सरकार ने मृत्यु, ई-केवाईसी, आयकरदाता और अपात्रता को वजह बताया। कांग्रेस ने लाभार्थियों के नाम कटने पर विरोध जताते हुए सदन से किया वॉकआउट

छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन महतारी वंदन योजना को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। प्रश्नकाल के दौरान योजना से बड़ी संख्या में महिलाओं के नाम हटाए जाने का मुद्दा उठते ही सदन का माहौल गर्म हो गया। विपक्ष ने लाभार्थियों की संख्या में आई कमी को लेकर सरकार से जवाब मांगा और आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में महिलाओं को योजना के दायरे से बाहर कर दिया गया है। सरकार की ओर से दिए गए जवाब से असंतुष्ट कांग्रेस विधायकों ने पहले नारेबाजी की और बाद में सदन से वॉकआउट कर दिया।

सदन में हुई चर्चा के दौरान महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने महतारी वंदन योजना से लाभार्थियों के नाम हटाए जाने की स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि योजना की नियमित समीक्षा और सत्यापन प्रक्रिया के दौरान करीब 1.55 लाख महिलाओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। मंत्री के अनुसार इसके पीछे कई प्रशासनिक और तकनीकी कारण हैं। इनमें लाभार्थियों की मृत्यु, ई-केवाईसी पूरा नहीं होना, आयकरदाता की श्रेणी में आ जाना तथा पात्रता संबंधी शर्तों का पूरा नहीं होना प्रमुख कारण हैं। उन्होंने कहा कि सरकार समय-समय पर लाभार्थियों का सत्यापन कर रही है ताकि केवल पात्र महिलाओं को ही योजना का लाभ मिलता रहे।

मंत्री ने सदन को यह भी जानकारी दी कि योजना की शुरुआत के समय लाभार्थियों की संख्या लगभग 70.09 लाख थी, जो सत्यापन प्रक्रिया के बाद घटकर 68.54 लाख रह गई है। सरकार का कहना है कि यह कमी किसी मनमाने निर्णय का परिणाम नहीं बल्कि नियमों के अनुरूप किए गए सत्यापन का हिस्सा है। हालांकि विपक्ष ने सरकार के इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और दावा किया कि कई वास्तविक हितग्राहियों के नाम भी सूची से हट गए हैं।

कांग्रेस विधायकों ने आरोप लगाया कि महतारी वंदन योजना राज्य सरकार की प्रमुख योजनाओं में शामिल है और इसमें पात्र महिलाओं के नाम हटने से हजारों परिवार प्रभावित हो रहे हैं। विपक्ष ने मांग की कि जिन महिलाओं के नाम हटाए गए हैं, उनकी सूची सार्वजनिक की जाए और यदि किसी पात्र महिला का नाम गलती से हटाया गया है तो उसे तत्काल दोबारा जोड़ा जाए। सरकार के जवाब के दौरान सदन में कई बार शोर-शराबा हुआ। बाद में कांग्रेस के सदस्य विरोध जताते हुए सदन से बाहर निकल गए।

प्रश्नकाल के दौरान सार्वजनिक वितरण प्रणाली का मुद्दा भी चर्चा में रहा। विधायक शेषराज हरबंस ने अंत्योदय परिवारों को अतिरिक्त खाद्यान्न उपलब्ध कराने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को वर्तमान व्यवस्था के अलावा अतिरिक्त चावल दिया जाना चाहिए। इस पर खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने कहा कि सरकार सभी योजनाओं की समीक्षा कर रही है और पात्र हितग्राहियों को निर्धारित नियमों के अनुसार राशन उपलब्ध कराया जा रहा है।

इसी दौरान भाजपा विधायक सुशांत शुक्ला ने राशन दुकानों में उपभोक्ताओं पर अन्य सामान खरीदने का दबाव बनाए जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ दुकानों में राशन लेने आने वाले लोगों को मसाले और अन्य उत्पाद खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है। खाद्य मंत्री ने इस पर कहा कि यदि संबंधित शिकायत और उसके समर्थन में दस्तावेज उपलब्ध कराए जाते हैं तो पूरे मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

सदन में महिला एवं बाल विकास विभाग से जुड़ा एक और मामला भी उठा। कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री अनिला भेड़िया ने सामूहिक विवाह कार्यक्रमों में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाते हुए सरकार से सवाल किया कि नकली मंगलसूत्र बांटे जाने के आरोपों पर अब तक क्या कार्रवाई की गई है। जवाब में मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि संबंधित जिले से इस प्रकार की कोई आधिकारिक शिकायत विभाग को प्राप्त नहीं हुई है। इसलिए उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर किसी एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई का प्रश्न नहीं बनता।

