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कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल की बढ़ीं मुश्किलें, शराब घोटाले में भी EOW ने किया गिरफ्तार
रायपुर
कोल लेवी केस में 22 जुलाई तक EOW की रिमांड पर चल रहे रामगोपाल अग्रवाल को शराब घोटाले में भी गिरफ्तार किया गया है। एजेंसी ने जांच में 104 करोड़ रुपए कांग्रेस भवन तक पहुंचने का दावा किया है
रायपुर में कथित कोल लेवी और शराब घोटाले की जांच के बीच कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल की कानूनी मुश्किलें और बढ़ गई हैं। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने उन्हें शराब घोटाले से जुड़े मामले में भी गिरफ्तार कर लिया है। वे पहले से कोल लेवी मामले में एजेंसी की हिरासत में हैं और विशेष अदालत ने इस केस में उनकी पुलिस रिमांड 22 जुलाई तक बढ़ा दी है। शराब घोटाले में अदालत ने उन्हें 25 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया है, लेकिन कोल लेवी केस में पुलिस रिमांड जारी होने के कारण फिलहाल वे EOW की हिरासत में ही रहेंगे। एजेंसी अब अलग-अलग मामलों में उनसे पूछताछ आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है। उपलब्ध रिपोर्टों में भी शराब घोटाले में उनकी गिरफ्तारी और 104 करोड़ रुपए से जुड़े EOW के नए दावे का उल्लेख है।
जांच के दौरान EOW ने अदालत के सामने कोल लेवी से जुड़े कथित पैसों के लेन-देन को लेकर नया दावा पेश किया है। एजेंसी के मुताबिक अब तक जुटाए गए दस्तावेजों, डायरियों और अन्य साक्ष्यों की दोबारा पड़ताल में करीब 104 करोड़ रुपए कांग्रेस भवन तक पहुंचाए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि यह जांच एजेंसी का दावा है और आरोपों पर अंतिम निर्णय अदालत में साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर होगा। इससे पहले जांच में 52.62 करोड़ रुपए रामगोपाल अग्रवाल तक पहुंचने की बात सामने रखी गई थी, बाद में यह आंकड़ा 54.62 करोड़ रुपए बताया गया। अब जांच का दायरा बढ़ने के साथ EOW ने अदालत के सामने 104 करोड़ रुपए से जुड़ी जानकारी रखी है।
EOW की जांच का बड़ा आधार कोल लेवी मामले में पहले जब्त किए गए कथित रिकॉर्ड और डायरियां बताई जा रही हैं। एजेंसी के अनुसार आरोपी सूर्यकांत तिवारी समेत अन्य लोगों से जुड़े ठिकानों से मिले दस्तावेजों का नए सिरे से विश्लेषण किया गया है। इन्हीं रिकॉर्ड में दर्ज कथित लेन-देन की कड़ियों को जोड़कर रकम कहां से आई, किसके जरिए आगे पहुंची और इसका इस्तेमाल कहां हुआ, इन सवालों पर जांच की जा रही है। एजेंसी अब रामगोपाल अग्रवाल से इन्हीं दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन को लेकर विस्तार से पूछताछ करना चाहती है।
जांच एजेंसी ने अदालत को यह भी बताया है कि पूछताछ के दौरान रामगोपाल अग्रवाल का सामना मामले से जुड़े दूसरे आरोपियों और गवाहों से कराया जा सकता है। इनमें सूर्यकांत तिवारी, देवेंद्र डनसेना, निखिल चंद्राकर, रोशन सिंह और नारायण साहू समेत अन्य नाम शामिल बताए गए हैं। गवाह मोहसिन खान के सामने भी पूछताछ किए जाने की तैयारी है। एजेंसी का उद्देश्य अलग-अलग बयानों और उपलब्ध दस्तावेजों का मिलान करना है। जांच के दौरान इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और अन्य संभावित साक्ष्यों की तलाश भी की जा सकती है।
