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राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेता सलीम कुमार का निधन, मलयालम सिनेमा में शोक की लहर
बालीवुड डेस्क
56 वर्ष की उम्र में कार्डियक अरेस्ट से ली अंतिम सांस, तीन दशक लंबे करियर में 300 से अधिक फिल्मों में निभाए यादगार किरदार
कोच्चि। मलयालम सिनेमा के लोकप्रिय अभिनेता और राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता सलीम कुमार का शनिवार रात कार्डियक अरेस्ट के कारण निधन हो गया। 56 वर्षीय अभिनेता पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे और उन्हें कोच्चि के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर सामने आते ही फिल्म जगत, राजनीतिक क्षेत्र और उनके प्रशंसकों के बीच शोक की लहर दौड़ गई। मलयालम फिल्म इंडस्ट्री ने एक ऐसे कलाकार को खो दिया, जिसने अपने अभिनय से तीन दशकों तक दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई। रविवार सुबह उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए पारावुर टाउन हॉल में रखा गया, जहां बड़ी संख्या में लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे। फिल्म जगत से जुड़े कलाकारों, सामाजिक संगठनों और राजनीतिक नेताओं ने भी उन्हें अंतिम विदाई दी। सलीम कुमार के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय नेताओं ने दुख व्यक्त किया। केरल सरकार ने भी उनके योगदान को याद करते हुए अंतिम संस्कार से जुड़े खर्च वहन करने का निर्णय लिया।
सलीम कुमार का जन्म केरल के एर्नाकुलम जिले के उत्तरी परवूर क्षेत्र में हुआ था। साधारण परिवार से आने वाले सलीम ने अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर मनोरंजन जगत में पहचान बनाई। अभिनय के शुरुआती दिनों में उन्होंने मंच और टेलीविजन कार्यक्रमों में काम किया। उनकी कॉमिक टाइमिंग और सहज अभिनय शैली ने जल्द ही उन्हें दर्शकों के बीच लोकप्रिय बना दिया। बाद में यही लोकप्रियता उन्हें मलयालम सिनेमा तक ले गई। उन्होंने 1997 में रिलीज हुई फिल्म ‘इष्टमनु नूरु वट्टम’ से फिल्मी करियर की शुरुआत की थी। शुरुआत में उन्हें हास्य भूमिकाएं मिलीं, लेकिन उन्होंने हर किरदार में अपनी अलग छाप छोड़ी। जल्द ही वह मलयालम फिल्मों के सबसे भरोसेमंद कॉमेडी कलाकारों में गिने जाने लगे। उनकी संवाद अदायगी, चेहरे के भाव और सटीक कॉमिक टाइमिंग दर्शकों को खूब पसंद आती थी। हालांकि समय के साथ उन्होंने खुद को केवल हास्य अभिनेता तक सीमित नहीं रखा और गंभीर तथा भावनात्मक किरदारों में भी अपनी प्रतिभा साबित की।
सलीम कुमार के करियर का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ वर्ष 2010 में आया, जब उन्होंने फिल्म ‘आदामिन्टे मकन अबू’ में मुख्य भूमिका निभाई। इस फिल्म में उनके अभिनय को राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया और उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। यही नहीं, इस भूमिका के लिए उन्हें केरल राज्य फिल्म पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। यह उपलब्धि उनके करियर की सबसे बड़ी सफलताओं में गिनी जाती है। फिल्म में उन्होंने जिस संवेदनशीलता और सादगी के साथ किरदार निभाया, उसने दर्शकों और समीक्षकों दोनों को प्रभावित किया। अपने लंबे करियर में सलीम कुमार ने 300 से अधिक फिल्मों में काम किया। उन्होंने मुख्य रूप से मलयालम फिल्मों में अभिनय किया, लेकिन तमिल और ओडिया फिल्मों में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। ‘मीसा माधवन’, ‘मायावी’, ‘पुलिवाल कल्याणम’, ‘अचनुरंगथा वीडु’ और कई अन्य फिल्मों में उनके अभिनय को खूब सराहना मिली। अलग-अलग तरह के किरदार निभाने की क्षमता ने उन्हें इंडस्ट्री का बहुमुखी कलाकार बना दिया था।
