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बड़े पर्दे पर आएगा ‘श्रीमद्भागवतम’, सात फिल्मों में दिखाई जाएगी भगवान कृष्ण और विष्णु अवतारों की कथा
बालीवुड न्यूज़
रामानंद सागर की विरासत को आगे बढ़ा रहे अमृत और आकाश सागर चोपड़ा, रामोजी फिल्म सिटी में पहले पार्ट की शूटिंग शुरू
भारतीय पौराणिक कथाओं पर बड़े बजट की फिल्मों के बढ़ते दौर में अब ‘श्रीमद्भागवतम’ को भी बड़े पर्दे पर उतारने की तैयारी शुरू हो गई है। टीवी की ऐतिहासिक ‘रामायण’ से जुड़ी सागर परिवार की अगली पीढ़ी इस बार एक फिल्म नहीं बल्कि सात फिल्मों की लंबी सिनेमाई सीरीज तैयार कर रही है। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट की शुरुआत ‘श्रीमद्भागवतम पार्ट-1’ से होगी और इसकी शूटिंग हैदराबाद की रामोजी फिल्म सिटी में शुरू कर दी गई है। प्रोजेक्ट की कमान रामानंद सागर के पोते अमृत सागर चोपड़ा और आकाश सागर चोपड़ा के हाथों में है। अमृत सागर चोपड़ा पहले भाग का निर्देशन कर रहे हैं, जबकि आकाश सागर चोपड़ा प्रोडक्शन से जुड़े हैं। फिल्म को सागर पिक्चर्स ग्लोबल के बैनर तले तैयार किया जा रहा है।
निर्माताओं के मुताबिक सात फिल्मों में भागवत महापुराण की विशाल कथा को अलग-अलग हिस्सों में पर्दे पर लाने की योजना है। इसमें भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े लोकप्रिय प्रसंगों के साथ भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों और कई ऐसी कथाओं को भी जगह मिलेगी, जिन्हें बड़े पर्दे पर अब तक बहुत विस्तार से नहीं दिखाया गया है। फिल्म की रिसर्च पर भी खास जोर दिया जा रहा है। आध्यात्मिक गुरु और लेखक श्री एम को प्रोजेक्ट में रिसर्च गाइड के रूप में जोड़ा गया है, जबकि मोती सागर मेंटर की भूमिका निभा रहे हैं। मेकर्स का कहना है कि आधुनिक सिनेमाई तकनीक का इस्तेमाल करते हुए भी मूल ग्रंथ और उसकी आध्यात्मिक भावना को केंद्र में रखने की कोशिश होगी।
‘श्रीमद्भागवतम पार्ट-1’ की शूटिंग के लिए रामोजी फिल्म सिटी में बड़े स्तर पर सेट तैयार किए गए हैं। प्रोजेक्ट की शुरुआत से जुड़ा समारोह भी वहीं आयोजित किया गया, जिसमें तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी शामिल हुए। फिल्म की तकनीकी टीम में भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम कर चुके लोगों को शामिल किया गया है। सिनेमैटोग्राफी की जिम्मेदारी जोएल शेफर संभाल रहे हैं, जबकि विजुअल इफेक्ट्स से जुड़े क्लाइड एडवर्ड्स को एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर के तौर पर प्रोजेक्ट से जोड़ा गया है। सात फिल्मों का फॉर्मेट चुनने के पीछे कहानी का आकार बड़ी वजह बताया जा रहा है। भागवत महापुराण में केवल भगवान कृष्ण के जन्म और उनके जीवन की कथा ही नहीं, बल्कि सृष्टि, भक्ति, धर्म और भगवान विष्णु के अलग-अलग अवतारों से जुड़े अनेक प्रसंग आते हैं। इन्हें एक या दो फिल्मों में समेटने के बजाय निर्माताओं ने लंबी फिल्म सीरीज का रास्ता चुना है।
