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भागीरथपुरा पानी कांड पर हाईकोर्ट सख्त, आज रिपोर्ट पर होगी बड़ी सुनवाई
इंदौर (म.प्र.)
भागीरथपुरा दूषित पानी मामले में हाईकोर्ट सुनवाई, जांच रिपोर्ट और निगम की भूमिका पर अहम फैसला संभव।
इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल से जुड़ी गंभीर घटना पर आज 6 अप्रैल को हाईकोर्ट में सुनवाई होने जा रही है। यह मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है, क्योंकि इससे कई लोगों की जान जाने और स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका जताई गई है। पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जांच आयोग को 30 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे, जिसके बाद आज की सुनवाई को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जांच आयोग की रिपोर्ट पर टिकी नजरें
पिछली सुनवाई में जांच आयोग ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की थी। हालांकि कोर्ट ने इसे पर्याप्त नहीं मानते हुए विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी थी। आयोग को दिए गए समय की अवधि अब पूरी हो रही है, ऐसे में यह देखना अहम होगा कि रिपोर्ट में किन तथ्यों का खुलासा होता है और जिम्मेदारी किस पर तय होती है।
ओवरहेड टैंक में संदिग्ध रसायन डालने का दावा
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागड़िया ने एक अंतरिम आवेदन पेश कर कई नए तथ्य सामने रखे थे। उनके अनुसार, भागीरथपुरा के वार्ड 11 स्थित ओवरहेड टैंक में कथित रूप से पोटैशियम क्लोराइड की गोलियां डाली गई थीं। यह भी आरोप लगाया गया कि ये सामग्री अधिकृत प्रक्रिया से नहीं बल्कि एक निजी दुकान से खरीदी गई थी और मौखिक निर्देशों पर उपयोग में लाई गई।
पेयजल शुद्धिकरण में अनुचित पदार्थ का इस्तेमाल
अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि पोटैशियम क्लोराइड पीने के पानी को शुद्ध करने के लिए स्वीकृत रसायन नहीं है। ऐसे में इसका उपयोग गंभीर लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की ओर संकेत करता है। इस आधार पर पूरे मामले की निष्पक्ष पुलिस जांच की मांग भी की गई है।
सप्लाई लाइन में आखिरी टैंकों तक पहुंचा दूषण
दलीलों में यह भी सामने आया कि जलूद से आने वाली पानी की सप्लाई लाइन में तीसरे अंतिम टैंक तक पानी पूरी तरह सुरक्षित और मानकों के अनुरूप था। लेकिन इसके बाद के दो अंतिम टैंकों में पानी दूषित पाया गया, जहां से भागीरथपुरा क्षेत्र में सप्लाई की जाती है। इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि दूषण किसी विशेष बिंदु पर हुआ।
ग्राउंडवॉटर रिपोर्ट में बैक्टीरिया की मौजूदगी
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट में शहर के कई हिस्सों के भूजल में टोटल और फीकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया पाए गए हैं। बावजूद इसके, बीमारी और मौतों के मामले मुख्य रूप से भागीरथपुरा क्षेत्र तक सीमित रहे, जो इस घटना को और संदिग्ध बनाता है।
नगर निगम को रिकॉर्ड पेश करने के निर्देश
सुनवाई के दौरान यह भी उजागर हुआ कि नगर निगम द्वारा मांगे गए कई महत्वपूर्ण दस्तावेज अभी तक जांच समिति को उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। इस पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए निगम को 10 दिनों के भीतर सभी रिकॉर्ड प्राथमिकता के आधार पर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
कोर्ट की सख्ती और आयोग का गठन
इससे पहले की सुनवाई में हाईकोर्ट ने शासन और नगर निगम की रिपोर्ट को औपचारिकता मात्र बताते हुए नाराजगी जताई थी। कोर्ट ने इस मामले को सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा माना और स्पष्ट किया कि स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना नागरिकों का मौलिक अधिकार है। मामले की निष्पक्ष जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र जांच आयोग गठित किया गया है।
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भागीरथपुरा पानी कांड पर हाईकोर्ट सख्त, आज रिपोर्ट पर होगी बड़ी सुनवाई
इंदौर (म.प्र.)
इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल से जुड़ी गंभीर घटना पर आज 6 अप्रैल को हाईकोर्ट में सुनवाई होने जा रही है। यह मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है, क्योंकि इससे कई लोगों की जान जाने और स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका जताई गई है। पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जांच आयोग को 30 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे, जिसके बाद आज की सुनवाई को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जांच आयोग की रिपोर्ट पर टिकी नजरें
पिछली सुनवाई में जांच आयोग ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की थी। हालांकि कोर्ट ने इसे पर्याप्त नहीं मानते हुए विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी थी। आयोग को दिए गए समय की अवधि अब पूरी हो रही है, ऐसे में यह देखना अहम होगा कि रिपोर्ट में किन तथ्यों का खुलासा होता है और जिम्मेदारी किस पर तय होती है।
ओवरहेड टैंक में संदिग्ध रसायन डालने का दावा
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागड़िया ने एक अंतरिम आवेदन पेश कर कई नए तथ्य सामने रखे थे। उनके अनुसार, भागीरथपुरा के वार्ड 11 स्थित ओवरहेड टैंक में कथित रूप से पोटैशियम क्लोराइड की गोलियां डाली गई थीं। यह भी आरोप लगाया गया कि ये सामग्री अधिकृत प्रक्रिया से नहीं बल्कि एक निजी दुकान से खरीदी गई थी और मौखिक निर्देशों पर उपयोग में लाई गई।
पेयजल शुद्धिकरण में अनुचित पदार्थ का इस्तेमाल
अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि पोटैशियम क्लोराइड पीने के पानी को शुद्ध करने के लिए स्वीकृत रसायन नहीं है। ऐसे में इसका उपयोग गंभीर लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की ओर संकेत करता है। इस आधार पर पूरे मामले की निष्पक्ष पुलिस जांच की मांग भी की गई है।
सप्लाई लाइन में आखिरी टैंकों तक पहुंचा दूषण
दलीलों में यह भी सामने आया कि जलूद से आने वाली पानी की सप्लाई लाइन में तीसरे अंतिम टैंक तक पानी पूरी तरह सुरक्षित और मानकों के अनुरूप था। लेकिन इसके बाद के दो अंतिम टैंकों में पानी दूषित पाया गया, जहां से भागीरथपुरा क्षेत्र में सप्लाई की जाती है। इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि दूषण किसी विशेष बिंदु पर हुआ।
ग्राउंडवॉटर रिपोर्ट में बैक्टीरिया की मौजूदगी
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट में शहर के कई हिस्सों के भूजल में टोटल और फीकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया पाए गए हैं। बावजूद इसके, बीमारी और मौतों के मामले मुख्य रूप से भागीरथपुरा क्षेत्र तक सीमित रहे, जो इस घटना को और संदिग्ध बनाता है।
नगर निगम को रिकॉर्ड पेश करने के निर्देश
सुनवाई के दौरान यह भी उजागर हुआ कि नगर निगम द्वारा मांगे गए कई महत्वपूर्ण दस्तावेज अभी तक जांच समिति को उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। इस पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए निगम को 10 दिनों के भीतर सभी रिकॉर्ड प्राथमिकता के आधार पर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
कोर्ट की सख्ती और आयोग का गठन
इससे पहले की सुनवाई में हाईकोर्ट ने शासन और नगर निगम की रिपोर्ट को औपचारिकता मात्र बताते हुए नाराजगी जताई थी। कोर्ट ने इस मामले को सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा माना और स्पष्ट किया कि स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना नागरिकों का मौलिक अधिकार है। मामले की निष्पक्ष जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र जांच आयोग गठित किया गया है।
