- Hindi News
- राज्य
- मध्य प्रदेश
- भागीरथपुरा त्रासदी के बाद ज़मीन से लेकर अदालत तक हलचल, 23 मौतों ने बदला प्रशासन का रुख
भागीरथपुरा त्रासदी के बाद ज़मीन से लेकर अदालत तक हलचल, 23 मौतों ने बदला प्रशासन का रुख
इंदौर (म.प्र.)
दूषित पानी से जान गंवाने के बाद इलाके में युद्धस्तर पर पाइपलाइन और ड्रेनेज सुधार, आज हाईकोर्ट में मामले की अहम सुनवाई
इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से हुई 23 मौतों के बाद प्रशासनिक और न्यायिक दोनों स्तरों पर हलचल तेज हो गई है। जिस इलाके में कुछ दिन पहले मातम पसरा था, वहां अब हर ओर खुदाई, पाइपलाइन और ड्रेनेज सुधार का काम चल रहा है। प्रशासन नर्मदा जल आपूर्ति और सीवरेज व्यवस्था को अलग-अलग करने में जुटा है, ताकि भविष्य में इस तरह की त्रासदी दोबारा न हो। इसी बीच, गुरुवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में इस मामले से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई होनी है।
भागीरथपुरा की सड़कों पर इस समय हालात आसान नहीं हैं। पुलिस चौकी के सामने की सड़क से लेकर अंदरूनी गलियों तक जेसीबी मशीनें लगी हैं। कई जगह सड़कें खोदी जा चुकी हैं, तो कहीं पाइप डालने के बाद भराव का काम अधूरा पड़ा है। कीचड़ और उबड़-खाबड़ रास्तों के कारण लोगों को वैकल्पिक गलियों से आवाजाही करनी पड़ रही है। दोपहिया वाहन चालकों और बुजुर्गों को खास परेशानी हो रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि असुविधा जरूर है, लेकिन अगर यह काम पहले हुआ होता तो शायद इतने लोगों की जान नहीं जाती। निवासियों का आरोप है कि वर्षों से इलाके की पेयजल लाइन और ड्रेनेज प्रणाली जर्जर हालत में थी, जिसकी शिकायतें की जाती रहीं, लेकिन समय रहते समाधान नहीं हुआ।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े इस हादसे की गंभीरता को साफ दिखाते हैं। अब तक कुल 440 लोग दूषित पानी से बीमार होकर अस्पताल पहुंचे थे। इनमें से 413 को उपचार के बाद छुट्टी दी जा चुकी है। फिलहाल 27 मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं। इनमें 8 मरीज आईसीयू में हैं, जबकि 3 की हालत गंभीर बनी हुई है और वे वेंटिलेटर पर हैं। विभाग की ओर से इलाके में स्वास्थ्य शिविर भी लगाए जा रहे हैं, ताकि नए मामलों पर नजर रखी जा सके।
न्यायिक मोर्चे पर भी मामला गंभीर रूप ले चुका है। हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में दूषित पेयजल से जुड़ी पांच याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई प्रस्तावित है। पिछली सुनवाई में अदालत ने प्रशासन के रवैये पर कड़ी टिप्पणी की थी और कहा था कि स्वच्छ पेयजल नागरिकों का मौलिक अधिकार है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि यदि लापरवाही साबित होती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय की जा सकती है।
-------------------------
हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनल: https://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुक: Dainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम: @dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूब: Dainik Jagran MPCG Digital
📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए!
