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हाथी दांत मामले में फिर चर्चा में मोहनलाल, वन विभाग को 10 दांत और 13 मूर्तियों की दी जानकारी
बालीवुड डेस्क
15 साल पुराने मामले में एमनेस्टी योजना के तहत किया खुलासा, वन विभाग करेगा जांच; डीएनए परीक्षण की भी संभावना जताई गई।
मलयालम फिल्म इंडस्ट्री के वरिष्ठ अभिनेता मोहनलाल एक बार फिर हाथी दांत रखने से जुड़े पुराने मामले को लेकर चर्चा में हैं। केरल वन विभाग के समक्ष अभिनेता ने सरकार की एमनेस्टी योजना के तहत 10 हाथी के दांत और हाथी दांत से बनी 13 मूर्तियों की जानकारी दी है। इस खुलासे के बाद एक बार फिर वह मामला सुर्खियों में आ गया है, जिसकी शुरुआत करीब 15 साल पहले हुई थी। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पहले अभिनेता ने केवल चार हाथी दांत होने की जानकारी दी थी, लेकिन अब उन्होंने छह और हाथी दांत के साथ कई कलाकृतियों की भी घोषणा की है। विभाग पूरे मामले की जांच कर रहा है और जरूरत पड़ने पर इन वस्तुओं का डीएनए परीक्षण भी कराया जा सकता है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई को लेकर फैसला लिया जाएगा।
अभिनेता ने जिन वस्तुओं की घोषणा की है, उनमें भगवान कृष्ण, भगवान राम और तिरुपति बालाजी सहित कई धार्मिक प्रतिमाएं शामिल हैं। इन सभी हाथी दांतों और मूर्तियों का कुल वजन करीब 46 किलोग्राम बताया जा रहा है। मोहनलाल का कहना है कि ये वस्तुएं उन्हें विरासत में मिली थीं या फिर उपहार के रूप में प्राप्त हुई थीं। उन्होंने इन्हें किसी अवैध व्यापार या शिकार के जरिए हासिल नहीं किया। हालांकि वन विभाग अब इस दावे की भी जांच करेगा कि इन वस्तुओं की वास्तविक उत्पत्ति क्या है और क्या इनके पास रखने की प्रक्रिया उस समय लागू नियमों के अनुरूप थी।
यह मामला पहली बार वर्ष 2011 में सामने आया था। उस समय आयकर विभाग की टीम कोच्चि के थेवारा इलाके में स्थित मोहनलाल के घर पर छापेमारी के लिए पहुंची थी। अधिकारियों का उद्देश्य वित्तीय दस्तावेज और अन्य रिकॉर्ड की जांच करना था, लेकिन तलाशी के दौरान घर में हाथी दांत और उनसे बनी कई कलाकृतियां मिलीं। इसके बाद मामला वन विभाग तक पहुंचा। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत सरकार की अनुमति के बिना हाथी दांत रखना या उसका स्वामित्व रखना प्रतिबंधित है। इसी आधार पर वन विभाग ने इन वस्तुओं को जब्त किया और पेरुम्बावूर की अदालत में मामला दर्ज कराया। तभी से यह प्रकरण कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बना हुआ है।
मामला सामने आने के बाद मोहनलाल ने अपनी सफाई भी दी थी। उन्होंने कहा था कि जिन हाथी दांतों की बात हो रही है, वे एक ऐसे पालतू हाथी के थे जिसकी प्राकृतिक कारणों से मृत्यु हो गई थी। अभिनेता का दावा था कि उन्होंने उन्हें केवल स्मृति के रूप में अपने पास रखा था और उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि ऐसा करना कानून के दायरे में प्रतिबंधित है। बाद में वर्ष 2015 में राज्य सरकार ने उन्हें इन हाथी दांतों की घोषणा करने की अनुमति दी और वर्ष 2016 में स्वामित्व प्रमाणपत्र भी जारी कर दिया गया। उस समय इस फैसले पर भी कई वन्यजीव संरक्षण संगठनों ने सवाल उठाए थे।