शुरुआती जानकारी के अनुसार इसमें कृष्ण के बाल रूप, गोकुल और वृंदावन के प्रसंग, किशोर अवस्था, गोपियों से जुड़े प्रसंग और गोपी गीत जैसी कथाओं को जगह दी जाएगी। इसके साथ समुद्र मंथन और भगवान विष्णु के मत्स्य, वराह तथा नरसिंह अवतार जैसे प्रसंग भी इस सिनेमाई दुनिया का हिस्सा होंगे। ध्रुव की भक्ति, भरत, पृथु और कपिल से जुड़ी कथाओं को भी अलग-अलग हिस्सों में विस्तार से पेश किए जाने की तैयारी है। हालांकि कौन सा प्रसंग किस फिल्म में आएगा, इसकी पूरी जानकारी अभी निर्माताओं ने सार्वजनिक नहीं की है। पहले पार्ट की कहानी और स्टारकास्ट से जुड़े बड़े नामों का खुलासा भी आने वाले चरणों में किए जाने की उम्मीद है।
इस प्रोजेक्ट के साथ सागर परिवार की विरासत की चर्चा भी फिर शुरू हो गई है। रामानंद सागर की ‘रामायण’ का प्रसारण 1987 में दूरदर्शन पर शुरू हुआ था और यह भारतीय टेलीविजन के सबसे चर्चित धार्मिक धारावाहिकों में शामिल हो गया। राम, सीता और लक्ष्मण की भूमिकाओं में अरुण गोविल, दीपिका चिखलिया और सुनील लहरी को दर्शकों ने लंबे समय तक उन्हीं किरदारों से जोड़कर देखा। दशकों बाद भी इस धारावाहिक की लोकप्रियता बनी हुई है। अब परिवार की नई पीढ़ी उसी धार्मिक-पौराणिक कहानी कहने की परंपरा को थिएटर और आधुनिक विजुअल तकनीक के दौर में ले जाने की कोशिश कर रही है। ‘श्रीमद्भागवतम’ को दिवंगत रामानंद सागर और लीला सागर को समर्पित किया गया है।
निर्माताओं की योजना इसे केवल भारतीय दर्शकों तक सीमित रखने की नहीं है। कहानी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पेश करने और आधुनिक VFX के जरिए इसकी पौराणिक दुनिया को बड़े कैनवास पर बनाने की तैयारी की जा रही है। धार्मिक कथाओं को पर्दे पर उतारते समय प्रामाणिकता को लेकर उठने वाले सवालों को देखते हुए रिसर्च टीम ग्रंथों, परंपराओं और अलग-अलग संदर्भों पर काम कर रही है। फिल्म की भाषा, संवाद, पात्रों की वेशभूषा, स्थापत्य और धार्मिक प्रसंगों के विजुअल रूप को तैयार करने में भी इसी रिसर्च का इस्तेमाल किया जाएगा।
पिछले कुछ वर्षों में भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में पौराणिक और ऐतिहासिक विषयों पर बड़े स्तर के प्रोजेक्ट तेजी से बढ़े हैं। ऐसे समय में सात फिल्मों की ‘श्रीमद्भागवतम’ सीरीज अपने आकार के कारण अलग नजर आती है। एक ही कथा संसार को सात फीचर फिल्मों तक ले जाना लंबी शूटिंग, बड़े सेट, VFX और लगातार एक जैसी विजुअल पहचान बनाए रखने की चुनौती भी लेकर आएगा। फिलहाल पहला चरण रामोजी फिल्म सिटी में आगे बढ़ रहा है। सागर पिक्चर्स की ओर से आने वाले महीनों में पहले भाग की कास्ट, किरदारों के लुक, संगीत और रिलीज टाइमलाइन से जुड़ी जानकारी जारी की जाएगी।
सबसे ज्यादा दिलचस्पी भगवान श्रीकृष्ण और दूसरे प्रमुख पात्रों की कास्टिंग को लेकर बनी हुई है। अभी इन किरदारों के कलाकारों की पूरी सूची सार्वजनिक नहीं की गई है। पहले पार्ट की शूटिंग के दौरान ही सात फिल्मों की व्यापक कहानी को ध्यान में रखते हुए पात्रों और सेट की निरंतरता पर काम किया जा रहा है। मेकर्स के मुताबिक उद्देश्य भागवत महापुराण की परिचित कथाओं के साथ उन प्रसंगों को भी दर्शकों तक पहुंचाना है, जिन्हें आम तौर पर लोकप्रिय फिल्म और टेलीविजन रूपांतरणों में कम जगह मिली है।
