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भारत 7 साल बाद बना साउथ एशियन महिला फुटबॉल चैंपियन, बांग्लादेश को हराकर जीता रिकॉर्ड छठा खिताब
स्पोर्ट्स डेस्क
फाइनल में 3-1 से दर्ज की शानदार जीत, पूरे टूर्नामेंट में अजेय रही भारतीय टीम
भारतीय महिला फुटबॉल टीम ने सात साल के लंबे इंतजार के बाद एक बार फिर साउथ एशियन फुटबॉल चैंपियनशिप का खिताब अपने नाम कर लिया है। शनिवार रात गोवा के मडगांव स्थित पंडित जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में खेले गए फाइनल मुकाबले में भारत ने मौजूदा चैंपियन बांग्लादेश को 3-1 से हराकर रिकॉर्ड छठी बार यह प्रतिष्ठित ट्रॉफी जीती। मैच खत्म होते ही स्टेडियम में मौजूद दर्शकों और भारतीय खिलाड़ियों के बीच जश्न का माहौल देखने को मिला। खिलाड़ियों ने मैदान पर एक-दूसरे को गले लगाकर जीत का उत्सव मनाया, जबकि टीम प्रबंधन और सपोर्ट स्टाफ के चेहरे पर भी संतोष साफ दिखाई दे रहा था।
यह जीत भारतीय महिला फुटबॉल के लिए कई मायनों में खास मानी जा रही है। पिछले कुछ वर्षों में टीम ने लगातार सुधार दिखाया है और इस टूर्नामेंट में उसका प्रदर्शन शुरुआत से ही दमदार रहा। फाइनल मुकाबले में भी भारतीय खिलाड़ियों ने दबाव के बीच संयम बनाए रखा और बेहतर खेल का प्रदर्शन करते हुए खिताब अपने नाम किया। खास बात यह रही कि भारत पूरे टूर्नामेंट में अजेय रहा और किसी भी टीम को वापसी का मौका नहीं दिया।
फाइनल मुकाबले की शुरुआत दोनों टीमों ने सावधानी के साथ की। शुरुआती मिनटों में बांग्लादेश ने भी कुछ अच्छे मूव बनाए, लेकिन भारतीय डिफेंस ने उन्हें सफल नहीं होने दिया। मैच के पहले हाफ में दोनों टीमों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली। भारत लगातार आक्रमण कर रहा था और आखिरकार 42वें मिनट में उसे सफलता मिली। भारतीय खिलाड़ी प्यारी जाख्सा ने शानदार गोल दागते हुए टीम को 1-0 की बढ़त दिला दी। इस गोल के बाद भारतीय खेमे में उत्साह बढ़ गया, लेकिन बांग्लादेश ने हार नहीं मानी।
पहले हाफ के इंजरी टाइम में बांग्लादेश की रितु पोर्ना चकमा ने बेहतरीन मौका भुनाते हुए गोल कर दिया और स्कोर 1-1 से बराबर कर दिया। इस गोल के साथ पहला हाफ समाप्त हुआ। हाफ टाइम तक मुकाबला बराबरी पर रहने के कारण दोनों टीमों पर दबाव बना हुआ था और दूसरे हाफ में मुकाबला और रोमांचक होने की उम्मीद बढ़ गई थी।
दूसरे हाफ की शुरुआत भारत के लिए शानदार रही। खेल शुरू होने के कुछ ही समय बाद सनफिदा नोंगरुम ने एक शानदार हेडर के जरिए गेंद को गोलपोस्ट में पहुंचा दिया। इस गोल ने भारत को 2-1 की बढ़त दिला दी और मैच का रुख भारतीय टीम की ओर मोड़ दिया। बढ़त मिलने के बाद भारतीय खिलाड़ियों ने गेंद पर बेहतर नियंत्रण बनाए रखा और बांग्लादेश को ज्यादा अवसर नहीं दिए। मिडफील्ड और डिफेंस दोनों विभागों ने शानदार तालमेल दिखाया।
बांग्लादेश की टीम बराबरी की कोशिश करती रही, लेकिन भारतीय खिलाड़ियों ने अनुशासित खेल का प्रदर्शन किया। मैच के 82वें मिनट में बांग्लादेशी डिफेंस की एक गलती भारतीय टीम के लिए बड़ा मौका बन गई। लिंडा कोम सेर्तो ने इस मौके का पूरा फायदा उठाते हुए तीसरा गोल कर दिया। इस गोल के साथ भारत की जीत लगभग तय हो गई। अंतिम मिनटों में बांग्लादेश ने वापसी की कोशिश की, लेकिन भारतीय टीम ने कोई मौका नहीं दिया और 3-1 की यादगार जीत दर्ज कर ली।
