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स्कूटी पर सवार होकर निरीक्षण पर निकले डिप्टी CM, आम लोगों से सीधे संवाद ने खींचा ध्यान
लोरमी (छत्तीसगढ़)।
आमतौर पर बड़े नेताओं के दौरे भारी सुरक्षा और लंबे काफिले के बीच होते हैं, लेकिन Arun Sao ने इस परंपरा से हटकर एक अलग ही उदाहरण पेश किया। शनिवार को उनका एक सादा और अलग अंदाज देखने को मिला, जब वे विकास कार्यों का जायजा लेने स्कूटी पर निकल पड़े।
बिना किसी औपचारिक तामझाम के, उन्होंने खुद स्कूटी चलाते हुए इलाके की सड़कों और गलियों का निरीक्षण किया। इस दौरान न तो सायरन बजती गाड़ियों का काफिला था और न ही प्रोटोकॉल का दबाव—बस एक जनप्रतिनिधि सीधे लोगों के बीच नजर आया।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने रास्ते में मिलने वाले लोगों से बातचीत की। बुजुर्गों से हालचाल जाना और युवाओं से क्षेत्र में चल रहे कामों को लेकर राय ली। स्थानीय लोगों ने भी इस सहज अंदाज को सराहा और खुलकर अपनी बात रखी।
इस मौके पर डिप्टी सीएम ने संबंधित अधिकारियों को निर्माण कार्यों को तय समयसीमा में पूरा करने और गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए। उनका यह दौरा अचानक था, जिससे कई जगहों पर व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति सामने आई।
राजनीति में जहां अक्सर दूरी की शिकायत होती है, वहीं यह पहल लोगों के बीच जुड़ाव बढ़ाने की एक कोशिश के तौर पर देखी जा रही है।
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स्कूटी पर सवार होकर निरीक्षण पर निकले डिप्टी CM, आम लोगों से सीधे संवाद ने खींचा ध्यान
लोरमी (छत्तीसगढ़)।
आमतौर पर बड़े नेताओं के दौरे भारी सुरक्षा और लंबे काफिले के बीच होते हैं, लेकिन Arun Sao ने इस परंपरा से हटकर एक अलग ही उदाहरण पेश किया। शनिवार को उनका एक सादा और अलग अंदाज देखने को मिला, जब वे विकास कार्यों का जायजा लेने स्कूटी पर निकल पड़े।
बिना किसी औपचारिक तामझाम के, उन्होंने खुद स्कूटी चलाते हुए इलाके की सड़कों और गलियों का निरीक्षण किया। इस दौरान न तो सायरन बजती गाड़ियों का काफिला था और न ही प्रोटोकॉल का दबाव—बस एक जनप्रतिनिधि सीधे लोगों के बीच नजर आया।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने रास्ते में मिलने वाले लोगों से बातचीत की। बुजुर्गों से हालचाल जाना और युवाओं से क्षेत्र में चल रहे कामों को लेकर राय ली। स्थानीय लोगों ने भी इस सहज अंदाज को सराहा और खुलकर अपनी बात रखी।
इस मौके पर डिप्टी सीएम ने संबंधित अधिकारियों को निर्माण कार्यों को तय समयसीमा में पूरा करने और गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए। उनका यह दौरा अचानक था, जिससे कई जगहों पर व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति सामने आई।
राजनीति में जहां अक्सर दूरी की शिकायत होती है, वहीं यह पहल लोगों के बीच जुड़ाव बढ़ाने की एक कोशिश के तौर पर देखी जा रही है।