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बड़े पर्दे पर आएगा ‘श्रीमद्भागवतम’, सात फिल्मों में दिखाई जाएगी भगवान कृष्ण और विष्णु अवतारों की कथा
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भारतीय पौराणिक कथाओं पर बड़े बजट की फिल्मों के बढ़ते दौर में अब ‘श्रीमद्भागवतम’ को भी बड़े पर्दे पर उतारने की तैयारी शुरू हो गई है। टीवी की ऐतिहासिक ‘रामायण’ से जुड़ी सागर परिवार की अगली पीढ़ी इस बार एक फिल्म नहीं बल्कि सात फिल्मों की लंबी सिनेमाई सीरीज तैयार कर रही है। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट की शुरुआत ‘श्रीमद्भागवतम पार्ट-1’ से होगी और इसकी शूटिंग हैदराबाद की रामोजी फिल्म सिटी में शुरू कर दी गई है। प्रोजेक्ट की कमान रामानंद सागर के पोते अमृत सागर चोपड़ा और आकाश सागर चोपड़ा के हाथों में है। अमृत सागर चोपड़ा पहले भाग का निर्देशन कर रहे हैं, जबकि आकाश सागर चोपड़ा प्रोडक्शन से जुड़े हैं। फिल्म को सागर पिक्चर्स ग्लोबल के बैनर तले तैयार किया जा रहा है।
निर्माताओं के मुताबिक सात फिल्मों में भागवत महापुराण की विशाल कथा को अलग-अलग हिस्सों में पर्दे पर लाने की योजना है। इसमें भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े लोकप्रिय प्रसंगों के साथ भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों और कई ऐसी कथाओं को भी जगह मिलेगी, जिन्हें बड़े पर्दे पर अब तक बहुत विस्तार से नहीं दिखाया गया है। फिल्म की रिसर्च पर भी खास जोर दिया जा रहा है। आध्यात्मिक गुरु और लेखक श्री एम को प्रोजेक्ट में रिसर्च गाइड के रूप में जोड़ा गया है, जबकि मोती सागर मेंटर की भूमिका निभा रहे हैं। मेकर्स का कहना है कि आधुनिक सिनेमाई तकनीक का इस्तेमाल करते हुए भी मूल ग्रंथ और उसकी आध्यात्मिक भावना को केंद्र में रखने की कोशिश होगी।
‘श्रीमद्भागवतम पार्ट-1’ की शूटिंग के लिए रामोजी फिल्म सिटी में बड़े स्तर पर सेट तैयार किए गए हैं। प्रोजेक्ट की शुरुआत से जुड़ा समारोह भी वहीं आयोजित किया गया, जिसमें तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी शामिल हुए। फिल्म की तकनीकी टीम में भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम कर चुके लोगों को शामिल किया गया है। सिनेमैटोग्राफी की जिम्मेदारी जोएल शेफर संभाल रहे हैं, जबकि विजुअल इफेक्ट्स से जुड़े क्लाइड एडवर्ड्स को एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर के तौर पर प्रोजेक्ट से जोड़ा गया है। सात फिल्मों का फॉर्मेट चुनने के पीछे कहानी का आकार बड़ी वजह बताया जा रहा है। भागवत महापुराण में केवल भगवान कृष्ण के जन्म और उनके जीवन की कथा ही नहीं, बल्कि सृष्टि, भक्ति, धर्म और भगवान विष्णु के अलग-अलग अवतारों से जुड़े अनेक प्रसंग आते हैं। इन्हें एक या दो फिल्मों में समेटने के बजाय निर्माताओं ने लंबी फिल्म सीरीज का रास्ता चुना है।