पूरे टूर्नामेंट में भारतीय टीम का प्रदर्शन बेहद प्रभावशाली रहा। टीम ने अपने सभी चार मुकाबले जीते और कुल 18 गोल किए। सबसे खास बात यह रही कि पूरे टूर्नामेंट में भारत ने केवल एक गोल खाया। यह आंकड़ा टीम के मजबूत डिफेंस और गोलकीपिंग का प्रमाण माना जा रहा है। दूसरी ओर बांग्लादेश की लगातार तीसरी बार खिताब जीतने की उम्मीद भी इस हार के साथ समाप्त हो गई।
फाइनल मुकाबले के बाद भारतीय खेमे में खुशी के साथ भावुक पल भी देखने को मिला। अनुभवी खिलाड़ी डांगमेई ग्रेस ने इसी मैच के बाद अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से संन्यास लेने की घोषणा कर दी। उन्होंने वर्ष 2013 में भारतीय टीम के लिए पदार्पण किया था और करीब एक दशक से अधिक समय तक देश का प्रतिनिधित्व किया। 95 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेलने वाली ग्रेस ने अपने करियर का अंत एक और साउथ एशियन चैंपियनशिप खिताब के साथ किया, जो उनके लिए यादगार विदाई साबित हुई।
टूर्नामेंट के व्यक्तिगत पुरस्कारों में भी भारतीय खिलाड़ियों का दबदबा देखने को मिला। अवेका सिंह चार गोल के साथ प्रतियोगिता की शीर्ष स्कोरर रहीं। वहीं सनफिदा नोंगरुम को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए मोस्ट वैल्यूएबल प्लेयर चुना गया। भारतीय गोलकीपर पंथोई चानू एलांगबाम को बेस्ट गोलकीपर का पुरस्कार मिला। नेपाल की टीम को फेयर प्ले अवॉर्ड प्रदान किया गया। यह खिताबी जीत भारतीय महिला फुटबॉल के लिए एक बड़ा संदेश भी है। पिछले कुछ वर्षों में महिला फुटबॉल को लेकर देश में जागरूकता बढ़ी है और युवा खिलाड़ियों का रुझान भी इस खेल की ओर बढ़ रहा है।
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भारत 7 साल बाद बना साउथ एशियन महिला फुटबॉल चैंपियन, बांग्लादेश को हराकर जीता रिकॉर्ड छठा खिताब
स्पोर्ट्स डेस्क
भारतीय महिला फुटबॉल टीम ने सात साल के लंबे इंतजार के बाद एक बार फिर साउथ एशियन फुटबॉल चैंपियनशिप का खिताब अपने नाम कर लिया है। शनिवार रात गोवा के मडगांव स्थित पंडित जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में खेले गए फाइनल मुकाबले में भारत ने मौजूदा चैंपियन बांग्लादेश को 3-1 से हराकर रिकॉर्ड छठी बार यह प्रतिष्ठित ट्रॉफी जीती। मैच खत्म होते ही स्टेडियम में मौजूद दर्शकों और भारतीय खिलाड़ियों के बीच जश्न का माहौल देखने को मिला। खिलाड़ियों ने मैदान पर एक-दूसरे को गले लगाकर जीत का उत्सव मनाया, जबकि टीम प्रबंधन और सपोर्ट स्टाफ के चेहरे पर भी संतोष साफ दिखाई दे रहा था।
यह जीत भारतीय महिला फुटबॉल के लिए कई मायनों में खास मानी जा रही है। पिछले कुछ वर्षों में टीम ने लगातार सुधार दिखाया है और इस टूर्नामेंट में उसका प्रदर्शन शुरुआत से ही दमदार रहा। फाइनल मुकाबले में भी भारतीय खिलाड़ियों ने दबाव के बीच संयम बनाए रखा और बेहतर खेल का प्रदर्शन करते हुए खिताब अपने नाम किया। खास बात यह रही कि भारत पूरे टूर्नामेंट में अजेय रहा और किसी भी टीम को वापसी का मौका नहीं दिया।
