असम ने खोई एक और मधुर आवाज: गायक-संगीतकार समर हजारिका का निधन

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75 वर्ष की उम्र में गुवाहाटी में अंतिम सांस, भारत रत्न भूपेन हजारिका के सबसे छोटे भाई थे

असम के प्रख्यात गायक और संगीतकार समर हजारिका का मंगलवार को गुवाहाटी में निधन हो गया। वे 75 वर्ष के थे और लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, हाल ही में अस्पताल से लौटने के बाद उन्होंने निजारापार स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। उनके निधन से असमिया संगीत जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।

समर हजारिका, भारत रत्न से सम्मानित महान संगीतकार डॉ. भूपेन हजारिका के सबसे छोटे भाई थे। वे दस भाई-बहनों में सबसे छोटे थे और संगीत की विरासत को पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ाने वालों में शामिल रहे। रेडियो, एल्बम और असमिया फिल्मों के माध्यम से उन्होंने दशकों तक श्रोताओं के दिलों में अपनी पहचान बनाए रखी।

कैसे शुरू हुआ संगीत का सफर

समर हजारिका ने 1960 के दशक में अपने संगीत करियर की शुरुआत की। उनका पहला एल्बम वर्ष 1968 में रिलीज हुआ, जिसने उन्हें असमिया संगीत प्रेमियों के बीच पहचान दिलाई। इसके बाद उन्होंने कई एल्बमों के साथ-साथ असमिया फिल्मों में भी पार्श्वगायन किया। उपोपथ, बोवारी और प्रवती पोखिर गान जैसी फिल्मों के गीतों में उनकी आवाज ने खास जगह बनाई।

वे मंचीय प्रस्तुतियों के साथ-साथ रेडियो कार्यक्रमों से भी जुड़े रहे और लोकधुनों के संरक्षण में अहम भूमिका निभाई। संगीत विशेषज्ञों का मानना है कि उनकी गायकी में सहजता और भावनात्मक गहराई थी, जो सीधे श्रोताओं से संवाद करती थी।

भूपेन हजारिका की विरासत के संवाहक

समर हजारिका अपने बड़े भाई भूपेन हजारिका की सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने वाले कार्यक्रमों में नियमित रूप से भाग लेते रहे। उन्होंने कई अवसरों पर भूपेन हजारिका के लोकप्रिय गीत प्रस्तुत किए और नई पीढ़ी को असमिया संगीत की जड़ों से जोड़ने का प्रयास किया। भूपेन हजारिका की जन्म शताब्दी से जुड़े आयोजनों में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही।

राजनीतिक और सामाजिक जगत की प्रतिक्रियाएं

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने समर हजारिका के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि समर हजारिका की आवाज असम की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा थी और उनके जाने से राज्य ने एक संवेदनशील कलाकार खो दिया है। मुख्यमंत्री ने परिवार के प्रति संवेदना प्रकट की।

केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने भी शोक संदेश जारी करते हुए कहा कि माघ बिहू के मौके पर उनका जाना असमिया समाज के लिए बेहद पीड़ादायक है। उन्होंने कहा कि समर हजारिका का योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।

परिवार और अंतिम विदाई

समर हजारिका अपने पीछे पत्नी, एक पुत्र और एक पुत्री को छोड़ गए हैं। परिवार ने बताया कि अंतिम संस्कार पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ गुवाहाटी में किया जाएगा।

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13 Jan 2026 By Nitin Trivedi

असम ने खोई एक और मधुर आवाज: गायक-संगीतकार समर हजारिका का निधन

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असम के प्रख्यात गायक और संगीतकार समर हजारिका का मंगलवार को गुवाहाटी में निधन हो गया। वे 75 वर्ष के थे और लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, हाल ही में अस्पताल से लौटने के बाद उन्होंने निजारापार स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। उनके निधन से असमिया संगीत जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।

समर हजारिका, भारत रत्न से सम्मानित महान संगीतकार डॉ. भूपेन हजारिका के सबसे छोटे भाई थे। वे दस भाई-बहनों में सबसे छोटे थे और संगीत की विरासत को पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ाने वालों में शामिल रहे। रेडियो, एल्बम और असमिया फिल्मों के माध्यम से उन्होंने दशकों तक श्रोताओं के दिलों में अपनी पहचान बनाए रखी।

कैसे शुरू हुआ संगीत का सफर

समर हजारिका ने 1960 के दशक में अपने संगीत करियर की शुरुआत की। उनका पहला एल्बम वर्ष 1968 में रिलीज हुआ, जिसने उन्हें असमिया संगीत प्रेमियों के बीच पहचान दिलाई। इसके बाद उन्होंने कई एल्बमों के साथ-साथ असमिया फिल्मों में भी पार्श्वगायन किया। उपोपथ, बोवारी और प्रवती पोखिर गान जैसी फिल्मों के गीतों में उनकी आवाज ने खास जगह बनाई।

वे मंचीय प्रस्तुतियों के साथ-साथ रेडियो कार्यक्रमों से भी जुड़े रहे और लोकधुनों के संरक्षण में अहम भूमिका निभाई। संगीत विशेषज्ञों का मानना है कि उनकी गायकी में सहजता और भावनात्मक गहराई थी, जो सीधे श्रोताओं से संवाद करती थी।

भूपेन हजारिका की विरासत के संवाहक

समर हजारिका अपने बड़े भाई भूपेन हजारिका की सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने वाले कार्यक्रमों में नियमित रूप से भाग लेते रहे। उन्होंने कई अवसरों पर भूपेन हजारिका के लोकप्रिय गीत प्रस्तुत किए और नई पीढ़ी को असमिया संगीत की जड़ों से जोड़ने का प्रयास किया। भूपेन हजारिका की जन्म शताब्दी से जुड़े आयोजनों में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही।

राजनीतिक और सामाजिक जगत की प्रतिक्रियाएं

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने समर हजारिका के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि समर हजारिका की आवाज असम की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा थी और उनके जाने से राज्य ने एक संवेदनशील कलाकार खो दिया है। मुख्यमंत्री ने परिवार के प्रति संवेदना प्रकट की।

केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने भी शोक संदेश जारी करते हुए कहा कि माघ बिहू के मौके पर उनका जाना असमिया समाज के लिए बेहद पीड़ादायक है। उन्होंने कहा कि समर हजारिका का योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।

परिवार और अंतिम विदाई

समर हजारिका अपने पीछे पत्नी, एक पुत्र और एक पुत्री को छोड़ गए हैं। परिवार ने बताया कि अंतिम संस्कार पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ गुवाहाटी में किया जाएगा।

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