- Hindi News
- देश विदेश
- राहुल गांधी ने CBSE छात्र सार्थक से की मुलाकात, बोले- 18 साल का युवा सिस्टम से तेज निकला
राहुल गांधी ने CBSE छात्र सार्थक से की मुलाकात, बोले- 18 साल का युवा सिस्टम से तेज निकला
Digital Desk
OSM पोर्टल और टेंडर प्रक्रिया पर उठाए सवाल, छात्र की पहल को बताया पारदर्शिता और जवाबदेही की मिसाल
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने रविवार को झारखंड के रांची निवासी 18 वर्षीय छात्र सार्थक सिद्धांत से मुलाकात का वीडियो साझा करते हुए शिक्षा व्यवस्था और पारदर्शिता को लेकर केंद्र सरकार तथा सीबीएसई पर सवाल उठाए। करीब आठ मिनट के इस वीडियो में राहुल गांधी और सार्थक के बीच हुई बातचीत दिखाई गई है, जिसमें सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली, मूल्यांकन प्रक्रिया और उससे जुड़े टेंडर को लेकर कई मुद्दों पर चर्चा हुई। राहुल गांधी ने छात्र की पहल की सराहना करते हुए कहा कि एक 18 वर्षीय युवा ने उन खामियों को सामने लाया, जिन्हें जांच एजेंसियां और बड़े संस्थागत तंत्र नहीं देख सके।
सार्थक सिद्धांत ने इसी वर्ष 12वीं कक्षा की परीक्षा दी थी। परिणाम घोषित होने के बाद उन्होंने अपने अंकों को लेकर पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया अपनाई। इसी दौरान उन्होंने अपनी स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं का अध्ययन किया और कथित तौर पर कई तकनीकी तथा प्रक्रियागत गड़बड़ियों की ओर ध्यान आकर्षित किया। छात्र का दावा है कि उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग, मूल्यांकन और उससे संबंधित डिजिटल व्यवस्था में कई ऐसे पहलू हैं जिनकी गंभीर जांच की आवश्यकता है।
राहुल गांधी द्वारा साझा किए गए वीडियो में सार्थक ने बताया कि उन्होंने एक नागरिक के रूप में केवल वही किया जो किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति को करना चाहिए। उनके अनुसार यदि किसी व्यवस्था में खामियां दिखाई दें तो उन्हें समझना और सुधार के लिए आवाज उठाना लोकतांत्रिक जिम्मेदारी का हिस्सा है। सार्थक ने कहा कि पारदर्शिता और जवाबदेही किसी भी सार्वजनिक संस्थान की विश्वसनीयता का आधार होती है और छात्रों के भविष्य से जुड़े मामलों में यह और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
बातचीत के दौरान सार्थक ने बताया कि उन्हें OSM पोर्टल से जुड़ी कुछ जानकारियां एक एथिकल हैकर के माध्यम से मिली थीं। इसके बाद उन्होंने विभिन्न दस्तावेजों, टेंडर रिकॉर्ड और उपलब्ध सार्वजनिक जानकारियों का अध्ययन किया। छात्र का कहना है कि उन्होंने सीबीएसई से जुड़े सैकड़ों टेंडर दस्तावेजों की समीक्षा की और यह समझने की कोशिश की कि मूल्यांकन प्रणाली को संचालित करने वाली कंपनी को किस प्रक्रिया के तहत चयनित किया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि टेंडर प्रक्रिया के दौरान कुछ शर्तों में बदलाव किए गए, जिन्हें लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
राहुल गांधी ने बातचीत के दौरान यह सवाल भी उठाया कि यदि एक 18 वर्षीय छात्र किसी व्यवस्था में संभावित खामियां पहचान सकता है, तो बड़े संस्थागत तंत्र और निगरानी एजेंसियां ऐसा क्यों नहीं कर पातीं। उन्होंने कहा कि यह केवल एक छात्र की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस जिज्ञासा और जागरूकता का उदाहरण है जो देश के युवाओं में मौजूद है। राहुल ने कहा कि लोकतंत्र में सवाल पूछना और व्यवस्था से जवाब मांगना किसी भी नागरिक का अधिकार है।
सार्थक ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी अपनी राय रखी। उनका कहना था कि मौजूदा शिक्षा प्रणाली कई बार छात्रों की जिज्ञासा और खोजी सोच को प्रोत्साहित करने के बजाय सीमित कर देती है। उन्होंने बताया कि तकनीकी विषयों में रुचि और परिवार से मिले सहयोग के कारण उन्होंने इस विषय को गहराई से समझने का प्रयास किया। उनके अनुसार छात्रों को केवल परीक्षा तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें व्यवस्थाओं को समझने और उनमें सुधार के लिए भी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