शुरुआती जानकारी के अनुसार इसमें कृष्ण के बाल रूप, गोकुल और वृंदावन के प्रसंग, किशोर अवस्था, गोपियों से जुड़े प्रसंग और गोपी गीत जैसी कथाओं को जगह दी जाएगी। इसके साथ समुद्र मंथन और भगवान विष्णु के मत्स्य, वराह तथा नरसिंह अवतार जैसे प्रसंग भी इस सिनेमाई दुनिया का हिस्सा होंगे। ध्रुव की भक्ति, भरत, पृथु और कपिल से जुड़ी कथाओं को भी अलग-अलग हिस्सों में विस्तार से पेश किए जाने की तैयारी है। हालांकि कौन सा प्रसंग किस फिल्म में आएगा, इसकी पूरी जानकारी अभी निर्माताओं ने सार्वजनिक नहीं की है। पहले पार्ट की कहानी और स्टारकास्ट से जुड़े बड़े नामों का खुलासा भी आने वाले चरणों में किए जाने की उम्मीद है।
इस प्रोजेक्ट के साथ सागर परिवार की विरासत की चर्चा भी फिर शुरू हो गई है। रामानंद सागर की ‘रामायण’ का प्रसारण 1987 में दूरदर्शन पर शुरू हुआ था और यह भारतीय टेलीविजन के सबसे चर्चित धार्मिक धारावाहिकों में शामिल हो गया। राम, सीता और लक्ष्मण की भूमिकाओं में अरुण गोविल, दीपिका चिखलिया और सुनील लहरी को दर्शकों ने लंबे समय तक उन्हीं किरदारों से जोड़कर देखा। दशकों बाद भी इस धारावाहिक की लोकप्रियता बनी हुई है। अब परिवार की नई पीढ़ी उसी धार्मिक-पौराणिक कहानी कहने की परंपरा को थिएटर और आधुनिक विजुअल तकनीक के दौर में ले जाने की कोशिश कर रही है। ‘श्रीमद्भागवतम’ को दिवंगत रामानंद सागर और लीला सागर को समर्पित किया गया है।
निर्माताओं की योजना इसे केवल भारतीय दर्शकों तक सीमित रखने की नहीं है। कहानी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पेश करने और आधुनिक VFX के जरिए इसकी पौराणिक दुनिया को बड़े कैनवास पर बनाने की तैयारी की जा रही है। धार्मिक कथाओं को पर्दे पर उतारते समय प्रामाणिकता को लेकर उठने वाले सवालों को देखते हुए रिसर्च टीम ग्रंथों, परंपराओं और अलग-अलग संदर्भों पर काम कर रही है। फिल्म की भाषा, संवाद, पात्रों की वेशभूषा, स्थापत्य और धार्मिक प्रसंगों के विजुअल रूप को तैयार करने में भी इसी रिसर्च का इस्तेमाल किया जाएगा।
पिछले कुछ वर्षों में भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में पौराणिक और ऐतिहासिक विषयों पर बड़े स्तर के प्रोजेक्ट तेजी से बढ़े हैं। ऐसे समय में सात फिल्मों की ‘श्रीमद्भागवतम’ सीरीज अपने आकार के कारण अलग नजर आती है। एक ही कथा संसार को सात फीचर फिल्मों तक ले जाना लंबी शूटिंग, बड़े सेट, VFX और लगातार एक जैसी विजुअल पहचान बनाए रखने की चुनौती भी लेकर आएगा। फिलहाल पहला चरण रामोजी फिल्म सिटी में आगे बढ़ रहा है। सागर पिक्चर्स की ओर से आने वाले महीनों में पहले भाग की कास्ट, किरदारों के लुक, संगीत और रिलीज टाइमलाइन से जुड़ी जानकारी जारी की जाएगी।
सबसे ज्यादा दिलचस्पी भगवान श्रीकृष्ण और दूसरे प्रमुख पात्रों की कास्टिंग को लेकर बनी हुई है। अभी इन किरदारों के कलाकारों की पूरी सूची सार्वजनिक नहीं की गई है। पहले पार्ट की शूटिंग के दौरान ही सात फिल्मों की व्यापक कहानी को ध्यान में रखते हुए पात्रों और सेट की निरंतरता पर काम किया जा रहा है। मेकर्स के मुताबिक उद्देश्य भागवत महापुराण की परिचित कथाओं के साथ उन प्रसंगों को भी दर्शकों तक पहुंचाना है, जिन्हें आम तौर पर लोकप्रिय फिल्म और टेलीविजन रूपांतरणों में कम जगह मिली है।
