- Hindi News
- देश विदेश
- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने छह देशों के राजदूतों और उच्चायुक्तों के परिचय-पत्र स्वीकार किए
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने छह देशों के राजदूतों और उच्चायुक्तों के परिचय-पत्र स्वीकार किए
Digital Desk
राष्ट्रपति भवन में आयोजित औपचारिक समारोह में मोज़ाम्बिक, निकारागुआ, सूरीनाम, गैबॉन, मंगोलिया और बहामास के प्रतिनिधियों ने भारत की राष्ट्रपति को अपने परिचय-पत्र सौंपे, द्विपक्षीय संबंधों को नई मजबूती मिलने की उम्मीद।
भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक औपचारिक समारोह में छह देशों के राजदूतों और उच्चायुक्तों से उनके परिचय-पत्र स्वीकार किए। इस अवसर पर मोज़ाम्बिक, निकारागुआ, सूरीनाम, गैबॉन गणराज्य, मंगोलिया और बहामास के राजनयिक प्रतिनिधियों ने भारत में अपने आधिकारिक दायित्वों की शुरुआत करते हुए राष्ट्रपति को अपने-अपने परिचय-पत्र प्रस्तुत किए। इस प्रक्रिया को किसी भी राजदूत या उच्चायुक्त के कार्यकाल की औपचारिक शुरुआत माना जाता है और इसके बाद वे अपने देश का आधिकारिक प्रतिनिधित्व भारत में कर सकते हैं। राष्ट्रपति भवन में आयोजित इस समारोह में पारंपरिक गरिमा और राजनयिक शिष्टाचार का पालन किया गया। परिचय-पत्र स्वीकार करने की यह प्रक्रिया भारत और संबंधित देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण औपचारिक कदम मानी जाती है। समारोह के दौरान सभी प्रतिनिधियों का स्वागत किया गया और उन्हें भारत में अपने दायित्वों के निर्वहन के लिए शुभकामनाएं दी गईं। समारोह में सबसे पहले मोज़ाम्बिक गणराज्य के उच्चायुक्त महामहिम अरमांडो पेड्रो म्वीवाने जूनियर ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को अपना परिचय-पत्र सौंपा। इसके बाद निकारागुआ गणराज्य की राजदूत महामहिम नदेस्का इमारा कथबर्ट कार्लसन ने अपना परिचय-पत्र प्रस्तुत किया। सूरीनाम गणराज्य की राजदूत महामहिम हनीशा जयराम ने भी राष्ट्रपति को अपने परिचय-पत्र सौंपते हुए भारत में अपने राजनयिक दायित्वों की औपचारिक शुरुआत की।
इसके अलावा गैबॉन गणराज्य के उच्चायुक्त महामहिम ऑरेलियन-मार्सेल मिंत्सा एंगेमा, मंगोलिया के राजदूत डॉ. उल्ज़ीत लुव्सानजाव तथा बहामास कॉमनवेल्थ के उच्चायुक्त महामहिम पीटर निकोलस साइमोनेट ने भी राष्ट्रपति के समक्ष अपने परिचय-पत्र प्रस्तुत किए। इन सभी प्रतिनिधियों ने अपने-अपने देशों की ओर से भारत के साथ संबंधों को और अधिक मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। किसी भी विदेशी राजदूत या उच्चायुक्त के लिए परिचय-पत्र प्रस्तुत करना एक अनिवार्य संवैधानिक प्रक्रिया होती है। जब तक संबंधित प्रतिनिधि राष्ट्रपति को अपना परिचय-पत्र प्रस्तुत नहीं करता, तब तक वह आधिकारिक रूप से अपने देश का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता। इस औपचारिक प्रक्रिया के पूरा होने के बाद राजदूत और उच्चायुक्त दोनों देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, व्यापारिक और रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।
भारत लंबे समय से दुनिया के विभिन्न देशों के साथ अपने कूटनीतिक संबंधों को लगातार मजबूत करने की नीति पर काम कर रहा है। हाल के वर्षों में भारत ने अफ्रीका, लैटिन अमेरिका, कैरेबियाई देशों और एशिया-प्रशांत क्षेत्र के देशों के साथ सहयोग को नई गति दी है। ऐसे में इन छह देशों के नए राजनयिक प्रतिनिधियों की नियुक्ति को द्विपक्षीय संबंधों के विस्तार के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मोज़ाम्बिक और भारत के बीच ऊर्जा, खनन, कृषि, स्वास्थ्य और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। वहीं निकारागुआ और भारत के बीच विकास सहयोग, क्षमता निर्माण और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आपसी समर्थन को लेकर संबंध मजबूत रहे हैं। सूरीनाम के साथ भारत के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध विशेष महत्व रखते हैं, क्योंकि वहां भारतीय मूल की बड़ी आबादी निवास करती है। यही कारण है कि दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और सामाजिक संबंध भी काफी गहरे हैं।
