इंदौर डिजिटल अरेस्ट केस में लाओस आधारित साइबर गिरोह का पर्दाफाश: 350 सिम विदेश भेजे गए, अब तक 19 गिरफ्तार

Digital Desk

इंदौर क्राइम ब्रांच ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ ठगी मामले में दो और आरोपियों—एक गुजरात से और एक पंजाब से—को गिरफ्तार किया है। इसके साथ कुल गिरफ्तारियों की संख्या 19 हो गई है। इस मामले में 59 वर्षीय महिला को फर्जी मनी-लॉन्ड्रिंग आरोपों से डराकर ₹1.60 करोड़ की ठगी की गई थी।

अंतरराष्ट्रीय साइबर नेटवर्क का हिस्सा

जांच में सामने आया कि यह नेटवर्क कई भारतीय राज्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि लाओस से संचालित होने वाले अंतरराष्ट्रीय साइबर सिंडिकेट से जुड़ा है। पूछताछ में पकड़े गए आरोपी—सौरभ सिंह (वापी, गुजरात) और पत्रास उर्फ केलिस (फिरोजपुर सिटी, पंजाब)—ने कबूल किया कि उन्होंने सैकड़ों सिम कार्ड लाओस भेजे, जिनका इस्तेमाल विदेशी गिरोह भारत में पीड़ितों से संपर्क करने और पहचान छिपाने के लिए करता था।

कैसे चुने जाते थे पीड़ित

गिरोह 40 से 70 वर्ष की आयु के अकेले रह रहे पुरुषों-महिलाओं को सोशल मीडिया और डेटिंग ऐप्स पर प्रोफाइल देखकर निशाना बनाता था।
जो लोग अकेले रहते थे, आर्थिक रूप से सक्षम थे या जिनका परिवारिक सपोर्ट कम था, उन्हें आसानी से डराया-धमकाया जा सकता था।

ठग खुद को CBI, RBI, ED या पुलिस अधिकारी बनकर पीड़ितों को फर्जी केस और गिरफ्तारी की धमकी देते थे।

ठगी का तरीका

इंदौर की पीड़िता को स्काइप और व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर बताया गया कि वह मनी-लॉन्ड्रिंग में शामिल है। ‘वेरिफिकेशन’ के नाम पर ठगों ने उसके बैंक खाते, एफडी और शेयर इन्वेस्टमेंट तक पहुंच हासिल कर ₹1.60 करोड़ निकाल लिए।

क्राइम ब्रांच ने BNS की धाराओं 318(4), 308(2), 316(5), 111(4) व 3(5) के तहत केस दर्ज कर कई राज्यों में अभियान चलाया।

सिम कार्ड की सप्लाई चेन का खुलासा

दोनों आरोपियों ने बताया कि उन्होंने 350 से ज्यादा सिम कार्ड ग्रामीण लोगों की पहचान का उपयोग कर जुटाए, जिन्हें कई स्तरों पर भेजते हुए अंततः लाओस में बैठे गिरोह तक पहुंचाया जाता था।

सौरभ होटल मैनेजमेंट का छात्र है, जबकि पत्रास 12वीं तक पढ़ा है। दोनों ने कहा कि उन्हें पहले नौकरी के नाम पर बहलाया गया और बाद में साइबर नेटवर्क में शामिल कर लिया गया।

इन राज्यों का कनेक्शन मिला

अब तक गिरफ्तार आरोपी गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पंजाब और पश्चिम बंगाल से हैं, जो इस नेटवर्क की व्यापकता दर्शाता है।

पुलिस की चेतावनी: ‘डिजिटल अरेस्ट’ से सावधान रहें

इंदौर पुलिस ने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है:

  • कोई भी सरकारी एजेंसी व्हाट्सएप या वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी/जांच नहीं करती।

  • बैंक डिटेल, OTP या निजी जानकारी किसी अनजान व्यक्ति को न दें।

  • किसी भी संदिग्ध कॉल की तुरंत पुलिस को सूचना दें।

  • अपने कानूनी अधिकारों को समझें और किसी भी दबाव में न आएं।

अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को खत्म करने के लिए विशेष टीम बनाई गई है।

