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साय सरकार के खिलाफ कांग्रेस का अविश्वास प्रस्ताव गिरा, 14 घंटे से ज्यादा चली बहस
रायपुर (छ.ग.)
मानसून सत्र के आखिरी दिन लंबी बहस के बाद अविश्वास प्रस्ताव ध्वनिमत से खारिज हुआ। सीएम विष्णुदेव साय और भूपेश बघेल के बीच कई मुद्दों पर तीखी सियासी बहस हुई
रायपुर में छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र का पांचवां और आखिरी दिन देर तक चली सियासी बहस के नाम रहा। कांग्रेस की ओर से विष्णुदेव साय सरकार के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव करीब 14 घंटे 30 मिनट की चर्चा के बाद ध्वनिमत से खारिज हो गया। सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों ने सरकार के कामकाज, किसानों, कानून-व्यवस्था, धान खरीदी, खाद की उपलब्धता, आदिवासी क्षेत्रों और सरकारी योजनाओं समेत कई मुद्दों पर अपनी बात रखी। चर्चा के आखिर में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने अविश्वास प्रस्ताव को सरकार के बजाय प्रदेश की जनता के जनादेश के खिलाफ बताते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के लोगों ने भाजपा को सरकार चलाने का स्पष्ट जनादेश दिया है। मुख्यमंत्री ने अगले विधानसभा चुनाव को लेकर भी बड़ा दावा किया और कहा कि भाजपा दोबारा सरकार बनाएगी तथा इस बार पार्टी 70 से अधिक सीटें हासिल करेगी। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष लंबे समय तक सत्ता में वापसी नहीं कर पाएगा।
अविश्वास प्रस्ताव पर जवाब देते हुए मुख्यमंत्री साय ने पिछली कांग्रेस सरकार के पांच साल के कार्यकाल को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कांग्रेस पर चुनावी वादों को पूरा नहीं करने, भ्रष्टाचार और विभिन्न कथित घोटालों को लेकर सवाल उठाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक आदिवासी किसान परिवार से आने वाले व्यक्ति का मुख्यमंत्री बनना प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण बदलाव है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस इसे स्वीकार नहीं कर पा रही है। साय ने पूर्ववर्ती सरकार पर छत्तीसगढ़ को कथित तौर पर दिल्ली का 'एटीएम' बनाने का आरोप लगाया और कहा कि मौजूदा सरकार जनता से किए वादों को पूरा करने की दिशा में लगातार काम कर रही है। विधानसभा में सत्ता पक्ष के सदस्यों ने सरकार की योजनाओं और अब तक लिए गए फैसलों का उल्लेख करते हुए विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक बताया। बहस के दौरान कई बार सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने चर्चा में सरकार को कई मोर्चों पर घेरा। उन्होंने किसानों की स्थिति और खाद की उपलब्धता को प्रमुख मुद्दा बनाते हुए आरोप लगाया कि प्रदेश के कई हिस्सों में किसानों को समय पर खाद नहीं मिल रही है। बघेल ने धान खरीदी की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए और कहा कि सरकार के दावों और जमीन पर दिखाई दे रही स्थिति में अंतर है। उन्होंने महतारी वंदन योजना, राशन व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं और आदिवासी क्षेत्रों से जुड़े विषयों को उठाकर सरकार से जवाब मांगा। कानून-व्यवस्था को लेकर भी पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार पर हमला बोला। उनका आरोप था कि प्रदेश में अपराध की घटनाओं ने आम लोगों की चिंता बढ़ाई है और सरकार व्यवस्था संभालने में अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर पाई है। सत्ता पक्ष ने इन आरोपों को खारिज करते हुए पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल का रिकॉर्ड सामने रखा।
