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MP के 61 युवाओं ने UPSC में मारी बाजी, CM मोहन यादव ने किया सम्मान, बोले - हमें हर 5 साल में देनी पड़ती है परीक्षा
मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश में 61 यूपीएससी चयनित युवाओं का सम्मान समारोह आयोजित हुआ, जहां सीएम मोहन यादव ने.....
मध्य प्रदेश में सिविल सेवा परीक्षा (UPSC) में सफलता पाने वाले युवाओं का सम्मान एक प्रेरणादायक माहौल में किया गया। राजधानी में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री Mohan Yadav की मौजूदगी ने समारोह को खास बना दिया। कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में हुए इस आयोजन में 61 चयनित अभ्यर्थियों को सम्मानित किया गया, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के बावजूद Union Public Service Commission (UPSC) की परीक्षा में सफलता हासिल की।
सम्मान समारोह का उद्देश्य केवल उपलब्धि का जश्न मनाना नहीं था, बल्कि युवाओं को प्रेरित करना भी था कि वे अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहें और समाज के लिए काम करें।
संघर्ष से सफलता तक का सफर
इन 61 अभ्यर्थियों की कहानी संघर्ष और आत्मविश्वास की मिसाल है। खास बात यह रही कि इनमें 20 बेटियां शामिल हैं, जिन्होंने समाज में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को दर्शाया। इसके अलावा 22 अभ्यर्थी ऐसे हैं, जिन्होंने महंगे निजी संस्थानों की बजाय सरकारी कॉलेजों से पढ़ाई कर यह साबित किया कि सफलता के लिए संसाधन नहीं, बल्कि दृढ़ इच्छाशक्ति जरूरी होती है।
यह पहल वर्ष 2020 में शुरू हुई थी, जब चयनित छात्रों की संख्या 37 थी। अब यह आंकड़ा बढ़कर 61 हो गया है, जो प्रदेश में शिक्षा के स्तर और युवाओं की मेहनत का प्रमाण है।
सीएम का संदेश: लोकतंत्र में हर पांच साल की परीक्षा
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में लोकतंत्र की खूबसूरती को सरल शब्दों में समझाया। उन्होंने कहा कि जहां प्रशासनिक अधिकारियों का चयन एक बार की परीक्षा से स्थायी हो जाता है, वहीं जनप्रतिनिधियों को हर पांच साल में जनता के बीच जाकर अपनी नीतियों का हिसाब देना पड़ता है।
उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र ही वह व्यवस्था है, जहां एक साधारण पृष्ठभूमि से आने वाला व्यक्ति देश के सर्वोच्च पद तक पहुंच सकता है। यह संदेश युवाओं को अपनी जड़ों से जुड़े रहने और जिम्मेदारी के साथ काम करने के लिए प्रेरित करता है।
नई पीढ़ी से पांच प्रमुख अपेक्षाएं
मुख्यमंत्री ने नवचयनित अधिकारियों को अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहने की सलाह दी। उन्होंने समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने, नवाचार को बढ़ावा देने, ईमानदारी और पारदर्शिता बनाए रखने तथा राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने पर जोर दिया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि असली परीक्षा पद मिलने के बाद शुरू होती है, जब अधिकारी को जमीन पर काम करके लोगों का विश्वास जीतना होता है।
2047 के भारत का सपना
अपने भाषण में मुख्यमंत्री ने युवाओं को भविष्य की जिम्मेदारी का एहसास कराते हुए कहा कि वे उस पीढ़ी का हिस्सा हैं, जो 2047 में भारत को विकसित राष्ट्र के रूप में देखेगी। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे इस लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए काम करें और देश को नई ऊंचाइयों तक ले जाएं।
इतिहास से सीख, भविष्य की दिशा
मुख्यमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि जो अपने इतिहास को समझता है, वही भविष्य का निर्माण कर सकता है। उन्होंने Subhas Chandra Bose और Bhagat Singh जैसे महान स्वतंत्रता सेनानियों का उदाहरण देते हुए कहा कि आज देश को बलिदान नहीं, बल्कि समर्पण और सेवा की जरूरत है।
उन्होंने यह भी बताया कि आज के युवा तकनीकी पृष्ठभूमि के बावजूद इतिहास और साहित्य जैसे विषयों को अपनाकर सफलता प्राप्त कर रहे हैं, जो एक सकारात्मक संकेत है।
टूटते मिथक और बदलती सोच
कार्यक्रम में यह बात भी सामने आई कि अब सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए दिल्ली जाना अनिवार्य नहीं रह गया है। छोटे जिलों और ग्रामीण क्षेत्रों के युवा भी अपनी मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर सफलता हासिल कर रहे हैं।
यह बदलाव दर्शाता है कि प्रतिभा किसी विशेष स्थान या संसाधन की मोहताज नहीं होती, बल्कि सही दिशा और निरंतर प्रयास से हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
समापन में संदेश
यह सम्मान समारोह केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जो अपने सपनों को साकार करने की राह पर हैं। यह साबित करता है कि मेहनत, लगन और सही मार्गदर्शन के साथ कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है।
