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ईरान ने पाकिस्तान का 15-सूत्रीय शांति प्रस्ताव ठुकराया, ट्रंप-मुनीर पर भी उठाए सवाल
अंतर्राष्ट्रीय डेस्क
Iran Pakistan peace proposal को ईरान ने सिरे से खारिज किया, मध्यस्थता, ट्रंप और मुनीर पर भी तेहरान ने सख्त बयान दिया।
मध्य पूर्व की कूटनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां ईरान ने पाकिस्तान की ओर से प्रस्तुत 15-सूत्रीय शांति प्रस्ताव को स्पष्ट रूप से अस्वीकार कर दिया है। इस फैसले के साथ ही क्षेत्रीय राजनीति में नई हलचल तेज हो गई है। तेहरान ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह किसी भी प्रकार की बातचीत या समझौते को तभी स्वीकार करेगा, जब वह पूरी तरह उसके राष्ट्रीय हितों के अनुरूप होगा।
पाकिस्तान द्वारा तैयार शांति प्रस्ताव
रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान ने एक 15-सूत्रीय शांति योजना तैयार की थी, जिसे अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता के प्रयास के रूप में आगे बढ़ाया गया था। इस प्रस्ताव में 45 दिनों के संघर्षविराम, रणनीतिक जलमार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने और मध्य पूर्व में तनाव कम करने जैसे सुझाव शामिल थे। साथ ही ईरान के परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल क्षमता और क्षेत्रीय गतिविधियों पर नियंत्रण के बदले प्रतिबंधों में राहत का प्रस्ताव भी रखा गया था।
ईरान का स्पष्ट और सख्त रुख
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने इस प्रस्ताव को खारिज करते हुए कहा कि तेहरान पहले ही अपनी स्थिति स्पष्ट कर चुका है। उन्होंने कहा कि ईरान किसी भी दबाव या धमकी के तहत वार्ता स्वीकार नहीं करेगा। ईरान का मानना है कि इस तरह के प्रस्ताव उसकी संप्रभुता और निर्णय लेने की स्वतंत्रता को प्रभावित करते हैं।
मध्यस्थता पर ईरान की आपत्ति
ईरान ने इस बात पर भी आपत्ति जताई कि प्रस्ताव को बिचौलियों के माध्यम से भेजा गया था। तेहरान ने स्पष्ट किया कि वह पाकिस्तान या किसी अन्य देश के जरिए अमेरिका के साथ किसी अनौपचारिक वार्ता को स्वीकार नहीं करता। ईरान का कहना है कि बातचीत केवल प्रत्यक्ष और स्पष्ट शर्तों पर ही संभव है।
ट्रंप के बयानों पर ईरान की प्रतिक्रिया
इस पूरे विवाद के बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों ने भी तनाव बढ़ाया। ट्रंप ने कथित रूप से ईरान को सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी थी और बातचीत को लेकर समयसीमा का भी उल्लेख किया था। ईरान ने इन बयानों को धमकीपूर्ण बताते हुए खारिज कर दिया और कहा कि ऐसे माहौल में किसी भी तरह की वार्ता संभव नहीं है।
असीम मुनीर की भूमिका पर सवाल
पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर की भूमिका को लेकर भी ईरान ने सवाल उठाए हैं। ईरान का कहना है कि पाकिस्तान की मध्यस्थता वास्तविक रूप से निष्पक्ष नहीं दिखती और इसमें बाहरी हितों का प्रभाव नजर आता है। इस बयान के बाद इस्लामाबाद की कूटनीतिक कोशिशों को झटका लगा है।
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ईरान ने पाकिस्तान का 15-सूत्रीय शांति प्रस्ताव ठुकराया, ट्रंप-मुनीर पर भी उठाए सवाल
अंतर्राष्ट्रीय डेस्क
मध्य पूर्व की कूटनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां ईरान ने पाकिस्तान की ओर से प्रस्तुत 15-सूत्रीय शांति प्रस्ताव को स्पष्ट रूप से अस्वीकार कर दिया है। इस फैसले के साथ ही क्षेत्रीय राजनीति में नई हलचल तेज हो गई है। तेहरान ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह किसी भी प्रकार की बातचीत या समझौते को तभी स्वीकार करेगा, जब वह पूरी तरह उसके राष्ट्रीय हितों के अनुरूप होगा।
पाकिस्तान द्वारा तैयार शांति प्रस्ताव
रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान ने एक 15-सूत्रीय शांति योजना तैयार की थी, जिसे अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता के प्रयास के रूप में आगे बढ़ाया गया था। इस प्रस्ताव में 45 दिनों के संघर्षविराम, रणनीतिक जलमार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने और मध्य पूर्व में तनाव कम करने जैसे सुझाव शामिल थे। साथ ही ईरान के परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल क्षमता और क्षेत्रीय गतिविधियों पर नियंत्रण के बदले प्रतिबंधों में राहत का प्रस्ताव भी रखा गया था।
ईरान का स्पष्ट और सख्त रुख
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने इस प्रस्ताव को खारिज करते हुए कहा कि तेहरान पहले ही अपनी स्थिति स्पष्ट कर चुका है। उन्होंने कहा कि ईरान किसी भी दबाव या धमकी के तहत वार्ता स्वीकार नहीं करेगा। ईरान का मानना है कि इस तरह के प्रस्ताव उसकी संप्रभुता और निर्णय लेने की स्वतंत्रता को प्रभावित करते हैं।
मध्यस्थता पर ईरान की आपत्ति
ईरान ने इस बात पर भी आपत्ति जताई कि प्रस्ताव को बिचौलियों के माध्यम से भेजा गया था। तेहरान ने स्पष्ट किया कि वह पाकिस्तान या किसी अन्य देश के जरिए अमेरिका के साथ किसी अनौपचारिक वार्ता को स्वीकार नहीं करता। ईरान का कहना है कि बातचीत केवल प्रत्यक्ष और स्पष्ट शर्तों पर ही संभव है।
ट्रंप के बयानों पर ईरान की प्रतिक्रिया
इस पूरे विवाद के बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों ने भी तनाव बढ़ाया। ट्रंप ने कथित रूप से ईरान को सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी थी और बातचीत को लेकर समयसीमा का भी उल्लेख किया था। ईरान ने इन बयानों को धमकीपूर्ण बताते हुए खारिज कर दिया और कहा कि ऐसे माहौल में किसी भी तरह की वार्ता संभव नहीं है।
असीम मुनीर की भूमिका पर सवाल
पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर की भूमिका को लेकर भी ईरान ने सवाल उठाए हैं। ईरान का कहना है कि पाकिस्तान की मध्यस्थता वास्तविक रूप से निष्पक्ष नहीं दिखती और इसमें बाहरी हितों का प्रभाव नजर आता है। इस बयान के बाद इस्लामाबाद की कूटनीतिक कोशिशों को झटका लगा है।
