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एयर इंडिया की अव्यवस्था से इंदौर के दंपती को भारी परेशानी
इंदौर (म.प्र.)
फ्लाइट लेट होने से 16 घंटे फंसी यात्रा, पुणे एयरपोर्ट पर कुर्सियों पर काटी रात
एयर इंडिया की उड़ानों में बार-बार हुई देरी और वैकल्पिक व्यवस्था की कमी के चलते इंदौर के एक दंपती को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। केरल यात्रा से लौट रहे योगेश वाधवानी और उनकी पत्नी खुशबू को न होटल मिला, न भोजन और पूरी रात पुणे एयरपोर्ट की कुर्सियों पर गुजारनी पड़ी। दंपती की इंदौर वापसी तय समय से करीब 16 घंटे बाद हो सकी।
कौन, क्या, कब, कहां
खातीवाला टैंक निवासी आईटी प्रोफेशनल योगेश वाधवानी अपनी पत्नी के साथ सात दिन के केरल प्रवास के बाद सोमवार को कोच्चि से इंदौर लौट रहे थे। उनकी टिकट एयर इंडिया की कनेक्टिंग फ्लाइट—कोच्चि से दिल्ली और दिल्ली से इंदौर—की थी। यात्रा मंगलवार सुबह इंदौर पहुंचकर पूरी हुई।
कैसे बिगड़ा सफर
दंपती के अनुसार, कोच्चि–दिल्ली फ्लाइट का समय कई बार बदला गया। पहले दोपहर 1:20 बजे, फिर 4:30 और 5:30 बजे का अपडेट दिया गया। अंततः विमान शाम 5:42 बजे रवाना हुआ और रात 8:21 बजे दिल्ली पहुंचा। इस देरी के कारण दिल्ली–इंदौर की कनेक्टिंग फ्लाइट छूट गई।
क्यों बढ़ी परेशानी
योगेश का कहना है कि दिल्ली पहुंचने पर उन्हें उसी रात इंदौर भेजा जा सकता था, लेकिन एयर इंडिया ने वैकल्पिक तौर पर उन्हें पुणे भेज दिया। रात करीब 2:30 बजे पुणे पहुंचने के बाद भी न ठहरने की व्यवस्था की गई और न ही भोजन उपलब्ध कराया गया। मजबूरी में दोनों ने एयरपोर्ट की कुर्सियों पर रात बिताई और सुबह एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट से 9:10 बजे इंदौर पहुंचे।
नियमों की अनदेखी का आरोप
दंपती का आरोप है कि पूरी प्रक्रिया में एयर इंडिया ने DGCA के दिशानिर्देशों का पालन नहीं किया। नियमों के मुताबिक, घरेलू उड़ान में दो घंटे से अधिक देरी होने पर यात्रियों को भोजन और रिफ्रेशमेंट देना अनिवार्य है। यदि देरी रातभर की हो, तो होटल या लाउंज की व्यवस्था भी जरूरी है। ऑपरेशनल कारणों से हुई देरी पर यात्रियों को दूरी और समय के आधार पर 5,000 से 10,000 रुपये तक मुआवजा दिए जाने का प्रावधान है।
प्रतिक्रिया और स्थिति
पीड़ित दंपती ने बताया कि उन्होंने एयरलाइन अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इस मामले ने एक बार फिर यात्रियों की सुविधा और जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती हवाई यात्राओं के बीच एयरलाइनों को वैकल्पिक व्यवस्था और ग्राहक सहायता पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है, ताकि यात्रियों को अनावश्यक मानसिक और शारीरिक कष्ट न झेलना पड़े।
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