रामगोपाल अग्रवाल को पहले कोल लेवी मामले में हिरासत में लिया गया था। शुरुआती पुलिस रिमांड की अवधि पूरी होने पर उन्हें विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां EOW ने आगे पूछताछ के लिए अतिरिक्त समय मांगा। अदालत ने एजेंसी की मांग पर कोल लेवी केस में रिमांड 22 जुलाई तक बढ़ा दी। इसी कानूनी प्रक्रिया के बीच EOW ने शराब घोटाले से जुड़े प्रकरण में भी गिरफ्तारी की कार्रवाई की। अब 22 जुलाई को कोल लेवी मामले की मौजूदा रिमांड समाप्त होने के बाद उन्हें फिर अदालत में पेश किया जाना है। उस समय जांच एजेंसी शराब घोटाले में अलग से पुलिस रिमांड की मांग कर सकती है।
मामला केवल कोल लेवी और शराब घोटाले तक सीमित नहीं है। अदालत से EOW को एक अन्य कथित मामले में भी रामगोपाल अग्रवाल से पूछताछ की अनुमति मिलने की बात सामने आई है। एजेंसी अलग-अलग मामलों में सामने आए वित्तीय रिकॉर्ड और संबंधित व्यक्तियों के बीच संभावित कनेक्शन की पड़ताल कर रही है। पूछताछ में यदि नए तथ्य सामने आते हैं तो जांच का दायरा और बढ़ सकता है। फिलहाल एजेंसी का फोकस उपलब्ध दस्तावेजों, डिजिटल साक्ष्यों और आरोपियों तथा गवाहों के बयानों का आपस में मिलान करने पर है।
दूसरी ओर, प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाले और कोल लेवी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामलों की जांच करता रहा है। कोल लेवी मामले में जांच एजेंसियों का आरोप है कि कोयला परिवहन से अवैध लेवी वसूली का नेटवर्क संचालित किया गया था। शराब मामले में भी कथित समानांतर व्यवस्था और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने के आरोप जांच के केंद्र में रहे हैं। ये सभी आरोप न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं और संबंधित आरोपियों के खिलाफ दोषसिद्धि अदालत के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगी।
अब EOW की नजर 22 जुलाई की पेशी पर रहेगी। कोल लेवी मामले में रिमांड की अवधि पूरी होने के बाद एजेंसी अदालत के सामने पूछताछ की प्रगति और जुटाए गए साक्ष्यों की जानकारी रख सकती है। शराब घोटाले में अलग से हिरासत मांगने की स्थिति भी बन सकती है। वहीं ED की ओर से भी आगे कस्टडी की मांग किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
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कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल की बढ़ीं मुश्किलें, शराब घोटाले में भी EOW ने किया गिरफ्तार
रायपुर
रायपुर में कथित कोल लेवी और शराब घोटाले की जांच के बीच कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल की कानूनी मुश्किलें और बढ़ गई हैं। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने उन्हें शराब घोटाले से जुड़े मामले में भी गिरफ्तार कर लिया है। वे पहले से कोल लेवी मामले में एजेंसी की हिरासत में हैं और विशेष अदालत ने इस केस में उनकी पुलिस रिमांड 22 जुलाई तक बढ़ा दी है। शराब घोटाले में अदालत ने उन्हें 25 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया है, लेकिन कोल लेवी केस में पुलिस रिमांड जारी होने के कारण फिलहाल वे EOW की हिरासत में ही रहेंगे। एजेंसी अब अलग-अलग मामलों में उनसे पूछताछ आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है। उपलब्ध रिपोर्टों में भी शराब घोटाले में उनकी गिरफ्तारी और 104 करोड़ रुपए से जुड़े EOW के नए दावे का उल्लेख है।