इसके बाद मामला अदालत तक पहुंचा और कानूनी प्रक्रिया जारी रही। मोहनलाल ने निचली अदालत के आदेश को केरल हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, जहां उन्हें कुछ समय के लिए अंतरिम राहत मिली। इस दौरान उन्होंने राज्य सरकार से मामले को वापस लेने का भी अनुरोध किया, लेकिन यह मांग स्वीकार नहीं की गई। बाद में सेवानिवृत्त वन अधिकारियों और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े लोगों की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने अभिनेता को जारी स्वामित्व प्रमाणपत्र को अवैध घोषित कर दिया। हालांकि अदालत ने उनके खिलाफ तत्काल आपराधिक मुकदमा चलाने का आदेश नहीं दिया। इसके बाद मामला फिर वन विभाग की जांच के दायरे में आ गया।
अब सरकार की एमनेस्टी योजना के तहत मोहनलाल द्वारा अतिरिक्त हाथी दांत और मूर्तियों की घोषणा किए जाने के बाद विभाग एक बार फिर सभी तथ्यों की जांच कर रहा है। अधिकारियों के अनुसार यदि आवश्यकता पड़ी तो हाथी दांतों और उनसे बनी मूर्तियों का डीएनए परीक्षण कराया जाएगा। इससे यह पता लगाने की कोशिश होगी कि ये वस्तुएं किस हाथी से संबंधित हैं और इनकी वास्तविक स्थिति क्या है। जांच के नतीजों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय की जाएगी।वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि हाथी दांत से संबंधित मामलों में कानून काफी सख्त है, क्योंकि अवैध शिकार और हाथी दांत के व्यापार पर रोक लगाने के लिए देश में लंबे समय से विशेष प्रावधान लागू हैं। ऐसे मामलों में प्रत्येक वस्तु की उत्पत्ति, स्वामित्व और कानूनी दस्तावेजों की जांच जरूरी होती है। दूसरी ओर अभिनेता के समर्थकों का कहना है कि उन्होंने एमनेस्टी योजना के तहत स्वयं जानकारी देकर कानून का पालन करने की कोशिश की है और जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहिए।
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हाथी दांत मामले में फिर चर्चा में मोहनलाल, वन विभाग को 10 दांत और 13 मूर्तियों की दी जानकारी
बालीवुड डेस्क
मलयालम फिल्म इंडस्ट्री के वरिष्ठ अभिनेता मोहनलाल एक बार फिर हाथी दांत रखने से जुड़े पुराने मामले को लेकर चर्चा में हैं। केरल वन विभाग के समक्ष अभिनेता ने सरकार की एमनेस्टी योजना के तहत 10 हाथी के दांत और हाथी दांत से बनी 13 मूर्तियों की जानकारी दी है। इस खुलासे के बाद एक बार फिर वह मामला सुर्खियों में आ गया है, जिसकी शुरुआत करीब 15 साल पहले हुई थी। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पहले अभिनेता ने केवल चार हाथी दांत होने की जानकारी दी थी, लेकिन अब उन्होंने छह और हाथी दांत के साथ कई कलाकृतियों की भी घोषणा की है। विभाग पूरे मामले की जांच कर रहा है और जरूरत पड़ने पर इन वस्तुओं का डीएनए परीक्षण भी कराया जा सकता है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई को लेकर फैसला लिया जाएगा।
अभिनेता ने जिन वस्तुओं की घोषणा की है, उनमें भगवान कृष्ण, भगवान राम और तिरुपति बालाजी सहित कई धार्मिक प्रतिमाएं शामिल हैं। इन सभी हाथी दांतों और मूर्तियों का कुल वजन करीब 46 किलोग्राम बताया जा रहा है। मोहनलाल का कहना है कि ये वस्तुएं उन्हें विरासत में मिली थीं या फिर उपहार के रूप में प्राप्त हुई थीं। उन्होंने इन्हें किसी अवैध व्यापार या शिकार के जरिए हासिल नहीं किया। हालांकि वन विभाग अब इस दावे की भी जांच करेगा कि इन वस्तुओं की वास्तविक उत्पत्ति क्या है और क्या इनके पास रखने की प्रक्रिया उस समय लागू नियमों के अनुरूप थी।