फाइनल मुकाबले की शुरुआत दोनों टीमों ने सावधानी के साथ की। शुरुआती मिनटों में बांग्लादेश ने भी कुछ अच्छे मूव बनाए, लेकिन भारतीय डिफेंस ने उन्हें सफल नहीं होने दिया। मैच के पहले हाफ में दोनों टीमों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली। भारत लगातार आक्रमण कर रहा था और आखिरकार 42वें मिनट में उसे सफलता मिली। भारतीय खिलाड़ी प्यारी जाख्सा ने शानदार गोल दागते हुए टीम को 1-0 की बढ़त दिला दी। इस गोल के बाद भारतीय खेमे में उत्साह बढ़ गया, लेकिन बांग्लादेश ने हार नहीं मानी।
पहले हाफ के इंजरी टाइम में बांग्लादेश की रितु पोर्ना चकमा ने बेहतरीन मौका भुनाते हुए गोल कर दिया और स्कोर 1-1 से बराबर कर दिया। इस गोल के साथ पहला हाफ समाप्त हुआ। हाफ टाइम तक मुकाबला बराबरी पर रहने के कारण दोनों टीमों पर दबाव बना हुआ था और दूसरे हाफ में मुकाबला और रोमांचक होने की उम्मीद बढ़ गई थी।
दूसरे हाफ की शुरुआत भारत के लिए शानदार रही। खेल शुरू होने के कुछ ही समय बाद सनफिदा नोंगरुम ने एक शानदार हेडर के जरिए गेंद को गोलपोस्ट में पहुंचा दिया। इस गोल ने भारत को 2-1 की बढ़त दिला दी और मैच का रुख भारतीय टीम की ओर मोड़ दिया। बढ़त मिलने के बाद भारतीय खिलाड़ियों ने गेंद पर बेहतर नियंत्रण बनाए रखा और बांग्लादेश को ज्यादा अवसर नहीं दिए। मिडफील्ड और डिफेंस दोनों विभागों ने शानदार तालमेल दिखाया।
बांग्लादेश की टीम बराबरी की कोशिश करती रही, लेकिन भारतीय खिलाड़ियों ने अनुशासित खेल का प्रदर्शन किया। मैच के 82वें मिनट में बांग्लादेशी डिफेंस की एक गलती भारतीय टीम के लिए बड़ा मौका बन गई। लिंडा कोम सेर्तो ने इस मौके का पूरा फायदा उठाते हुए तीसरा गोल कर दिया। इस गोल के साथ भारत की जीत लगभग तय हो गई। अंतिम मिनटों में बांग्लादेश ने वापसी की कोशिश की, लेकिन भारतीय टीम ने कोई मौका नहीं दिया और 3-1 की यादगार जीत दर्ज कर ली।
पूरे टूर्नामेंट में भारतीय टीम का प्रदर्शन बेहद प्रभावशाली रहा। टीम ने अपने सभी चार मुकाबले जीते और कुल 18 गोल किए। सबसे खास बात यह रही कि पूरे टूर्नामेंट में भारत ने केवल एक गोल खाया। यह आंकड़ा टीम के मजबूत डिफेंस और गोलकीपिंग का प्रमाण माना जा रहा है। दूसरी ओर बांग्लादेश की लगातार तीसरी बार खिताब जीतने की उम्मीद भी इस हार के साथ समाप्त हो गई।
फाइनल मुकाबले के बाद भारतीय खेमे में खुशी के साथ भावुक पल भी देखने को मिला। अनुभवी खिलाड़ी डांगमेई ग्रेस ने इसी मैच के बाद अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से संन्यास लेने की घोषणा कर दी। उन्होंने वर्ष 2013 में भारतीय टीम के लिए पदार्पण किया था और करीब एक दशक से अधिक समय तक देश का प्रतिनिधित्व किया। 95 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेलने वाली ग्रेस ने अपने करियर का अंत एक और साउथ एशियन चैंपियनशिप खिताब के साथ किया, जो उनके लिए यादगार विदाई साबित हुई।
टूर्नामेंट के व्यक्तिगत पुरस्कारों में भी भारतीय खिलाड़ियों का दबदबा देखने को मिला। अवेका सिंह चार गोल के साथ प्रतियोगिता की शीर्ष स्कोरर रहीं। वहीं सनफिदा नोंगरुम को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए मोस्ट वैल्यूएबल प्लेयर चुना गया। भारतीय गोलकीपर पंथोई चानू एलांगबाम को बेस्ट गोलकीपर का पुरस्कार मिला। नेपाल की टीम को फेयर प्ले अवॉर्ड प्रदान किया गया। यह खिताबी जीत भारतीय महिला फुटबॉल के लिए एक बड़ा संदेश भी है। पिछले कुछ वर्षों में महिला फुटबॉल को लेकर देश में जागरूकता बढ़ी है और युवा खिलाड़ियों का रुझान भी इस खेल की ओर बढ़ रहा है।
