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बंगाल में TMC नेताओं के खिलाफ बढ़ा जनाक्रोश, कई जगह विरोध प्रदर्शन और हंगामा
Digital Desk
रिश्वतखोरी, रंगदारी और भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच नेताओं को जनता के गुस्से का सामना करना पड़ा
पश्चिम बंगाल में राजनीतिक माहौल इन दिनों काफी गर्म दिखाई दे रहा है। राज्य के विभिन्न इलाकों से तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेताओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन और जनाक्रोश की घटनाएं सामने आ रही हैं। हाल के दिनों में कई ऐसे वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए हैं, जिनमें स्थानीय लोग नेताओं के खिलाफ नाराजगी जाहिर करते नजर आ रहे हैं। कहीं नेताओं को भीड़ के गुस्से का सामना करना पड़ा तो कहीं पुलिस को हस्तक्षेप कर स्थिति संभालनी पड़ी। इन घटनाओं ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।
कोलकाता में रविवार को एक ऐसी ही घटना सामने आई, जब गिरफ्तार TMC पार्षद बप्पादित्य दासगुप्ता को अदालत ले जाया जा रहा था। इस दौरान उनकी गाड़ी पर लोगों ने अंडे फेंके और विरोध प्रदर्शन किया। पाटुली थाना क्षेत्र के बाहर भी बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए और उनके खिलाफ नारेबाजी की। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पार्षद और उनके सहयोगियों के खिलाफ लंबे समय से शिकायतें सामने आ रही थीं। गिरफ्तारी के बाद लोगों का गुस्सा खुलकर सामने आया।
कोलकाता नगर निगम के वार्ड-101 के पार्षद बप्पादित्य दासगुप्ता को उनके सहयोगी सौरव घोष के साथ गिरफ्तार किया गया था। दोनों पर रंगदारी, धमकी देने, जबरन घुसपैठ और आग लगाने की कोशिश जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। एक स्थानीय वकील ने शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि उनसे घर में लीगल चैंबर खोलने की अनुमति के बदले 20 लाख रुपये की मांग की गई थी। पुलिस मामले की जांच कर रही है और कई बिंदुओं पर पूछताछ जारी है।
इसी बीच सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक अन्य वीडियो ने भी लोगों का ध्यान खींचा। हावड़ा जिले में एक TMC नेता ब्रह्मानंद चक्रवर्ती कथित रूप से पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए साड़ियों के ढेर के नीचे छिपे हुए दिखाई दिए। वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में इसकी काफी चर्चा हो रही है। हालांकि पुलिस और प्रशासन की ओर से इस मामले पर विस्तृत टिप्पणी नहीं की गई है, लेकिन वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किया जा रहा है।
सबसे ज्यादा चर्चा हावड़ा के अमरदाहा गांव की घटना को लेकर हो रही है। यहां ग्रामीणों ने TMC नेता सन्यासी मन्ना पर सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर रिश्वत लेने का आरोप लगाया। ग्रामीणों का कहना था कि विभिन्न सरकारी योजनाओं में नाम जोड़ने और लाभ दिलाने के बदले लोगों से पैसे लिए जाते थे। आरोपों से नाराज ग्रामीणों ने उन्हें पकड़ लिया और कथित तौर पर उनका सिर मुंडवा दिया। इसके बाद उन्हें जूते-चप्पलों की माला पहनाकर गांव में घुमाया गया।
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और किसी तरह नेता को भीड़ से बाहर निकाला। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि पूरे मामले की जांच की जाएगी। फिलहाल इस मामले में कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं हुई है, लेकिन वायरल वीडियो और स्थानीय लोगों के आरोपों को गंभीरता से लिया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि कानून को हाथ में लेने की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती और सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी।
राज्य में पिछले कुछ दिनों के दौरान ऐसी कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। 5 जून को साल्ट लेक में गिरफ्तार TMC उपाध्यक्ष जय प्रकाश मजूमदार को जब पुलिस जांच के लिए एक फ्लैट पर लेकर गई, तब स्थानीय लोगों ने उनके खिलाफ नारेबाजी की थी। इस दौरान उन पर अंडे भी फेंके गए। उसी दिन दमदम इलाके में TMC पार्षद शंकर दास को कथित राहत सामग्री घोटाले के आरोपों को लेकर लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा। आरोप है कि नाराज भीड़ ने उन्हें घेर लिया और उनके घर के बाहर भी हंगामा किया।
3 जून को कूचबिहार जिले में भी एक ऐसी घटना सामने आई थी, जब TMC नेता शाहिदुल मियां को भीड़ के गुस्से से बचने के लिए कथित तौर पर एक घर में बिस्तर के नीचे छिपना पड़ा। बाद में पुलिस ने मौके पर पहुंचकर उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला और थाने ले गई। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था।
वहीं 30 मई को सोनारपुर दक्षिण इलाके में TMC सांसद अभिषेक बनर्जी के साथ कथित मारपीट की घटना भी चर्चा में रही। आरोप है कि कुछ लोगों ने उनके खिलाफ प्रदर्शन किया और उन पर अंडे, जूते तथा अन्य वस्तुएं फेंकीं। स्थिति बिगड़ने पर सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें घेर लिया और सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।
हाल के दिनों में सामने आई इन घटनाओं ने राज्य की राजनीति में तनाव बढ़ा दिया है। विपक्षी दल इन मामलों को लेकर सरकार और सत्तारूढ़ दल पर लगातार हमले कर रहे हैं, जबकि TMC नेताओं का कहना है कि कई मामलों को राजनीतिक रूप से बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। दूसरी ओर प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने और आरोपों की जांच करने की बात कह रहा है।