सिर्फ फिल्मों तक ही नहीं, सलीम कुमार ने टेलीविजन और डबिंग की दुनिया में भी अपनी पहचान बनाई। उन्होंने कई फिल्मों में बतौर डबिंग आर्टिस्ट अपनी आवाज दी। कुछ फिल्मों में उन्होंने नैरेटर की भूमिका निभाई, जबकि कई अनोखे किरदारों को भी अपनी आवाज से जीवंत बनाया। अभिनय के साथ-साथ लेखन और रचनात्मक कार्यों में भी उनकी रुचि थी, जिसके कारण वे हमेशा कुछ नया करने की कोशिश करते रहे। फिल्म इंडस्ट्री के लोगों का कहना है कि सलीम कुमार सिर्फ एक अभिनेता नहीं थे, बल्कि बेहद सरल और मिलनसार इंसान भी थे। नए कलाकारों को प्रोत्साहित करना और उनके साथ सहजता से काम करना उनकी विशेषता मानी जाती थी। यही वजह है कि उनके साथ काम करने वाले कलाकार उन्हें सिर्फ सहकर्मी नहीं, बल्कि एक मार्गदर्शक के रूप में भी याद कर रहे हैं।
परिवार की बात करें तो उनके पीछे पत्नी सुनीता और दो बेटे हैं। उनके बड़े बेटे चंदू सलीम कुमार भी अभिनय क्षेत्र से जुड़े हुए हैं और हाल के वर्षों में फिल्मों में नजर आ चुके हैं। परिवार के लिए यह बेहद कठिन समय माना जा रहा है, वहीं उनके प्रशंसक सोशल मीडिया पर लगातार श्रद्धांजलि संदेश साझा कर रहे हैं। सलीम कुमार का जाना मलयालम सिनेमा के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है। उन्होंने अपनी मेहनत, प्रतिभा और बहुआयामी अभिनय से जो पहचान बनाई, वह आने वाले वर्षों तक याद की जाएगी। उनके किरदार, संवाद और फिल्मों में निभाई गई भूमिकाएं हमेशा दर्शकों के बीच जीवित रहेंगी। भारतीय सिनेमा ने एक ऐसे कलाकार को खो दिया है जिसने हंसी, भावनाओं और संवेदनशील अभिनय के जरिए करोड़ों लोगों के दिलों में अपनी स्थायी जगह बनाई।
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राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेता सलीम कुमार का निधन, मलयालम सिनेमा में शोक की लहर
बालीवुड डेस्क
कोच्चि। मलयालम सिनेमा के लोकप्रिय अभिनेता और राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता सलीम कुमार का शनिवार रात कार्डियक अरेस्ट के कारण निधन हो गया। 56 वर्षीय अभिनेता पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे और उन्हें कोच्चि के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर सामने आते ही फिल्म जगत, राजनीतिक क्षेत्र और उनके प्रशंसकों के बीच शोक की लहर दौड़ गई। मलयालम फिल्म इंडस्ट्री ने एक ऐसे कलाकार को खो दिया, जिसने अपने अभिनय से तीन दशकों तक दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई। रविवार सुबह उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए पारावुर टाउन हॉल में रखा गया, जहां बड़ी संख्या में लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे। फिल्म जगत से जुड़े कलाकारों, सामाजिक संगठनों और राजनीतिक नेताओं ने भी उन्हें अंतिम विदाई दी। सलीम कुमार के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय नेताओं ने दुख व्यक्त किया। केरल सरकार ने भी उनके योगदान को याद करते हुए अंतिम संस्कार से जुड़े खर्च वहन करने का निर्णय लिया।