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MP के 61 युवाओं ने UPSC में मारी बाजी, CM मोहन यादव ने किया सम्मान, बोले - हमें हर 5 साल में देनी पड़ती है परीक्षा
मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश में सिविल सेवा परीक्षा (UPSC) में सफलता पाने वाले युवाओं का सम्मान एक प्रेरणादायक माहौल में किया गया। राजधानी में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री Mohan Yadav की मौजूदगी ने समारोह को खास बना दिया। कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में हुए इस आयोजन में 61 चयनित अभ्यर्थियों को सम्मानित किया गया, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के बावजूद Union Public Service Commission (UPSC) की परीक्षा में सफलता हासिल की।
सम्मान समारोह का उद्देश्य केवल उपलब्धि का जश्न मनाना नहीं था, बल्कि युवाओं को प्रेरित करना भी था कि वे अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहें और समाज के लिए काम करें।
संघर्ष से सफलता तक का सफर
इन 61 अभ्यर्थियों की कहानी संघर्ष और आत्मविश्वास की मिसाल है। खास बात यह रही कि इनमें 20 बेटियां शामिल हैं, जिन्होंने समाज में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को दर्शाया। इसके अलावा 22 अभ्यर्थी ऐसे हैं, जिन्होंने महंगे निजी संस्थानों की बजाय सरकारी कॉलेजों से पढ़ाई कर यह साबित किया कि सफलता के लिए संसाधन नहीं, बल्कि दृढ़ इच्छाशक्ति जरूरी होती है।
यह पहल वर्ष 2020 में शुरू हुई थी, जब चयनित छात्रों की संख्या 37 थी। अब यह आंकड़ा बढ़कर 61 हो गया है, जो प्रदेश में शिक्षा के स्तर और युवाओं की मेहनत का प्रमाण है।
सीएम का संदेश: लोकतंत्र में हर पांच साल की परीक्षा
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में लोकतंत्र की खूबसूरती को सरल शब्दों में समझाया। उन्होंने कहा कि जहां प्रशासनिक अधिकारियों का चयन एक बार की परीक्षा से स्थायी हो जाता है, वहीं जनप्रतिनिधियों को हर पांच साल में जनता के बीच जाकर अपनी नीतियों का हिसाब देना पड़ता है।
उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र ही वह व्यवस्था है, जहां एक साधारण पृष्ठभूमि से आने वाला व्यक्ति देश के सर्वोच्च पद तक पहुंच सकता है। यह संदेश युवाओं को अपनी जड़ों से जुड़े रहने और जिम्मेदारी के साथ काम करने के लिए प्रेरित करता है।
नई पीढ़ी से पांच प्रमुख अपेक्षाएं
मुख्यमंत्री ने नवचयनित अधिकारियों को अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहने की सलाह दी। उन्होंने समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने, नवाचार को बढ़ावा देने, ईमानदारी और पारदर्शिता बनाए रखने तथा राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने पर जोर दिया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि असली परीक्षा पद मिलने के बाद शुरू होती है, जब अधिकारी को जमीन पर काम करके लोगों का विश्वास जीतना होता है।
2047 के भारत का सपना
अपने भाषण में मुख्यमंत्री ने युवाओं को भविष्य की जिम्मेदारी का एहसास कराते हुए कहा कि वे उस पीढ़ी का हिस्सा हैं, जो 2047 में भारत को विकसित राष्ट्र के रूप में देखेगी। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे इस लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए काम करें और देश को नई ऊंचाइयों तक ले जाएं।
इतिहास से सीख, भविष्य की दिशा
मुख्यमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि जो अपने इतिहास को समझता है, वही भविष्य का निर्माण कर सकता है। उन्होंने Subhas Chandra Bose और Bhagat Singh जैसे महान स्वतंत्रता सेनानियों का उदाहरण देते हुए कहा कि आज देश को बलिदान नहीं, बल्कि समर्पण और सेवा की जरूरत है।
उन्होंने यह भी बताया कि आज के युवा तकनीकी पृष्ठभूमि के बावजूद इतिहास और साहित्य जैसे विषयों को अपनाकर सफलता प्राप्त कर रहे हैं, जो एक सकारात्मक संकेत है।
टूटते मिथक और बदलती सोच
कार्यक्रम में यह बात भी सामने आई कि अब सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए दिल्ली जाना अनिवार्य नहीं रह गया है। छोटे जिलों और ग्रामीण क्षेत्रों के युवा भी अपनी मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर सफलता हासिल कर रहे हैं।
यह बदलाव दर्शाता है कि प्रतिभा किसी विशेष स्थान या संसाधन की मोहताज नहीं होती, बल्कि सही दिशा और निरंतर प्रयास से हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
समापन में संदेश
यह सम्मान समारोह केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जो अपने सपनों को साकार करने की राह पर हैं। यह साबित करता है कि मेहनत, लगन और सही मार्गदर्शन के साथ कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है।
