थोक महंगाई में तेज उछाल, दिसंबर में 0.83% पर पहुंची; आठ महीने का उच्चतम स्तर

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खाने-पीने की वस्तुओं और रोजमर्रा के सामान महंगे होने से बढ़ा दबाव, नवंबर में थोक महंगाई माइनस में थी

देश में थोक महंगाई दर (WPI) दिसंबर में तेजी से बढ़कर 0.83% पर पहुंच गई है। यह बीते आठ महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है। इससे पहले नवंबर में थोक महंगाई दर माइनस 0.32% दर्ज की गई थी, जबकि अक्टूबर में यह माइनस 1.21% तक गिर गई थी। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय (कॉमर्स मिनिस्ट्री) ने मंगलवार को दिसंबर के थोक मूल्य सूचकांक के आंकड़े जारी किए।

आंकड़ों के मुताबिक, महंगाई में यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से खाने-पीने की चीजों और रोजमर्रा के उपयोग वाले सामानों के दाम बढ़ने की वजह से हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि थोक स्तर पर कीमतों में यह उछाल आने वाले महीनों में खुदरा महंगाई पर भी असर डाल सकता है।

रोजमर्रा की वस्तुएं हुईं महंगी
दिसंबर में प्राइमरी आर्टिकल्स यानी रोजाना इस्तेमाल की वस्तुओं की थोक महंगाई दर माइनस 2.93% से बढ़कर 0.21% हो गई। इसी तरह, फूड इंडेक्स, जिसमें अनाज, सब्जियां और अन्य खाद्य वस्तुएं शामिल हैं, उसकी महंगाई माइनस 2.60% से बढ़कर शून्य प्रतिशत पर पहुंच गई।

हालांकि, फ्यूल और पावर से जुड़े उत्पादों में राहत बनी हुई है। इस श्रेणी में थोक महंगाई दर माइनस 2.27% से हल्की गिरावट के साथ माइनस 2.31% दर्ज की गई। वहीं मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की महंगाई दर 1.33% से बढ़कर 1.82% हो गई, जो उद्योग क्षेत्र में लागत बढ़ने का संकेत देती है।

थोक महंगाई के तीन प्रमुख घटक
थोक मूल्य सूचकांक तीन बड़े हिस्सों में बंटा होता है। प्राइमरी आर्टिकल्स का इसमें 22.62% वेटेज है, फ्यूल और पावर का 13.15%, जबकि मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स का सबसे अधिक 64.23% वेटेज होता है। प्राइमरी आर्टिकल्स के अंतर्गत खाद्य वस्तुएं, नॉन-फूड आइटम्स, मिनरल्स और कच्चा पेट्रोलियम शामिल होते हैं।

खुदरा महंगाई भी चढ़ी
थोक महंगाई के साथ-साथ खुदरा महंगाई दर (CPI) में भी दिसंबर में बढ़ोतरी दर्ज की गई। दिसंबर में रिटेल महंगाई 1.33% पर पहुंच गई, जो तीन महीनों का उच्चतम स्तर है। नवंबर में यह 0.71% और अक्टूबर में 0.25% थी, जो 14 साल का न्यूनतम स्तर माना गया था।

आम आदमी पर क्या असर
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर थोक महंगाई लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती है, तो इसका असर धीरे-धीरे उपभोक्ताओं तक पहुंचता है। थोक स्तर पर बढ़ी लागत को निर्माता और कारोबारी अंततः खुदरा कीमतों में जोड़ देते हैं। सरकार के पास WPI को नियंत्रित करने के सीमित उपाय होते हैं, जिनमें टैक्स में बदलाव प्रमुख है।

महंगाई कैसे मापी जाती है
भारत में महंगाई दो स्तरों पर मापी जाती है—थोक और खुदरा। खुदरा महंगाई आम उपभोक्ताओं द्वारा चुकाई जाने वाली कीमतों पर आधारित होती है, जबकि थोक महंगाई व्यापारियों के बीच लेनदेन की कीमतों को दर्शाती है। दोनों सूचकांक अर्थव्यवस्था की सेहत को समझने में अहम भूमिका निभाते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में खाद्य वस्तुओं और औद्योगिक इनपुट की कीमतों पर नजर रखना जरूरी होगा, क्योंकि यही महंगाई की दिशा तय करेंगे।

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