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इंदौर में गंदे पानी से मौतों पर कांग्रेस का सड़क पर विरोध, भागीरथपुरा से राजवाड़ा तक निकली न्याय यात्रा
इंदौर (म.प्र.)
भागीरथपुरा में दूषित पानी से 21 लोगों की मौत के बाद कांग्रेस ने सरकार पर आंकड़े छिपाने का आरोप लगाया, पीड़ित परिवारों को 1 करोड़ मुआवजे की मांग
भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी की आपूर्ति से 21 लोगों की मौत के मामले ने रविवार को राजनीतिक और सामाजिक रूप से तूल पकड़ लिया। इस घटना के विरोध में कांग्रेस ने इंदौर में “न्याय यात्रा” निकालकर सरकार और नगर निगम के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। यह यात्रा बड़ा गणपति चौराहा से शुरू होकर राजवाड़ा तक निकाली गई, जिसमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, स्थानीय पदाधिकारी, महिला कांग्रेस कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में नागरिक शामिल हुए।
यह प्रदर्शन ऐसे समय हुआ है जब भागीरथपुरा और आसपास के इलाकों में अब भी कई लोग अस्पतालों में इलाजरत हैं। कांग्रेस का आरोप है कि दूषित पानी की सप्लाई के बावजूद प्रशासन ने समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया, जिससे जानलेवा स्थिति बनी। यात्रा के दौरान प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां लेकर स्वच्छ पेयजल और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि कांग्रेस इंदौर की जनता के साथ खड़ी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस घटना में मौतों की वास्तविक संख्या छिपाने का प्रयास कर रही है। सिंघार ने कहा कि इंदौर जैसे शहर में लोगों को साफ पानी, सुरक्षित सड़कें और स्वच्छ बोरिंग जल मिलना चाहिए, यह कोई एहसान नहीं बल्कि नागरिकों का अधिकार है। उन्होंने दावा किया कि आज भी शहर के कई इलाकों में गंदा पानी सप्लाई किया जा रहा है, लेकिन प्रशासन इस पर चुप्पी साधे हुए है।
कांग्रेस नेताओं ने इस मामले को गंभीर आपराधिक लापरवाही करार देते हुए जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने की मांग की। उनका कहना है कि यदि समय पर पानी की गुणवत्ता की जांच और आपूर्ति रोकी जाती, तो कई जानें बचाई जा सकती थीं।
शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने कहा कि यह केवल कांग्रेस की राजनीतिक यात्रा नहीं है, बल्कि उन सभी लोगों की आवाज है जो भागीरथपुरा की त्रासदी से आहत हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी की प्रमुख मांग है कि प्रत्येक पीड़ित परिवार को एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए, ताकि वे इस अपूरणीय क्षति से उबर सकें।
इस दौरान महिला कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने महापौर और राज्य की भाजपा सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने नगर निगम पर लापरवाही और जनस्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ का आरोप लगाया। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि मांगें नहीं मानी गईं, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
भागीरथपुरा की यह घटना न सिर्फ इंदौर बल्कि पूरे प्रदेश में पेयजल व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है। आने वाले दिनों में प्रशासन की जांच रिपोर्ट और सरकार की प्रतिक्रिया इस मामले की दिशा तय करेगी।
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