भूपेश बघेल ने तमनार और हसदेव क्षेत्र से जुड़े मामलों को भी विधानसभा में उठाया। आदिवासी क्षेत्रों में जमीन, जंगल और स्थानीय लोगों के अधिकारों को लेकर उन्होंने सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए। पेसा कानून के क्रियान्वयन को लेकर भी उन्होंने सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। नकली खाद के कथित मामलों का जिक्र करते हुए बघेल ने कहा कि किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और सरकार को इस पर जवाब देना चाहिए। महादेव ऐप से जुड़े मामले पर भी सदन में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप हुए। पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार के कई फैसलों के पीछे कोई 'अदृश्य शक्ति' काम कर रही है। उनके इस बयान के बाद सत्ता पक्ष की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई और सदन में काफी देर तक बहस होती रही।
मानसून सत्र के अंतिम दिन चली यह चर्चा सामान्य विधानसभा कार्यवाही से काफी लंबी रही। करीब साढ़े 14 घंटे तक अविश्वास प्रस्ताव पर पक्ष और विपक्ष के सदस्यों ने अलग-अलग मुद्दे उठाए। कांग्रेस विधायकों ने सरकार के कार्यकाल से जुड़े सवाल सामने रखे तो भाजपा विधायकों ने पिछली सरकार के पांच साल के कामकाज को लेकर पलटवार किया। किसानों से जुड़े मुद्दे बहस के केंद्र में रहे। खाद की उपलब्धता, धान खरीदी और कृषि से जुड़ी व्यवस्थाओं पर दोनों पक्षों ने अपने-अपने आंकड़े और दावे सदन में रखे। आदिवासी क्षेत्रों में विकास, वन अधिकार और स्थानीय मुद्दों पर भी लंबी चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने जवाब में सरकार की योजनाओं और चुनावी वादों के क्रियान्वयन का जिक्र करते हुए कांग्रेस के अविश्वास प्रस्ताव को आधारहीन बताया। उन्होंने कहा कि सरकार को प्रदेश के करीब तीन करोड़ लोगों का जनादेश मिला है और सरकार उसी भरोसे के आधार पर काम कर रही है। उन्होंने विधानसभा में अगले चुनाव का जिक्र करते हुए 70 से अधिक सीटों का लक्ष्य सामने रखा। साथ ही कांग्रेस को लेकर दावा किया कि आने वाले 25 वर्षों तक उसकी सत्ता में वापसी नहीं होगी। मुख्यमंत्री के संबोधन के दौरान विपक्ष की ओर से कई बार सवाल और टिप्पणियां आईं, जिनका सत्ता पक्ष ने जवाब दिया।
कांग्रेस ने अविश्वास प्रस्ताव के जरिए स्वास्थ्य सेवाओं, राशन वितरण, महिला योजनाओं और प्रदेश की आर्थिक स्थिति को लेकर भी सरकार को घेरने की कोशिश की। विपक्ष का कहना था कि कई सरकारी योजनाओं का लाभ जमीन पर सभी पात्र लोगों तक नहीं पहुंच रहा है। दूसरी तरफ सरकार ने इन आरोपों को नकारते हुए कहा कि योजनाओं का क्रियान्वयन लगातार किया जा रहा है और पिछली सरकार की तुलना में व्यवस्था में सुधार हुआ है। देर रात तक चली बहस के बाद अविश्वास प्रस्ताव को निर्णय के लिए रखा गया, जहां वह ध्वनिमत से खारिज हो गया।
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रायपुर (छ.ग.)
रायपुर में छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र का पांचवां और आखिरी दिन देर तक चली सियासी बहस के नाम रहा। कांग्रेस की ओर से विष्णुदेव साय सरकार के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव करीब 14 घंटे 30 मिनट की चर्चा के बाद ध्वनिमत से खारिज हो गया। सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों ने सरकार के कामकाज, किसानों, कानून-व्यवस्था, धान खरीदी, खाद की उपलब्धता, आदिवासी क्षेत्रों और सरकारी योजनाओं समेत कई मुद्दों पर अपनी बात रखी। चर्चा के आखिर में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने अविश्वास प्रस्ताव को सरकार के बजाय प्रदेश की जनता के जनादेश के खिलाफ बताते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के लोगों ने भाजपा को सरकार चलाने का स्पष्ट जनादेश दिया है। मुख्यमंत्री ने अगले विधानसभा चुनाव को लेकर भी बड़ा दावा किया और कहा कि भाजपा दोबारा सरकार बनाएगी तथा इस बार पार्टी 70 से अधिक सीटें हासिल करेगी। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष लंबे समय तक सत्ता में वापसी नहीं कर पाएगा।