इस पूरे विवाद के केंद्र में OSM प्रणाली और उससे जुड़ी कंपनी COEMPT एडूटेक है, जिसे सीबीएसई के डिजिटल मूल्यांकन कार्य का ठेका मिला हुआ है। राहुल गांधी पहले भी इस कंपनी और टेंडर प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया था कि कंपनी को ठेका देने की प्रक्रिया में कई महत्वपूर्ण नियमों और मानकों को बदला गया। हालांकि सीबीएसई ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि सभी प्रक्रियाएं निर्धारित नियमों और सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप पूरी की गई हैं।
सीबीएसई का कहना है कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली का उद्देश्य मूल्यांकन को अधिक तेज, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाना है। बोर्ड के अनुसार डिजिटल मूल्यांकन से अंकों के जोड़, डेटा एंट्री और अन्य मानवीय त्रुटियों की संभावना कम होती है। हालांकि परिणाम घोषित होने के बाद कई छात्रों ने सर्वर संबंधी समस्याओं, भुगतान में कठिनाई और उत्तर पुस्तिकाओं की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें दर्ज कराई थीं। इससे पहले भी राहुल गांधी ने कुछ छात्रों के साथ बैठक कर उनकी शिकायतें सुनी थीं। उन छात्रों ने दावा किया था कि उत्तर पुस्तिकाओं और पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में कई तरह की तकनीकी समस्याएं सामने आईं। इन घटनाओं के बाद शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, डिजिटल मूल्यांकन की गुणवत्ता और छात्रों के अधिकारों को लेकर बहस तेज हो गई है। सार्थक सिद्धांत की पहल चर्चा का विषय बनी हुई है।
-----------------
हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनल: https://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुक: Dainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम: @dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूब: Dainik Jagran MPCG Digital
📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए
राहुल गांधी ने CBSE छात्र सार्थक से की मुलाकात, बोले- 18 साल का युवा सिस्टम से तेज निकला
Digital Desk
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने रविवार को झारखंड के रांची निवासी 18 वर्षीय छात्र सार्थक सिद्धांत से मुलाकात का वीडियो साझा करते हुए शिक्षा व्यवस्था और पारदर्शिता को लेकर केंद्र सरकार तथा सीबीएसई पर सवाल उठाए। करीब आठ मिनट के इस वीडियो में राहुल गांधी और सार्थक के बीच हुई बातचीत दिखाई गई है, जिसमें सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली, मूल्यांकन प्रक्रिया और उससे जुड़े टेंडर को लेकर कई मुद्दों पर चर्चा हुई। राहुल गांधी ने छात्र की पहल की सराहना करते हुए कहा कि एक 18 वर्षीय युवा ने उन खामियों को सामने लाया, जिन्हें जांच एजेंसियां और बड़े संस्थागत तंत्र नहीं देख सके।
सार्थक सिद्धांत ने इसी वर्ष 12वीं कक्षा की परीक्षा दी थी। परिणाम घोषित होने के बाद उन्होंने अपने अंकों को लेकर पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया अपनाई। इसी दौरान उन्होंने अपनी स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं का अध्ययन किया और कथित तौर पर कई तकनीकी तथा प्रक्रियागत गड़बड़ियों की ओर ध्यान आकर्षित किया। छात्र का दावा है कि उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग, मूल्यांकन और उससे संबंधित डिजिटल व्यवस्था में कई ऐसे पहलू हैं जिनकी गंभीर जांच की आवश्यकता है।
