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जन्म प्रमाण पत्र के लिए आधार अमान्य, नियमों में हुआ बड़ा बदलाव
रतलाम (म.प्र.)
जन्म प्रमाण पत्र नियम में बदलाव के तहत आधार कार्ड अब मान्य नहीं, नए दस्तावेज और टैक्स नियमों में बड़ा अपडेट लागू हुआ।
देश में आयकर, जीएसटी और दस्तावेज़ीकरण से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव किए गए हैं। नए प्रावधानों के तहत कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों की प्रक्रिया को डिजिटल और सख्त बनाया गया है। खास बात यह है कि अब जन्म प्रमाण पत्र के लिए आधार कार्ड को मान्य दस्तावेज के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
आधार की जगह अब वैकल्पिक दस्तावेज जरूरी
नए नियमों के अनुसार जन्म तिथि के प्रमाण के लिए आधार कार्ड को हटाकर अन्य दस्तावेजों को प्राथमिकता दी गई है। अब नागरिकों को जन्म प्रमाण पत्र, 10वीं की मार्कशीट, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर आईडी या आवश्यक होने पर शपथ पत्र प्रस्तुत करना होगा। इससे दस्तावेजों की सत्यता और अधिक मजबूत होगी।
आयकर फॉर्म और पैन कार्ड नियमों में बदलाव
आयकर व्यवस्था में भी कई संशोधन किए गए हैं। पहले उपयोग में आने वाला फॉर्म 15G और 15H अब बदलकर नया फॉर्म 121 लागू कर दिया गया है, जिसे डिजिटल माध्यम से एआईएस सिस्टम से जोड़ा गया है। इसके अलावा पैन कार्ड के नियमों में भी बदलाव करते हुए पुराने फॉर्म 49 की जगह नया फॉर्म 93 लागू किया गया है। पैन कार्ड में नाम अब आधार के अनुसार ही रहेगा और इसमें बदलाव का विकल्प सीमित कर दिया गया है।
प्रॉपर्टी लेन-देन पर बढ़ी निगरानी
आयकर विभाग ने प्रॉपर्टी और स्टांप ड्यूटी से जुड़े नियम भी सख्त कर दिए हैं। अब 45 लाख रुपये से अधिक की संपत्ति की जानकारी रिपोर्ट करना अनिवार्य होगा। वहीं 2 लाख रुपये से अधिक के स्टांप खरीद पर भी रिपोर्टिंग जरूरी होगी। 1 लाख रुपये से अधिक की स्टांप ड्यूटी पर पैन न होने की स्थिति में भी जानकारी साझा करनी होगी।
जीएसटी ट्रिब्यूनल में अपील प्रक्रिया
जीएसटी विवादों के समाधान के लिए अब ट्रिब्यूनल में अपील करने की समय सीमा 3 महीने तय की गई है। इसमें 20 प्रतिशत प्री-डिपॉजिट अनिवार्य होगा और अधिकतम फीस 25,000 रुपये निर्धारित की गई है। देरी की स्थिति में उचित कारण बताना जरूरी होगा, अन्यथा अपील स्वीकार नहीं की जाएगी।
डिजिटल निगरानी और सख्त नियम
नए सिस्टम में सभी वित्तीय लेन-देन एआईएस और डिजिटल मॉनिटरिंग से जोड़े गए हैं, जिससे हर ट्रांजेक्शन पर कड़ी नजर रखी जाएगी। नियमों का पालन न करने पर नोटिस और पेनल्टी का खतरा भी बढ़ गया है।
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जन्म प्रमाण पत्र के लिए आधार अमान्य, नियमों में हुआ बड़ा बदलाव
रतलाम (म.प्र.)
देश में आयकर, जीएसटी और दस्तावेज़ीकरण से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव किए गए हैं। नए प्रावधानों के तहत कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों की प्रक्रिया को डिजिटल और सख्त बनाया गया है। खास बात यह है कि अब जन्म प्रमाण पत्र के लिए आधार कार्ड को मान्य दस्तावेज के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
आधार की जगह अब वैकल्पिक दस्तावेज जरूरी
नए नियमों के अनुसार जन्म तिथि के प्रमाण के लिए आधार कार्ड को हटाकर अन्य दस्तावेजों को प्राथमिकता दी गई है। अब नागरिकों को जन्म प्रमाण पत्र, 10वीं की मार्कशीट, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर आईडी या आवश्यक होने पर शपथ पत्र प्रस्तुत करना होगा। इससे दस्तावेजों की सत्यता और अधिक मजबूत होगी।
आयकर फॉर्म और पैन कार्ड नियमों में बदलाव
आयकर व्यवस्था में भी कई संशोधन किए गए हैं। पहले उपयोग में आने वाला फॉर्म 15G और 15H अब बदलकर नया फॉर्म 121 लागू कर दिया गया है, जिसे डिजिटल माध्यम से एआईएस सिस्टम से जोड़ा गया है। इसके अलावा पैन कार्ड के नियमों में भी बदलाव करते हुए पुराने फॉर्म 49 की जगह नया फॉर्म 93 लागू किया गया है। पैन कार्ड में नाम अब आधार के अनुसार ही रहेगा और इसमें बदलाव का विकल्प सीमित कर दिया गया है।
प्रॉपर्टी लेन-देन पर बढ़ी निगरानी
आयकर विभाग ने प्रॉपर्टी और स्टांप ड्यूटी से जुड़े नियम भी सख्त कर दिए हैं। अब 45 लाख रुपये से अधिक की संपत्ति की जानकारी रिपोर्ट करना अनिवार्य होगा। वहीं 2 लाख रुपये से अधिक के स्टांप खरीद पर भी रिपोर्टिंग जरूरी होगी। 1 लाख रुपये से अधिक की स्टांप ड्यूटी पर पैन न होने की स्थिति में भी जानकारी साझा करनी होगी।
जीएसटी ट्रिब्यूनल में अपील प्रक्रिया
जीएसटी विवादों के समाधान के लिए अब ट्रिब्यूनल में अपील करने की समय सीमा 3 महीने तय की गई है। इसमें 20 प्रतिशत प्री-डिपॉजिट अनिवार्य होगा और अधिकतम फीस 25,000 रुपये निर्धारित की गई है। देरी की स्थिति में उचित कारण बताना जरूरी होगा, अन्यथा अपील स्वीकार नहीं की जाएगी।
डिजिटल निगरानी और सख्त नियम
नए सिस्टम में सभी वित्तीय लेन-देन एआईएस और डिजिटल मॉनिटरिंग से जोड़े गए हैं, जिससे हर ट्रांजेक्शन पर कड़ी नजर रखी जाएगी। नियमों का पालन न करने पर नोटिस और पेनल्टी का खतरा भी बढ़ गया है।
