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एमजीएम मेडिकल कॉलेज छात्र मौत मामला: पिता का आरोप- तीन महीने से रैगिंग और बुलिंग झेल रहा था बेटा
इंदौर (म.प्र.)
खड़े होकर खाना, कमरे का दरवाजा बंद करने तक की मनाही; पुलिस और कॉलेज की अलग-अलग जांच शुरू
इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्र अंतरिक्ष अग्रवाल की मौत के बाद रैगिंग और मानसिक उत्पीड़न को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मृतक के परिजनों ने सीनियर छात्रों पर लगातार रैगिंग और बुलिंग का आरोप लगाया है, जबकि कॉलेज प्रशासन का कहना है कि अब तक रैगिंग से जुड़ी कोई लिखित शिकायत सामने नहीं आई है।
ग्वालियर निवासी 18 वर्षीय अंतरिक्ष अग्रवाल ने 2 फरवरी की रात हॉस्टल के अपने कमरे में फांसी लगाकर जान दे दी थी। घटना के बाद से परिवार सदमे में है। पिता पंकज अग्रवाल का कहना है कि मेडिकल कॉलेज में दाखिले के बाद से ही उनका बेटा मानसिक रूप से परेशान रहने लगा था।
परिजनों के अनुसार, अंतरिक्ष ने बताया था कि हॉस्टल में सीनियर छात्र उसे लगातार अपमानित करते थे। उसे और अन्य फर्स्ट ईयर छात्रों को मेस में कुर्सी-टेबल पर बैठकर खाना खाने की अनुमति नहीं थी। सीनियर छात्रों की मौजूदगी में उन्हें खड़े होकर भोजन करना पड़ता था। इसके अलावा दिन में यूनिफॉर्म बदलने और रात में कमरे का दरवाजा बंद कर सोने पर भी रोक थी।
परिवार का कहना है कि डर के चलते अंतरिक्ष ने किसी सीनियर का नाम नहीं बताया। वह दो बार घर आया और दोनों बार भावुक होकर रो पड़ा। एक बार उसने हॉस्टल से फोन कर प्रताड़ना की बात भी कही थी।
पिता ने बताया कि 31 जनवरी को अंतरिक्ष ने नया मोबाइल फोन खरीदा था और अगले दिन दोस्तों को पार्टी भी दी थी। 2 फरवरी की सुबह उसने मेस फीस के लिए दो हजार रुपए ऑनलाइन भेजने को कहा था। उस वक्त उसकी आवाज सामान्य थी और किसी तरह की परेशानी नहीं झलक रही थी।
घटना के बाद कॉलेज प्रशासन ने मामले की जांच के लिए दो समितियां गठित की हैं, जिनमें एंटी-रैगिंग कमेटी भी शामिल है। एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने कहा कि कॉलेज रिकॉर्ड में रैगिंग की कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है, लेकिन सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच की जा रही है।
वहीं पुलिस भी मामले की जांच कर रही है। एसीपी तुषार सिंह के अनुसार, पुलिस और एफएसएल टीम ने मौके का निरीक्षण किया है। छात्र के दो मोबाइल फोन जब्त कर कॉल रिकॉर्ड, मैसेज और सोशल मीडिया गतिविधियों की जांच की जा रही है। फिलहाल कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। पोस्टमॉर्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
गौरतलब है कि इससे पहले भी एमजीएम मेडिकल कॉलेज में रैगिंग को लेकर शिकायतें सामने आ चुकी हैं। दिसंबर 2024 में सोशल मीडिया के जरिए हॉस्टल में रैगिंग के आरोप लगाए गए थे और यूजीसी को भी इस संबंध में शिकायत भेजी गई थी।
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