प्रश्नकाल समाप्त होने के बाद विधानसभा की कार्यवाही ने नया राजनीतिक मोड़ लिया, जब नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने राज्य सरकार के खिलाफ 136 बिंदुओं पर आधारित आरोप पत्र पेश करते हुए अविश्वास प्रस्ताव सदन में रखा। विपक्ष ने कानून-व्यवस्था, किसानों की समस्याएं, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, प्रशासनिक निर्णयों और हाल के कई विवादित मामलों को आधार बनाकर सरकार को घेरने की रणनीति अपनाई। इसके बाद सदन में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा शुरू हुई, जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष ने अपने-अपने तर्क रखे।

विधानसभा की मौजूदा स्थिति पर नजर डालें तो भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत है। सदन में भाजपा के 54 विधायक, कांग्रेस के 35 सदस्य और एक विधायक गोंडवाना गणतंत्र पार्टी से हैं। ऐसे में संख्या बल सरकार के पक्ष में दिखाई देता है, लेकिन विपक्ष का कहना है कि अविश्वास प्रस्ताव केवल सरकार गिराने का माध्यम नहीं बल्कि सरकार के पूरे कार्यकाल की समीक्षा और जवाबदेही तय करने का लोकतांत्रिक मंच भी होता है।

छत्तीसगढ़ विधानसभा के इतिहास में यह पहली बार नहीं है जब अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा हो रही हो। राज्य गठन के बाद अब तक कई सरकारों के खिलाफ ऐसे प्रस्ताव लाए जा चुके हैं। वर्ष 2002 और 2003 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी की सरकार के खिलाफ भाजपा ने अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था। इसके बाद डॉ. रमन सिंह के कार्यकाल में भी कई बार कांग्रेस ने सरकार को सदन में चुनौती दी। वहीं भूपेश बघेल सरकार के दौरान भी विपक्ष की ओर से दो बार अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। हालांकि अब तक विधानसभा के इतिहास में कोई भी अविश्वास प्रस्ताव पारित नहीं हो सका है।

विधानसभा रिकॉर्ड के अनुसार सबसे लंबी बहस वर्ष 2015 में डॉ. रमन सिंह सरकार के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर हुई थी, जो 24 घंटे से अधिक समय तक चली थी। वहीं वर्ष 2022 और 2023 में भूपेश बघेल सरकार के खिलाफ आए प्रस्तावों पर भी कई घंटों तक चर्चा हुई, लेकिन दोनों ही प्रस्ताव बहुमत के अभाव में ध्वनिमत से खारिज हो गए थे।

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17 Jul 2026 By Priyanka

महतारी वंदन योजना पर विधानसभा में सियासी संग्राम, 1.55 लाख महिलाओं के नाम हटने पर सरकार विपक्ष आमने-सामने

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छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन महतारी वंदन योजना को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। प्रश्नकाल के दौरान योजना से बड़ी संख्या में महिलाओं के नाम हटाए जाने का मुद्दा उठते ही सदन का माहौल गर्म हो गया। विपक्ष ने लाभार्थियों की संख्या में आई कमी को लेकर सरकार से जवाब मांगा और आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में महिलाओं को योजना के दायरे से बाहर कर दिया गया है। सरकार की ओर से दिए गए जवाब से असंतुष्ट कांग्रेस विधायकों ने पहले नारेबाजी की और बाद में सदन से वॉकआउट कर दिया।

सदन में हुई चर्चा के दौरान महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने महतारी वंदन योजना से लाभार्थियों के नाम हटाए जाने की स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि योजना की नियमित समीक्षा और सत्यापन प्रक्रिया के दौरान करीब 1.55 लाख महिलाओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। मंत्री के अनुसार इसके पीछे कई प्रशासनिक और तकनीकी कारण हैं। इनमें लाभार्थियों की मृत्यु, ई-केवाईसी पूरा नहीं होना, आयकरदाता की श्रेणी में आ जाना तथा पात्रता संबंधी शर्तों का पूरा नहीं होना प्रमुख कारण हैं। उन्होंने कहा कि सरकार समय-समय पर लाभार्थियों का सत्यापन कर रही है ताकि केवल पात्र महिलाओं को ही योजना का लाभ मिलता रहे।

मंत्री ने सदन को यह भी जानकारी दी कि योजना की शुरुआत के समय लाभार्थियों की संख्या लगभग 70.09 लाख थी, जो सत्यापन प्रक्रिया के बाद घटकर 68.54 लाख रह गई है। सरकार का कहना है कि यह कमी किसी मनमाने निर्णय का परिणाम नहीं बल्कि नियमों के अनुरूप किए गए सत्यापन का हिस्सा है। हालांकि विपक्ष ने सरकार के इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और दावा किया कि कई वास्तविक हितग्राहियों के नाम भी सूची से हट गए हैं।