जांच के दौरान EOW ने अदालत के सामने कोल लेवी से जुड़े कथित पैसों के लेन-देन को लेकर नया दावा पेश किया है। एजेंसी के मुताबिक अब तक जुटाए गए दस्तावेजों, डायरियों और अन्य साक्ष्यों की दोबारा पड़ताल में करीब 104 करोड़ रुपए कांग्रेस भवन तक पहुंचाए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि यह जांच एजेंसी का दावा है और आरोपों पर अंतिम निर्णय अदालत में साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर होगा। इससे पहले जांच में 52.62 करोड़ रुपए रामगोपाल अग्रवाल तक पहुंचने की बात सामने रखी गई थी, बाद में यह आंकड़ा 54.62 करोड़ रुपए बताया गया। अब जांच का दायरा बढ़ने के साथ EOW ने अदालत के सामने 104 करोड़ रुपए से जुड़ी जानकारी रखी है।
EOW की जांच का बड़ा आधार कोल लेवी मामले में पहले जब्त किए गए कथित रिकॉर्ड और डायरियां बताई जा रही हैं। एजेंसी के अनुसार आरोपी सूर्यकांत तिवारी समेत अन्य लोगों से जुड़े ठिकानों से मिले दस्तावेजों का नए सिरे से विश्लेषण किया गया है। इन्हीं रिकॉर्ड में दर्ज कथित लेन-देन की कड़ियों को जोड़कर रकम कहां से आई, किसके जरिए आगे पहुंची और इसका इस्तेमाल कहां हुआ, इन सवालों पर जांच की जा रही है। एजेंसी अब रामगोपाल अग्रवाल से इन्हीं दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन को लेकर विस्तार से पूछताछ करना चाहती है।
जांच एजेंसी ने अदालत को यह भी बताया है कि पूछताछ के दौरान रामगोपाल अग्रवाल का सामना मामले से जुड़े दूसरे आरोपियों और गवाहों से कराया जा सकता है। इनमें सूर्यकांत तिवारी, देवेंद्र डनसेना, निखिल चंद्राकर, रोशन सिंह और नारायण साहू समेत अन्य नाम शामिल बताए गए हैं। गवाह मोहसिन खान के सामने भी पूछताछ किए जाने की तैयारी है। एजेंसी का उद्देश्य अलग-अलग बयानों और उपलब्ध दस्तावेजों का मिलान करना है। जांच के दौरान इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और अन्य संभावित साक्ष्यों की तलाश भी की जा सकती है।
रामगोपाल अग्रवाल को पहले कोल लेवी मामले में हिरासत में लिया गया था। शुरुआती पुलिस रिमांड की अवधि पूरी होने पर उन्हें विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां EOW ने आगे पूछताछ के लिए अतिरिक्त समय मांगा। अदालत ने एजेंसी की मांग पर कोल लेवी केस में रिमांड 22 जुलाई तक बढ़ा दी। इसी कानूनी प्रक्रिया के बीच EOW ने शराब घोटाले से जुड़े प्रकरण में भी गिरफ्तारी की कार्रवाई की। अब 22 जुलाई को कोल लेवी मामले की मौजूदा रिमांड समाप्त होने के बाद उन्हें फिर अदालत में पेश किया जाना है। उस समय जांच एजेंसी शराब घोटाले में अलग से पुलिस रिमांड की मांग कर सकती है।
मामला केवल कोल लेवी और शराब घोटाले तक सीमित नहीं है। अदालत से EOW को एक अन्य कथित मामले में भी रामगोपाल अग्रवाल से पूछताछ की अनुमति मिलने की बात सामने आई है। एजेंसी अलग-अलग मामलों में सामने आए वित्तीय रिकॉर्ड और संबंधित व्यक्तियों के बीच संभावित कनेक्शन की पड़ताल कर रही है। पूछताछ में यदि नए तथ्य सामने आते हैं तो जांच का दायरा और बढ़ सकता है। फिलहाल एजेंसी का फोकस उपलब्ध दस्तावेजों, डिजिटल साक्ष्यों और आरोपियों तथा गवाहों के बयानों का आपस में मिलान करने पर है।
दूसरी ओर, प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाले और कोल लेवी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामलों की जांच करता रहा है। कोल लेवी मामले में जांच एजेंसियों का आरोप है कि कोयला परिवहन से अवैध लेवी वसूली का नेटवर्क संचालित किया गया था। शराब मामले में भी कथित समानांतर व्यवस्था और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने के आरोप जांच के केंद्र में रहे हैं। ये सभी आरोप न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं और संबंधित आरोपियों के खिलाफ दोषसिद्धि अदालत के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगी।
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