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चरित्र निर्माण के बयान पर घिरे कैलाश विजयवर्गीय, सियासी बयानबाजी तेज
इंदौर (म.प्र.)
वैष्णव विश्वविद्यालय कार्यक्रम में दिए उदाहरण पर विवाद; कांग्रेस ने साधा निशाना
मध्य प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय एक बार फिर अपने बयान को लेकर राजनीतिक विवादों के केंद्र में आ गए हैं। इंदौर स्थित वैष्णव विश्वविद्यालय में आयोजित एक शैक्षणिक कार्यक्रम के दौरान बच्चों के चरित्र निर्माण पर दिए गए उनके उदाहरण को लेकर विपक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई है। बयान सामने आते ही कांग्रेस नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया शुरू हो गई, जिससे प्रदेश की राजनीति गरमा गई है।
कार्यक्रम में संबोधन के दौरान मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि केवल शिक्षा नीति सुधारने से बच्चों का सर्वांगीण विकास संभव नहीं है। उन्होंने घर के माहौल को चरित्र निर्माण की बुनियाद बताते हुए एक उदाहरण दिया, जिसमें उन्होंने कहा कि यदि पिता किसी प्रभावशाली पद पर हो और ठेकेदार बच्चों को सुविधाएं उपलब्ध कराएं, तो ऐसे वातावरण में बच्चों के संस्कार प्रभावित हो सकते हैं। इस टिप्पणी को लेकर सियासी हलकों में तीखी बहस छिड़ गई।
कांग्रेस का पलटवार, बयान को बताया अपमानजनक
मंत्री के बयान पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व पीडब्ल्यूडी मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने कड़ा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि इस तरह की टिप्पणियां न केवल गैर-जिम्मेदाराना हैं, बल्कि सार्वजनिक जीवन में बैठे लोगों की सोच को भी उजागर करती हैं। वर्मा ने बयान को व्यक्तिगत और सामाजिक स्तर पर अनुचित बताते हुए इसे जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश करार दिया।
घर का माहौल सबसे अहम: विजयवर्गीय
अपने संबोधन में विजयवर्गीय ने यह भी कहा कि बच्चा दिन का बड़ा हिस्सा घर में बिताता है और यदि पारिवारिक वातावरण सही नहीं होगा, तो स्कूल की शिक्षा का प्रभाव सीमित रह जाएगा। उन्होंने सुझाव दिया कि जैसे बच्चों के लिए पाठ्यक्रम होता है, वैसे ही अभिभावकों के लिए भी मार्गदर्शन और जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए, ताकि घर में संस्कारयुक्त माहौल बन सके।
शिक्षा के साथ संस्कार और राष्ट्रभाव पर जोर
मंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा का उद्देश्य केवल पेशेवर सफलता तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि समाज को ऐसे नागरिकों की आवश्यकता है, जो नैतिक मूल्यों, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति से जुड़े हों। उनके अनुसार, केवल डिग्रीधारी नहीं बल्कि चरित्रवान नागरिक तैयार करना शिक्षा व्यवस्था की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
पहले भी विवादों में रहे हैं विजयवर्गीय
यह पहली बार नहीं है जब कैलाश विजयवर्गीय अपने बयानों को लेकर चर्चा में आए हों। इससे पहले भी वे सार्वजनिक मंचों से दिए गए कई बयानों के कारण आलोचनाओं का सामना कर चुके हैं। हाल ही में वे व्यक्तिगत कारणों से अवकाश पर थे और अब दोबारा सक्रिय होकर विभागीय बैठकों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं।
इस बयान के बाद सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज होने की संभावना जताई जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति में और तूल पकड़ सकता है।
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