यह मामला पहली बार वर्ष 2011 में सामने आया था। उस समय आयकर विभाग की टीम कोच्चि के थेवारा इलाके में स्थित मोहनलाल के घर पर छापेमारी के लिए पहुंची थी। अधिकारियों का उद्देश्य वित्तीय दस्तावेज और अन्य रिकॉर्ड की जांच करना था, लेकिन तलाशी के दौरान घर में हाथी दांत और उनसे बनी कई कलाकृतियां मिलीं। इसके बाद मामला वन विभाग तक पहुंचा। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत सरकार की अनुमति के बिना हाथी दांत रखना या उसका स्वामित्व रखना प्रतिबंधित है। इसी आधार पर वन विभाग ने इन वस्तुओं को जब्त किया और पेरुम्बावूर की अदालत में मामला दर्ज कराया। तभी से यह प्रकरण कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बना हुआ है।
मामला सामने आने के बाद मोहनलाल ने अपनी सफाई भी दी थी। उन्होंने कहा था कि जिन हाथी दांतों की बात हो रही है, वे एक ऐसे पालतू हाथी के थे जिसकी प्राकृतिक कारणों से मृत्यु हो गई थी। अभिनेता का दावा था कि उन्होंने उन्हें केवल स्मृति के रूप में अपने पास रखा था और उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि ऐसा करना कानून के दायरे में प्रतिबंधित है। बाद में वर्ष 2015 में राज्य सरकार ने उन्हें इन हाथी दांतों की घोषणा करने की अनुमति दी और वर्ष 2016 में स्वामित्व प्रमाणपत्र भी जारी कर दिया गया। उस समय इस फैसले पर भी कई वन्यजीव संरक्षण संगठनों ने सवाल उठाए थे।
इसके बाद मामला अदालत तक पहुंचा और कानूनी प्रक्रिया जारी रही। मोहनलाल ने निचली अदालत के आदेश को केरल हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, जहां उन्हें कुछ समय के लिए अंतरिम राहत मिली। इस दौरान उन्होंने राज्य सरकार से मामले को वापस लेने का भी अनुरोध किया, लेकिन यह मांग स्वीकार नहीं की गई। बाद में सेवानिवृत्त वन अधिकारियों और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े लोगों की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने अभिनेता को जारी स्वामित्व प्रमाणपत्र को अवैध घोषित कर दिया। हालांकि अदालत ने उनके खिलाफ तत्काल आपराधिक मुकदमा चलाने का आदेश नहीं दिया। इसके बाद मामला फिर वन विभाग की जांच के दायरे में आ गया।
अब सरकार की एमनेस्टी योजना के तहत मोहनलाल द्वारा अतिरिक्त हाथी दांत और मूर्तियों की घोषणा किए जाने के बाद विभाग एक बार फिर सभी तथ्यों की जांच कर रहा है। अधिकारियों के अनुसार यदि आवश्यकता पड़ी तो हाथी दांतों और उनसे बनी मूर्तियों का डीएनए परीक्षण कराया जाएगा। इससे यह पता लगाने की कोशिश होगी कि ये वस्तुएं किस हाथी से संबंधित हैं और इनकी वास्तविक स्थिति क्या है। जांच के नतीजों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय की जाएगी।वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि हाथी दांत से संबंधित मामलों में कानून काफी सख्त है, क्योंकि अवैध शिकार और हाथी दांत के व्यापार पर रोक लगाने के लिए देश में लंबे समय से विशेष प्रावधान लागू हैं। ऐसे मामलों में प्रत्येक वस्तु की उत्पत्ति, स्वामित्व और कानूनी दस्तावेजों की जांच जरूरी होती है। दूसरी ओर अभिनेता के समर्थकों का कहना है कि उन्होंने एमनेस्टी योजना के तहत स्वयं जानकारी देकर कानून का पालन करने की कोशिश की है और जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहिए।