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www.dainikjagranmpcg.com
28 Nov 2025 By दैनिक जागरण

इंदौर डिजिटल अरेस्ट केस में लाओस आधारित साइबर गिरोह का पर्दाफाश: 350 सिम विदेश भेजे गए, अब तक 19 गिरफ्तार

Digital Desk

अंतरराष्ट्रीय साइबर नेटवर्क का हिस्सा

जांच में सामने आया कि यह नेटवर्क कई भारतीय राज्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि लाओस से संचालित होने वाले अंतरराष्ट्रीय साइबर सिंडिकेट से जुड़ा है। पूछताछ में पकड़े गए आरोपी—सौरभ सिंह (वापी, गुजरात) और पत्रास उर्फ केलिस (फिरोजपुर सिटी, पंजाब)—ने कबूल किया कि उन्होंने सैकड़ों सिम कार्ड लाओस भेजे, जिनका इस्तेमाल विदेशी गिरोह भारत में पीड़ितों से संपर्क करने और पहचान छिपाने के लिए करता था।

कैसे चुने जाते थे पीड़ित

गिरोह 40 से 70 वर्ष की आयु के अकेले रह रहे पुरुषों-महिलाओं को सोशल मीडिया और डेटिंग ऐप्स पर प्रोफाइल देखकर निशाना बनाता था।
जो लोग अकेले रहते थे, आर्थिक रूप से सक्षम थे या जिनका परिवारिक सपोर्ट कम था, उन्हें आसानी से डराया-धमकाया जा सकता था।

ठग खुद को CBI, RBI, ED या पुलिस अधिकारी बनकर पीड़ितों को फर्जी केस और गिरफ्तारी की धमकी देते थे।

ठगी का तरीका

इंदौर की पीड़िता को स्काइप और व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर बताया गया कि वह मनी-लॉन्ड्रिंग में शामिल है। ‘वेरिफिकेशन’ के नाम पर ठगों ने उसके बैंक खाते, एफडी और शेयर इन्वेस्टमेंट तक पहुंच हासिल कर ₹1.60 करोड़ निकाल लिए।

क्राइम ब्रांच ने BNS की धाराओं 318(4), 308(2), 316(5), 111(4) व 3(5) के तहत केस दर्ज कर कई राज्यों में अभियान चलाया।

सिम कार्ड की सप्लाई चेन का खुलासा

दोनों आरोपियों ने बताया कि उन्होंने 350 से ज्यादा सिम कार्ड ग्रामीण लोगों की पहचान का उपयोग कर जुटाए, जिन्हें कई स्तरों पर भेजते हुए अंततः लाओस में बैठे गिरोह तक पहुंचाया जाता था।

सौरभ होटल मैनेजमेंट का छात्र है, जबकि पत्रास 12वीं तक पढ़ा है। दोनों ने कहा कि उन्हें पहले नौकरी के नाम पर बहलाया गया और बाद में साइबर नेटवर्क में शामिल कर लिया गया।

इन राज्यों का कनेक्शन मिला

अब तक गिरफ्तार आरोपी गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पंजाब और पश्चिम बंगाल से हैं, जो इस नेटवर्क की व्यापकता दर्शाता है।

पुलिस की चेतावनी: ‘डिजिटल अरेस्ट’ से सावधान रहें

इंदौर पुलिस ने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है:

  • कोई भी सरकारी एजेंसी व्हाट्सएप या वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी/जांच नहीं करती।

  • बैंक डिटेल, OTP या निजी जानकारी किसी अनजान व्यक्ति को न दें।

  • किसी भी संदिग्ध कॉल की तुरंत पुलिस को सूचना दें।

  • अपने कानूनी अधिकारों को समझें और किसी भी दबाव में न आएं।

अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को खत्म करने के लिए विशेष टीम बनाई गई है।

https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/laos-based-cyber-gang-busted-in-indore-digital-arrest-case/article-38767

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