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ईरान ने अमेरिकी दबाव के बाद प्रदर्शनकारियों की फांसी रद्द की, ट्रम्प बोले हिंसा रुकी
अंतराष्ट्रीय न्यूज
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच फास्ट ट्रायल में फांसी टली; भारत समेत कई देशों ने नागरिकों को सुरक्षा सलाह जारी की
अमेरिका की सख्त चेतावनी और बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच ईरान सरकार ने प्रदर्शनकारियों को फांसी देने की योजना से पीछे हटने का संकेत दिया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने बुधवार को सार्वजनिक रूप से कहा कि देश में किसी भी प्रदर्शनकारी को फांसी देने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है। उनके इस बयान को ईरान के हालिया रुख में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी दावा किया कि ईरान में विरोध प्रदर्शनों के दौरान हो रही हत्याएं फिलहाल रुक गई हैं। ट्रम्प ने यह टिप्पणी ऐसे समय में की जब ईरान में सरकार विरोधी आंदोलन लगातार तेज हो रहे हैं और वैश्विक स्तर पर तेहरान की आलोचना बढ़ रही है।
क्या था विवाद
बीते सप्ताह ईरान की न्याय व्यवस्था ने संकेत दिए थे कि हालिया प्रदर्शनों में गिरफ्तार किए गए लोगों पर त्वरित सुनवाई कर उन्हें मौत की सजा दी जा सकती है। इसी क्रम में एक युवा प्रदर्शनकारी को फांसी देने की प्रक्रिया शुरू होने की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चिंतित कर दिया था। अमेरिका ने इसे मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया की चेतावनी दी थी।
अमेरिका-ईरान तनाव और प्रतिक्रिया
ईरान और अमेरिका के बीच पहले से जारी तनाव इस मुद्दे के बाद और गहरा गया। तेहरान में कुछ समूहों द्वारा अमेरिकी विरोधी प्रदर्शन किए गए, वहीं अमेरिकी प्रशासन ने साफ कर दिया कि यदि प्रदर्शनकारियों पर दमन जारी रहा तो इसके परिणाम होंगे।
इसी बीच ईरान ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए सीमित समय के लिए अपने हवाई क्षेत्र में उड़ानों पर रोक लगा दी, जिससे कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस की सेवाएं प्रभावित हुईं।
भारत और अन्य देशों की एडवाइजरी
बदलते हालात को देखते हुए भारत सरकार ने ईरान में मौजूद अपने नागरिकों को सतर्क रहने और अनावश्यक आवाजाही से बचने की सलाह दी है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि नागरिक दूतावास के संपर्क में रहें और स्थानीय घटनाक्रम पर नजर बनाए रखें। भारत के अलावा यूरोप के कई देशों ने भी अपने नागरिकों के लिए समान चेतावनी जारी की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान का यह कदम अस्थायी दबाव प्रबंधन का हिस्सा हो सकता है। देश गंभीर आर्थिक संकट, महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रहा है, जबकि अंदरूनी असंतोष लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में सरकार पर अंतरराष्ट्रीय छवि सुधारने का दबाव है।
फिलहाल फांसी पर रोक की घोषणा से हालात कुछ शांत हुए हैं, लेकिन ईरान में राजनीतिक स्थिरता और मानवाधिकारों को लेकर सवाल बने हुए हैं। आने वाले दिनों में सरकार का अगला कदम स्थिति की दिशा तय करेगा।
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अमेरिका की सख्त चेतावनी और बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच ईरान सरकार ने प्रदर्शनकारियों को फांसी देने की योजना से पीछे हटने का संकेत दिया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने बुधवार को सार्वजनिक रूप से कहा कि देश में किसी भी प्रदर्शनकारी को फांसी देने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है। उनके इस बयान को ईरान के हालिया रुख में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी दावा किया कि ईरान में विरोध प्रदर्शनों के दौरान हो रही हत्याएं फिलहाल रुक गई हैं। ट्रम्प ने यह टिप्पणी ऐसे समय में की जब ईरान में सरकार विरोधी आंदोलन लगातार तेज हो रहे हैं और वैश्विक स्तर पर तेहरान की आलोचना बढ़ रही है।
क्या था विवाद
बीते सप्ताह ईरान की न्याय व्यवस्था ने संकेत दिए थे कि हालिया प्रदर्शनों में गिरफ्तार किए गए लोगों पर त्वरित सुनवाई कर उन्हें मौत की सजा दी जा सकती है। इसी क्रम में एक युवा प्रदर्शनकारी को फांसी देने की प्रक्रिया शुरू होने की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चिंतित कर दिया था। अमेरिका ने इसे मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया की चेतावनी दी थी।
अमेरिका-ईरान तनाव और प्रतिक्रिया
ईरान और अमेरिका के बीच पहले से जारी तनाव इस मुद्दे के बाद और गहरा गया। तेहरान में कुछ समूहों द्वारा अमेरिकी विरोधी प्रदर्शन किए गए, वहीं अमेरिकी प्रशासन ने साफ कर दिया कि यदि प्रदर्शनकारियों पर दमन जारी रहा तो इसके परिणाम होंगे।
इसी बीच ईरान ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए सीमित समय के लिए अपने हवाई क्षेत्र में उड़ानों पर रोक लगा दी, जिससे कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस की सेवाएं प्रभावित हुईं।
भारत और अन्य देशों की एडवाइजरी
बदलते हालात को देखते हुए भारत सरकार ने ईरान में मौजूद अपने नागरिकों को सतर्क रहने और अनावश्यक आवाजाही से बचने की सलाह दी है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि नागरिक दूतावास के संपर्क में रहें और स्थानीय घटनाक्रम पर नजर बनाए रखें। भारत के अलावा यूरोप के कई देशों ने भी अपने नागरिकों के लिए समान चेतावनी जारी की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान का यह कदम अस्थायी दबाव प्रबंधन का हिस्सा हो सकता है। देश गंभीर आर्थिक संकट, महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रहा है, जबकि अंदरूनी असंतोष लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में सरकार पर अंतरराष्ट्रीय छवि सुधारने का दबाव है।
फिलहाल फांसी पर रोक की घोषणा से हालात कुछ शांत हुए हैं, लेकिन ईरान में राजनीतिक स्थिरता और मानवाधिकारों को लेकर सवाल बने हुए हैं। आने वाले दिनों में सरकार का अगला कदम स्थिति की दिशा तय करेगा।
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