राहुल गांधी द्वारा साझा किए गए वीडियो में सार्थक ने बताया कि उन्होंने एक नागरिक के रूप में केवल वही किया जो किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति को करना चाहिए। उनके अनुसार यदि किसी व्यवस्था में खामियां दिखाई दें तो उन्हें समझना और सुधार के लिए आवाज उठाना लोकतांत्रिक जिम्मेदारी का हिस्सा है। सार्थक ने कहा कि पारदर्शिता और जवाबदेही किसी भी सार्वजनिक संस्थान की विश्वसनीयता का आधार होती है और छात्रों के भविष्य से जुड़े मामलों में यह और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
बातचीत के दौरान सार्थक ने बताया कि उन्हें OSM पोर्टल से जुड़ी कुछ जानकारियां एक एथिकल हैकर के माध्यम से मिली थीं। इसके बाद उन्होंने विभिन्न दस्तावेजों, टेंडर रिकॉर्ड और उपलब्ध सार्वजनिक जानकारियों का अध्ययन किया। छात्र का कहना है कि उन्होंने सीबीएसई से जुड़े सैकड़ों टेंडर दस्तावेजों की समीक्षा की और यह समझने की कोशिश की कि मूल्यांकन प्रणाली को संचालित करने वाली कंपनी को किस प्रक्रिया के तहत चयनित किया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि टेंडर प्रक्रिया के दौरान कुछ शर्तों में बदलाव किए गए, जिन्हें लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
राहुल गांधी ने बातचीत के दौरान यह सवाल भी उठाया कि यदि एक 18 वर्षीय छात्र किसी व्यवस्था में संभावित खामियां पहचान सकता है, तो बड़े संस्थागत तंत्र और निगरानी एजेंसियां ऐसा क्यों नहीं कर पातीं। उन्होंने कहा कि यह केवल एक छात्र की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस जिज्ञासा और जागरूकता का उदाहरण है जो देश के युवाओं में मौजूद है। राहुल ने कहा कि लोकतंत्र में सवाल पूछना और व्यवस्था से जवाब मांगना किसी भी नागरिक का अधिकार है।
सार्थक ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी अपनी राय रखी। उनका कहना था कि मौजूदा शिक्षा प्रणाली कई बार छात्रों की जिज्ञासा और खोजी सोच को प्रोत्साहित करने के बजाय सीमित कर देती है। उन्होंने बताया कि तकनीकी विषयों में रुचि और परिवार से मिले सहयोग के कारण उन्होंने इस विषय को गहराई से समझने का प्रयास किया। उनके अनुसार छात्रों को केवल परीक्षा तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें व्यवस्थाओं को समझने और उनमें सुधार के लिए भी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
इस पूरे विवाद के केंद्र में OSM प्रणाली और उससे जुड़ी कंपनी COEMPT एडूटेक है, जिसे सीबीएसई के डिजिटल मूल्यांकन कार्य का ठेका मिला हुआ है। राहुल गांधी पहले भी इस कंपनी और टेंडर प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया था कि कंपनी को ठेका देने की प्रक्रिया में कई महत्वपूर्ण नियमों और मानकों को बदला गया। हालांकि सीबीएसई ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि सभी प्रक्रियाएं निर्धारित नियमों और सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप पूरी की गई हैं।
सीबीएसई का कहना है कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली का उद्देश्य मूल्यांकन को अधिक तेज, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाना है। बोर्ड के अनुसार डिजिटल मूल्यांकन से अंकों के जोड़, डेटा एंट्री और अन्य मानवीय त्रुटियों की संभावना कम होती है। हालांकि परिणाम घोषित होने के बाद कई छात्रों ने सर्वर संबंधी समस्याओं, भुगतान में कठिनाई और उत्तर पुस्तिकाओं की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें दर्ज कराई थीं। इससे पहले भी राहुल गांधी ने कुछ छात्रों के साथ बैठक कर उनकी शिकायतें सुनी थीं। उन छात्रों ने दावा किया था कि उत्तर पुस्तिकाओं और पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में कई तरह की तकनीकी समस्याएं सामने आईं। इन घटनाओं के बाद शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, डिजिटल मूल्यांकन की गुणवत्ता और छात्रों के अधिकारों को लेकर बहस तेज हो गई है। सार्थक सिद्धांत की पहल चर्चा का विषय बनी हुई है।
