भारत और न्यूजीलैंड के बीच होने वाले अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मुकाबले से पहले जहां देशभर में उत्साह चरम पर है, वहीं इंदौर में एक परिवार के लिए यह समय जश्न का नहीं, बल्कि जिंदगी और मौत की जंग का है। इंदौर की दो साल की मासूम बच्ची अनिका शर्मा एक गंभीर आनुवांशिक बीमारी स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी (SMA) से पीड़ित है। उसकी जिंदगी बचाने के लिए करीब 9 करोड़ रुपये कीमत वाले एक विशेष इंजेक्शन की जरूरत है, जिसे दिल्ली स्थित एम्स अस्पताल में लगाया जाना प्रस्तावित है।
अनिका की उम्र अभी खेलने और बोलना सीखने की है, लेकिन बीमारी ने उसकी मांसपेशियों को कमजोर करना शुरू कर दिया है। डॉक्टरों के अनुसार, समय पर इलाज न मिलने पर यह बीमारी बच्चे की सांस लेने की क्षमता तक प्रभावित कर सकती है। यही कारण है कि अनिका के माता-पिता हर संभव मंच पर अपनी बेटी के लिए मदद की गुहार लगा रहे हैं।
भारत-न्यूजीलैंड मैच से पहले स्टेडियम और उसके आसपास मौजूद दर्शकों के बीच अनिका के माता-पिता हाथों में पोस्टर लेकर खड़े नजर आए। उनका संदेश सीधा था—क्रिकेट के रोमांच के बीच एक मासूम की जिंदगी बचाने में सहयोग करें। कोई 100 रुपये दे रहा था, कोई 500, तो कोई इससे अधिक। इन छोटी-छोटी मददों से अब तक करीब 4 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि जुटाई जा चुकी है।
अनिका के पिता का कहना है कि उनके लिए हर दिन की देरी खतरे से भरी है। उन्होंने बताया कि इंजेक्शन जितनी जल्दी लगाया जाएगा, उतनी ही बेहतर अनिका के सामान्य जीवन की संभावना बढ़ेगी। परिवार का आर्थिक आधार सीमित है, ऐसे में समाज की सहभागिता ही उनकी सबसे बड़ी उम्मीद बन गई है।
इस अभियान में समाजसेवी रंजीत इंदौरी भैया और उनकी टीम भी सक्रिय भूमिका निभा रही है। वे सोशल मीडिया, सार्वजनिक स्थानों और आयोजनों के माध्यम से लोगों तक अनिका की कहानी पहुंचा रहे हैं। उनका कहना है कि यह सिर्फ एक परिवार की मदद का मामला नहीं, बल्कि सामूहिक संवेदनशीलता की परीक्षा है।
चिकित्सा विशेषज्ञों के मुताबिक, SMA जैसी दुर्लभ बीमारी के इलाज में देरी अक्सर स्थायी नुकसान का कारण बनती है। सरकार और स्वास्थ्य संस्थानों द्वारा ऐसी बीमारियों के लिए सहायता तंत्र मौजूद है, लेकिन प्रक्रिया लंबी होने के कारण कई परिवारों को तत्काल जनसहयोग पर निर्भर रहना पड़ता है।
क्रिकेट मैच के शोर और उत्साह के बीच अनिका की यह कहानी एक पब्लिक इंटरेस्ट स्टोरी बनकर सामने आई है। यह याद दिलाती है कि खेल की जीत से बड़ी जीत किसी मासूम की जिंदगी बचाना है। अनिका आज भी उस इंजेक्शन का इंतजार कर रही है, जो उसे एक सामान्य बचपन की ओर लौटा सकता है।
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