गैबॉन के साथ भारत के आर्थिक और व्यापारिक संबंध लगातार विस्तार की ओर बढ़ रहे हैं। ऊर्जा, प्राकृतिक संसाधनों और निवेश के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग की संभावनाएं मौजूद हैं। दूसरी ओर मंगोलिया भारत का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार माना जाता है। दोनों देशों के बीच बौद्ध सांस्कृतिक विरासत, शिक्षा, रक्षा सहयोग और आर्थिक विकास से जुड़े कई क्षेत्रों में साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है। बहामास के साथ भी भारत के संबंध विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सहयोग और साझा हितों के आधार पर विकसित हो रहे हैं। जलवायु परिवर्तन, समुद्री सुरक्षा, सतत विकास और वैश्विक आर्थिक सहयोग जैसे विषयों पर दोनों देशों के बीच लगातार संवाद बना हुआ है। नए उच्चायुक्त की नियुक्ति से इन संबंधों को और गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। राष्ट्रपति भवन में आयोजित इस तरह के औपचारिक समारोह केवल संवैधानिक प्रक्रिया नहीं होते, बल्कि वे भारत की सक्रिय विदेश नीति और वैश्विक साझेदारी के विस्तार का भी प्रतीक होते हैं। नए राजदूतों और उच्चायुक्तों के कार्यभार संभालने के बाद व्यापार, निवेश, शिक्षा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, संस्कृति और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने की संभावना भी मजबूत होती है।
-----------------
हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनल: https://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुक: Dainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम: @dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूब: Dainik Jagran MPCG Digital
📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने छह देशों के राजदूतों और उच्चायुक्तों के परिचय-पत्र स्वीकार किए
Digital Desk
भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक औपचारिक समारोह में छह देशों के राजदूतों और उच्चायुक्तों से उनके परिचय-पत्र स्वीकार किए। इस अवसर पर मोज़ाम्बिक, निकारागुआ, सूरीनाम, गैबॉन गणराज्य, मंगोलिया और बहामास के राजनयिक प्रतिनिधियों ने भारत में अपने आधिकारिक दायित्वों की शुरुआत करते हुए राष्ट्रपति को अपने-अपने परिचय-पत्र प्रस्तुत किए। इस प्रक्रिया को किसी भी राजदूत या उच्चायुक्त के कार्यकाल की औपचारिक शुरुआत माना जाता है और इसके बाद वे अपने देश का आधिकारिक प्रतिनिधित्व भारत में कर सकते हैं। राष्ट्रपति भवन में आयोजित इस समारोह में पारंपरिक गरिमा और राजनयिक शिष्टाचार का पालन किया गया। परिचय-पत्र स्वीकार करने की यह प्रक्रिया भारत और संबंधित देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण औपचारिक कदम मानी जाती है। समारोह के दौरान सभी प्रतिनिधियों का स्वागत किया गया और उन्हें भारत में अपने दायित्वों के निर्वहन के लिए शुभकामनाएं दी गईं। समारोह में सबसे पहले मोज़ाम्बिक गणराज्य के उच्चायुक्त महामहिम अरमांडो पेड्रो म्वीवाने जूनियर ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को अपना परिचय-पत्र सौंपा। इसके बाद निकारागुआ गणराज्य की राजदूत महामहिम नदेस्का इमारा कथबर्ट कार्लसन ने अपना परिचय-पत्र प्रस्तुत किया। सूरीनाम गणराज्य की राजदूत महामहिम हनीशा जयराम ने भी राष्ट्रपति को अपने परिचय-पत्र सौंपते हुए भारत में अपने राजनयिक दायित्वों की औपचारिक शुरुआत की।