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बंगाल में TMC नेताओं के खिलाफ बढ़ा जनाक्रोश, कई जगह विरोध प्रदर्शन और हंगामा
Digital Desk
पश्चिम बंगाल में राजनीतिक माहौल इन दिनों काफी गर्म दिखाई दे रहा है। राज्य के विभिन्न इलाकों से तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेताओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन और जनाक्रोश की घटनाएं सामने आ रही हैं। हाल के दिनों में कई ऐसे वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए हैं, जिनमें स्थानीय लोग नेताओं के खिलाफ नाराजगी जाहिर करते नजर आ रहे हैं। कहीं नेताओं को भीड़ के गुस्से का सामना करना पड़ा तो कहीं पुलिस को हस्तक्षेप कर स्थिति संभालनी पड़ी। इन घटनाओं ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।
कोलकाता में रविवार को एक ऐसी ही घटना सामने आई, जब गिरफ्तार TMC पार्षद बप्पादित्य दासगुप्ता को अदालत ले जाया जा रहा था। इस दौरान उनकी गाड़ी पर लोगों ने अंडे फेंके और विरोध प्रदर्शन किया। पाटुली थाना क्षेत्र के बाहर भी बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए और उनके खिलाफ नारेबाजी की। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पार्षद और उनके सहयोगियों के खिलाफ लंबे समय से शिकायतें सामने आ रही थीं। गिरफ्तारी के बाद लोगों का गुस्सा खुलकर सामने आया।
कोलकाता नगर निगम के वार्ड-101 के पार्षद बप्पादित्य दासगुप्ता को उनके सहयोगी सौरव घोष के साथ गिरफ्तार किया गया था। दोनों पर रंगदारी, धमकी देने, जबरन घुसपैठ और आग लगाने की कोशिश जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। एक स्थानीय वकील ने शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि उनसे घर में लीगल चैंबर खोलने की अनुमति के बदले 20 लाख रुपये की मांग की गई थी। पुलिस मामले की जांच कर रही है और कई बिंदुओं पर पूछताछ जारी है।
इसी बीच सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक अन्य वीडियो ने भी लोगों का ध्यान खींचा। हावड़ा जिले में एक TMC नेता ब्रह्मानंद चक्रवर्ती कथित रूप से पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए साड़ियों के ढेर के नीचे छिपे हुए दिखाई दिए। वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में इसकी काफी चर्चा हो रही है। हालांकि पुलिस और प्रशासन की ओर से इस मामले पर विस्तृत टिप्पणी नहीं की गई है, लेकिन वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किया जा रहा है।
सबसे ज्यादा चर्चा हावड़ा के अमरदाहा गांव की घटना को लेकर हो रही है। यहां ग्रामीणों ने TMC नेता सन्यासी मन्ना पर सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर रिश्वत लेने का आरोप लगाया। ग्रामीणों का कहना था कि विभिन्न सरकारी योजनाओं में नाम जोड़ने और लाभ दिलाने के बदले लोगों से पैसे लिए जाते थे। आरोपों से नाराज ग्रामीणों ने उन्हें पकड़ लिया और कथित तौर पर उनका सिर मुंडवा दिया। इसके बाद उन्हें जूते-चप्पलों की माला पहनाकर गांव में घुमाया गया।
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और किसी तरह नेता को भीड़ से बाहर निकाला। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि पूरे मामले की जांच की जाएगी। फिलहाल इस मामले में कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं हुई है, लेकिन वायरल वीडियो और स्थानीय लोगों के आरोपों को गंभीरता से लिया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि कानून को हाथ में लेने की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती और सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी।
राज्य में पिछले कुछ दिनों के दौरान ऐसी कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। 5 जून को साल्ट लेक में गिरफ्तार TMC उपाध्यक्ष जय प्रकाश मजूमदार को जब पुलिस जांच के लिए एक फ्लैट पर लेकर गई, तब स्थानीय लोगों ने उनके खिलाफ नारेबाजी की थी। इस दौरान उन पर अंडे भी फेंके गए। उसी दिन दमदम इलाके में TMC पार्षद शंकर दास को कथित राहत सामग्री घोटाले के आरोपों को लेकर लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा। आरोप है कि नाराज भीड़ ने उन्हें घेर लिया और उनके घर के बाहर भी हंगामा किया।
3 जून को कूचबिहार जिले में भी एक ऐसी घटना सामने आई थी, जब TMC नेता शाहिदुल मियां को भीड़ के गुस्से से बचने के लिए कथित तौर पर एक घर में बिस्तर के नीचे छिपना पड़ा। बाद में पुलिस ने मौके पर पहुंचकर उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला और थाने ले गई। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था।
वहीं 30 मई को सोनारपुर दक्षिण इलाके में TMC सांसद अभिषेक बनर्जी के साथ कथित मारपीट की घटना भी चर्चा में रही। आरोप है कि कुछ लोगों ने उनके खिलाफ प्रदर्शन किया और उन पर अंडे, जूते तथा अन्य वस्तुएं फेंकीं। स्थिति बिगड़ने पर सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें घेर लिया और सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।
हाल के दिनों में सामने आई इन घटनाओं ने राज्य की राजनीति में तनाव बढ़ा दिया है। विपक्षी दल इन मामलों को लेकर सरकार और सत्तारूढ़ दल पर लगातार हमले कर रहे हैं, जबकि TMC नेताओं का कहना है कि कई मामलों को राजनीतिक रूप से बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। दूसरी ओर प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने और आरोपों की जांच करने की बात कह रहा है।