कांग्रेस विधायकों ने आरोप लगाया कि महतारी वंदन योजना राज्य सरकार की प्रमुख योजनाओं में शामिल है और इसमें पात्र महिलाओं के नाम हटने से हजारों परिवार प्रभावित हो रहे हैं। विपक्ष ने मांग की कि जिन महिलाओं के नाम हटाए गए हैं, उनकी सूची सार्वजनिक की जाए और यदि किसी पात्र महिला का नाम गलती से हटाया गया है तो उसे तत्काल दोबारा जोड़ा जाए। सरकार के जवाब के दौरान सदन में कई बार शोर-शराबा हुआ। बाद में कांग्रेस के सदस्य विरोध जताते हुए सदन से बाहर निकल गए।

प्रश्नकाल के दौरान सार्वजनिक वितरण प्रणाली का मुद्दा भी चर्चा में रहा। विधायक शेषराज हरबंस ने अंत्योदय परिवारों को अतिरिक्त खाद्यान्न उपलब्ध कराने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को वर्तमान व्यवस्था के अलावा अतिरिक्त चावल दिया जाना चाहिए। इस पर खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने कहा कि सरकार सभी योजनाओं की समीक्षा कर रही है और पात्र हितग्राहियों को निर्धारित नियमों के अनुसार राशन उपलब्ध कराया जा रहा है।

इसी दौरान भाजपा विधायक सुशांत शुक्ला ने राशन दुकानों में उपभोक्ताओं पर अन्य सामान खरीदने का दबाव बनाए जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ दुकानों में राशन लेने आने वाले लोगों को मसाले और अन्य उत्पाद खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है। खाद्य मंत्री ने इस पर कहा कि यदि संबंधित शिकायत और उसके समर्थन में दस्तावेज उपलब्ध कराए जाते हैं तो पूरे मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

सदन में महिला एवं बाल विकास विभाग से जुड़ा एक और मामला भी उठा। कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री अनिला भेड़िया ने सामूहिक विवाह कार्यक्रमों में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाते हुए सरकार से सवाल किया कि नकली मंगलसूत्र बांटे जाने के आरोपों पर अब तक क्या कार्रवाई की गई है। जवाब में मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि संबंधित जिले से इस प्रकार की कोई आधिकारिक शिकायत विभाग को प्राप्त नहीं हुई है। इसलिए उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर किसी एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई का प्रश्न नहीं बनता।

प्रश्नकाल समाप्त होने के बाद विधानसभा की कार्यवाही ने नया राजनीतिक मोड़ लिया, जब नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने राज्य सरकार के खिलाफ 136 बिंदुओं पर आधारित आरोप पत्र पेश करते हुए अविश्वास प्रस्ताव सदन में रखा। विपक्ष ने कानून-व्यवस्था, किसानों की समस्याएं, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, प्रशासनिक निर्णयों और हाल के कई विवादित मामलों को आधार बनाकर सरकार को घेरने की रणनीति अपनाई। इसके बाद सदन में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा शुरू हुई, जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष ने अपने-अपने तर्क रखे।

विधानसभा की मौजूदा स्थिति पर नजर डालें तो भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत है। सदन में भाजपा के 54 विधायक, कांग्रेस के 35 सदस्य और एक विधायक गोंडवाना गणतंत्र पार्टी से हैं। ऐसे में संख्या बल सरकार के पक्ष में दिखाई देता है, लेकिन विपक्ष का कहना है कि अविश्वास प्रस्ताव केवल सरकार गिराने का माध्यम नहीं बल्कि सरकार के पूरे कार्यकाल की समीक्षा और जवाबदेही तय करने का लोकतांत्रिक मंच भी होता है।

छत्तीसगढ़ विधानसभा के इतिहास में यह पहली बार नहीं है जब अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा हो रही हो। राज्य गठन के बाद अब तक कई सरकारों के खिलाफ ऐसे प्रस्ताव लाए जा चुके हैं। वर्ष 2002 और 2003 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी की सरकार के खिलाफ भाजपा ने अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था। इसके बाद डॉ. रमन सिंह के कार्यकाल में भी कई बार कांग्रेस ने सरकार को सदन में चुनौती दी। वहीं भूपेश बघेल सरकार के दौरान भी विपक्ष की ओर से दो बार अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। हालांकि अब तक विधानसभा के इतिहास में कोई भी अविश्वास प्रस्ताव पारित नहीं हो सका है।

विधानसभा रिकॉर्ड के अनुसार सबसे लंबी बहस वर्ष 2015 में डॉ. रमन सिंह सरकार के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर हुई थी, जो 24 घंटे से अधिक समय तक चली थी। वहीं वर्ष 2022 और 2023 में भूपेश बघेल सरकार के खिलाफ आए प्रस्तावों पर भी कई घंटों तक चर्चा हुई, लेकिन दोनों ही प्रस्ताव बहुमत के अभाव में ध्वनिमत से खारिज हो गए थे।

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