इसके अलावा गैबॉन गणराज्य के उच्चायुक्त महामहिम ऑरेलियन-मार्सेल मिंत्सा एंगेमा, मंगोलिया के राजदूत डॉ. उल्ज़ीत लुव्सानजाव तथा बहामास कॉमनवेल्थ के उच्चायुक्त महामहिम पीटर निकोलस साइमोनेट ने भी राष्ट्रपति के समक्ष अपने परिचय-पत्र प्रस्तुत किए। इन सभी प्रतिनिधियों ने अपने-अपने देशों की ओर से भारत के साथ संबंधों को और अधिक मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। किसी भी विदेशी राजदूत या उच्चायुक्त के लिए परिचय-पत्र प्रस्तुत करना एक अनिवार्य संवैधानिक प्रक्रिया होती है। जब तक संबंधित प्रतिनिधि राष्ट्रपति को अपना परिचय-पत्र प्रस्तुत नहीं करता, तब तक वह आधिकारिक रूप से अपने देश का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता। इस औपचारिक प्रक्रिया के पूरा होने के बाद राजदूत और उच्चायुक्त दोनों देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, व्यापारिक और रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।
भारत लंबे समय से दुनिया के विभिन्न देशों के साथ अपने कूटनीतिक संबंधों को लगातार मजबूत करने की नीति पर काम कर रहा है। हाल के वर्षों में भारत ने अफ्रीका, लैटिन अमेरिका, कैरेबियाई देशों और एशिया-प्रशांत क्षेत्र के देशों के साथ सहयोग को नई गति दी है। ऐसे में इन छह देशों के नए राजनयिक प्रतिनिधियों की नियुक्ति को द्विपक्षीय संबंधों के विस्तार के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मोज़ाम्बिक और भारत के बीच ऊर्जा, खनन, कृषि, स्वास्थ्य और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। वहीं निकारागुआ और भारत के बीच विकास सहयोग, क्षमता निर्माण और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आपसी समर्थन को लेकर संबंध मजबूत रहे हैं। सूरीनाम के साथ भारत के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध विशेष महत्व रखते हैं, क्योंकि वहां भारतीय मूल की बड़ी आबादी निवास करती है। यही कारण है कि दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और सामाजिक संबंध भी काफी गहरे हैं।
गैबॉन के साथ भारत के आर्थिक और व्यापारिक संबंध लगातार विस्तार की ओर बढ़ रहे हैं। ऊर्जा, प्राकृतिक संसाधनों और निवेश के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग की संभावनाएं मौजूद हैं। दूसरी ओर मंगोलिया भारत का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार माना जाता है। दोनों देशों के बीच बौद्ध सांस्कृतिक विरासत, शिक्षा, रक्षा सहयोग और आर्थिक विकास से जुड़े कई क्षेत्रों में साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है। बहामास के साथ भी भारत के संबंध विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सहयोग और साझा हितों के आधार पर विकसित हो रहे हैं। जलवायु परिवर्तन, समुद्री सुरक्षा, सतत विकास और वैश्विक आर्थिक सहयोग जैसे विषयों पर दोनों देशों के बीच लगातार संवाद बना हुआ है। नए उच्चायुक्त की नियुक्ति से इन संबंधों को और गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। राष्ट्रपति भवन में आयोजित इस तरह के औपचारिक समारोह केवल संवैधानिक प्रक्रिया नहीं होते, बल्कि वे भारत की सक्रिय विदेश नीति और वैश्विक साझेदारी के विस्तार का भी प्रतीक होते हैं। नए राजदूतों और उच्चायुक्तों के कार्यभार संभालने के बाद व्यापार, निवेश, शिक्षा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, संस्कृति और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने की संभावना भी मजबूत होती है।