अविश्वास प्रस्ताव पर जवाब देते हुए मुख्यमंत्री साय ने पिछली कांग्रेस सरकार के पांच साल के कार्यकाल को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कांग्रेस पर चुनावी वादों को पूरा नहीं करने, भ्रष्टाचार और विभिन्न कथित घोटालों को लेकर सवाल उठाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक आदिवासी किसान परिवार से आने वाले व्यक्ति का मुख्यमंत्री बनना प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण बदलाव है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस इसे स्वीकार नहीं कर पा रही है। साय ने पूर्ववर्ती सरकार पर छत्तीसगढ़ को कथित तौर पर दिल्ली का 'एटीएम' बनाने का आरोप लगाया और कहा कि मौजूदा सरकार जनता से किए वादों को पूरा करने की दिशा में लगातार काम कर रही है। विधानसभा में सत्ता पक्ष के सदस्यों ने सरकार की योजनाओं और अब तक लिए गए फैसलों का उल्लेख करते हुए विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक बताया। बहस के दौरान कई बार सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने चर्चा में सरकार को कई मोर्चों पर घेरा। उन्होंने किसानों की स्थिति और खाद की उपलब्धता को प्रमुख मुद्दा बनाते हुए आरोप लगाया कि प्रदेश के कई हिस्सों में किसानों को समय पर खाद नहीं मिल रही है। बघेल ने धान खरीदी की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए और कहा कि सरकार के दावों और जमीन पर दिखाई दे रही स्थिति में अंतर है। उन्होंने महतारी वंदन योजना, राशन व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं और आदिवासी क्षेत्रों से जुड़े विषयों को उठाकर सरकार से जवाब मांगा। कानून-व्यवस्था को लेकर भी पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार पर हमला बोला। उनका आरोप था कि प्रदेश में अपराध की घटनाओं ने आम लोगों की चिंता बढ़ाई है और सरकार व्यवस्था संभालने में अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर पाई है। सत्ता पक्ष ने इन आरोपों को खारिज करते हुए पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल का रिकॉर्ड सामने रखा।
भूपेश बघेल ने तमनार और हसदेव क्षेत्र से जुड़े मामलों को भी विधानसभा में उठाया। आदिवासी क्षेत्रों में जमीन, जंगल और स्थानीय लोगों के अधिकारों को लेकर उन्होंने सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए। पेसा कानून के क्रियान्वयन को लेकर भी उन्होंने सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। नकली खाद के कथित मामलों का जिक्र करते हुए बघेल ने कहा कि किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और सरकार को इस पर जवाब देना चाहिए। महादेव ऐप से जुड़े मामले पर भी सदन में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप हुए। पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार के कई फैसलों के पीछे कोई 'अदृश्य शक्ति' काम कर रही है। उनके इस बयान के बाद सत्ता पक्ष की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई और सदन में काफी देर तक बहस होती रही।
मानसून सत्र के अंतिम दिन चली यह चर्चा सामान्य विधानसभा कार्यवाही से काफी लंबी रही। करीब साढ़े 14 घंटे तक अविश्वास प्रस्ताव पर पक्ष और विपक्ष के सदस्यों ने अलग-अलग मुद्दे उठाए। कांग्रेस विधायकों ने सरकार के कार्यकाल से जुड़े सवाल सामने रखे तो भाजपा विधायकों ने पिछली सरकार के पांच साल के कामकाज को लेकर पलटवार किया। किसानों से जुड़े मुद्दे बहस के केंद्र में रहे। खाद की उपलब्धता, धान खरीदी और कृषि से जुड़ी व्यवस्थाओं पर दोनों पक्षों ने अपने-अपने आंकड़े और दावे सदन में रखे। आदिवासी क्षेत्रों में विकास, वन अधिकार और स्थानीय मुद्दों पर भी लंबी चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने जवाब में सरकार की योजनाओं और चुनावी वादों के क्रियान्वयन का जिक्र करते हुए कांग्रेस के अविश्वास प्रस्ताव को आधारहीन बताया। उन्होंने कहा कि सरकार को प्रदेश के करीब तीन करोड़ लोगों का जनादेश मिला है और सरकार उसी भरोसे के आधार पर काम कर रही है। उन्होंने विधानसभा में अगले चुनाव का जिक्र करते हुए 70 से अधिक सीटों का लक्ष्य सामने रखा। साथ ही कांग्रेस को लेकर दावा किया कि आने वाले 25 वर्षों तक उसकी सत्ता में वापसी नहीं होगी। मुख्यमंत्री के संबोधन के दौरान विपक्ष की ओर से कई बार सवाल और टिप्पणियां आईं, जिनका सत्ता पक्ष ने जवाब दिया।
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