सलीम कुमार का जन्म केरल के एर्नाकुलम जिले के उत्तरी परवूर क्षेत्र में हुआ था। साधारण परिवार से आने वाले सलीम ने अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर मनोरंजन जगत में पहचान बनाई। अभिनय के शुरुआती दिनों में उन्होंने मंच और टेलीविजन कार्यक्रमों में काम किया। उनकी कॉमिक टाइमिंग और सहज अभिनय शैली ने जल्द ही उन्हें दर्शकों के बीच लोकप्रिय बना दिया। बाद में यही लोकप्रियता उन्हें मलयालम सिनेमा तक ले गई। उन्होंने 1997 में रिलीज हुई फिल्म ‘इष्टमनु नूरु वट्टम’ से फिल्मी करियर की शुरुआत की थी। शुरुआत में उन्हें हास्य भूमिकाएं मिलीं, लेकिन उन्होंने हर किरदार में अपनी अलग छाप छोड़ी। जल्द ही वह मलयालम फिल्मों के सबसे भरोसेमंद कॉमेडी कलाकारों में गिने जाने लगे। उनकी संवाद अदायगी, चेहरे के भाव और सटीक कॉमिक टाइमिंग दर्शकों को खूब पसंद आती थी। हालांकि समय के साथ उन्होंने खुद को केवल हास्य अभिनेता तक सीमित नहीं रखा और गंभीर तथा भावनात्मक किरदारों में भी अपनी प्रतिभा साबित की।
सलीम कुमार के करियर का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ वर्ष 2010 में आया, जब उन्होंने फिल्म ‘आदामिन्टे मकन अबू’ में मुख्य भूमिका निभाई। इस फिल्म में उनके अभिनय को राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया और उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। यही नहीं, इस भूमिका के लिए उन्हें केरल राज्य फिल्म पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। यह उपलब्धि उनके करियर की सबसे बड़ी सफलताओं में गिनी जाती है। फिल्म में उन्होंने जिस संवेदनशीलता और सादगी के साथ किरदार निभाया, उसने दर्शकों और समीक्षकों दोनों को प्रभावित किया। अपने लंबे करियर में सलीम कुमार ने 300 से अधिक फिल्मों में काम किया। उन्होंने मुख्य रूप से मलयालम फिल्मों में अभिनय किया, लेकिन तमिल और ओडिया फिल्मों में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। ‘मीसा माधवन’, ‘मायावी’, ‘पुलिवाल कल्याणम’, ‘अचनुरंगथा वीडु’ और कई अन्य फिल्मों में उनके अभिनय को खूब सराहना मिली। अलग-अलग तरह के किरदार निभाने की क्षमता ने उन्हें इंडस्ट्री का बहुमुखी कलाकार बना दिया था।
सिर्फ फिल्मों तक ही नहीं, सलीम कुमार ने टेलीविजन और डबिंग की दुनिया में भी अपनी पहचान बनाई। उन्होंने कई फिल्मों में बतौर डबिंग आर्टिस्ट अपनी आवाज दी। कुछ फिल्मों में उन्होंने नैरेटर की भूमिका निभाई, जबकि कई अनोखे किरदारों को भी अपनी आवाज से जीवंत बनाया। अभिनय के साथ-साथ लेखन और रचनात्मक कार्यों में भी उनकी रुचि थी, जिसके कारण वे हमेशा कुछ नया करने की कोशिश करते रहे। फिल्म इंडस्ट्री के लोगों का कहना है कि सलीम कुमार सिर्फ एक अभिनेता नहीं थे, बल्कि बेहद सरल और मिलनसार इंसान भी थे। नए कलाकारों को प्रोत्साहित करना और उनके साथ सहजता से काम करना उनकी विशेषता मानी जाती थी। यही वजह है कि उनके साथ काम करने वाले कलाकार उन्हें सिर्फ सहकर्मी नहीं, बल्कि एक मार्गदर्शक के रूप में भी याद कर रहे हैं।
परिवार की बात करें तो उनके पीछे पत्नी सुनीता और दो बेटे हैं। उनके बड़े बेटे चंदू सलीम कुमार भी अभिनय क्षेत्र से जुड़े हुए हैं और हाल के वर्षों में फिल्मों में नजर आ चुके हैं। परिवार के लिए यह बेहद कठिन समय माना जा रहा है, वहीं उनके प्रशंसक सोशल मीडिया पर लगातार श्रद्धांजलि संदेश साझा कर रहे हैं। सलीम कुमार का जाना मलयालम सिनेमा के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है। उन्होंने अपनी मेहनत, प्रतिभा और बहुआयामी अभिनय से जो पहचान बनाई, वह आने वाले वर्षों तक याद की जाएगी। उनके किरदार, संवाद और फिल्मों में निभाई गई भूमिकाएं हमेशा दर्शकों के बीच जीवित रहेंगी। भारतीय सिनेमा ने एक ऐसे कलाकार को खो दिया है जिसने हंसी, भावनाओं और संवेदनशील अभिनय के जरिए करोड़ों लोगों के दिलों में अपनी स्थायी जगह बनाई।
