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हॉर्मुज में फंसे 1500 जहाजों से बढ़ा खतरा, समुद्री जीव दुनियाभर में फैलने की आशंका
Digital Desk
लंबे समय से खड़े कार्गो शिप और ऑयल टैंकर की सतह पर पनप रहे शैवाल, बार्नेकल्स और दूसरे जीव; वैज्ञानिकों ने जहाज रवाना करने से पहले जांच और सफाई की जरूरत बताई
फारस की खाड़ी में लंबे समय से खड़े 1,500 से ज्यादा कमर्शियल जहाज अब केवल समुद्री यातायात की समस्या नहीं रह गए हैं। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि ये जहाज दुनिया के अलग-अलग समुद्री तटों तक invasive marine species यानी बाहरी आक्रामक समुद्री प्रजातियां पहुंचाने का जरिया बन सकते हैं। वैज्ञानिक जर्नल Biological Invasions में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक, हॉर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री आवाजाही प्रभावित होने के बाद महीनों से एक ही जगह खड़े कार्गो शिप और ऑयल टैंकर की पानी में डूबी सतह पर बड़ी संख्या में समुद्री जीव जमा होने लगे हैं। इनमें शैवाल, बार्नेकल्स, मसल्स, सूक्ष्म जीव और कई दूसरी प्रजातियां शामिल हो सकती हैं। जहाज दोबारा अलग-अलग देशों के बंदरगाहों की ओर बढ़ते हैं तो ये जीव भी उनके साथ हजारों किलोमीटर दूर पहुंच सकते हैं।
रिसर्च में इस प्रक्रिया को biofouling बताया गया है। सामान्य परिस्थितियों में बड़े कारोबारी जहाज किसी बंदरगाह या एंकरेज पर सीमित समय के लिए रुकते हैं, लेकिन लंबे समय तक एक जगह खड़े रहने से उनके हल, प्रोपेलर और पानी के संपर्क वाले दूसरे हिस्सों पर जीवों को तेजी से बढ़ने का मौका मिलता है। फारस की खाड़ी का गर्म और अधिक खारा पानी इस चिंता को और बढ़ाता है। यहां रहने वाली कई प्रजातियां पहले से ही कठिन समुद्री परिस्थितियों में जीवित रहने के अनुकूल हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि ऐसी प्रजातियां किसी नए और अनुकूल समुद्री वातावरण में पहुंचने के बाद तेजी से फैल सकती हैं। रिसर्च से जुड़े समुद्री जीव वैज्ञानिक मारियो टैम्बुरी के मुताबिक मुश्किल पर्यावरणीय परिस्थितियों को सहने की क्षमता रखने वाले जीव नए इलाकों में पहुंचने के बाद सफल invasive species बन सकते हैं।
इसका असर केवल समुद्री जैव विविधता तक सीमित रहने की आशंका नहीं है। किसी बाहरी प्रजाति के नए तटीय क्षेत्र में स्थापित हो जाने पर वह स्थानीय जीवों के भोजन और आवास पर दबाव डाल सकती है। इससे मछली पालन, स्थानीय समुद्री प्रजातियों और पूरे coastal ecosystem पर असर पड़ सकता है। पावर प्लांट के कूलिंग सिस्टम, बंदरगाह और दूसरी समुद्री संरचनाएं भी प्रभावित हो सकती हैं। शोधकर्ताओं का यह भी मानना है कि लंबे समय से खड़े कुछ जहाजों पर विकसित जीव अपने लार्वा पहले ही आसपास के समुद्र में छोड़ चुके होंगे। अगर ऐसा बड़े स्तर पर हुआ है तो इसका असर फारस की खाड़ी के स्थानीय इकोसिस्टम पर भी देखा जा सकता है।
Biofouling शिपिंग कंपनियों के लिए आर्थिक परेशानी भी बन सकता है। जहाज की सतह पर जीवों की परत बढ़ने से पानी में उसका drag बढ़ता है और इंजन को ज्यादा ताकत लगानी पड़ती है। अध्ययन के अनुसार हल्की जैविक परत भी ईंधन की खपत और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में करीब 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी कर सकती है। बार्नेकल्स की भारी परत बनने पर ईंधन की जरूरत 50 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ने की आशंका बताई गई है। इसी वजह से कुछ कंपनियां जहाजों के हल और प्रोपेलर साफ कराने के लिए विशेष underwater diving teams की मदद ले रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक बढ़ती मांग के बीच ऐसी सफाई की लागत करीब 60 प्रतिशत तक बढ़ी है और औसतन लगभग $8,000 प्रति जहाज तक पहुंच गई है।
वैज्ञानिकों ने सरकारों, पोर्ट अथॉरिटी और शिपिंग कंपनियों से कहा है कि लंबे समय से खड़े जहाजों को दूसरी जगह रवाना करने से पहले उनके hull की जांच और जरूरत के मुताबिक सफाई कराई जाए। International Maritime Organization भी biofouling को समुद्री आक्रामक प्रजातियों के एक महत्वपूर्ण वैश्विक रास्ते के रूप में पहचान चुका है और इसके प्रबंधन को बेहतर करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम चल रहा है। वैज्ञानिकों का जोर फिलहाल जहाजों के दोबारा समुद्री मार्गों पर लौटने से पहले ही जोखिम वाली प्रजातियों की पहचान और उन्हें हटाने पर है।
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हॉर्मुज में फंसे 1500 जहाजों से बढ़ा खतरा, समुद्री जीव दुनियाभर में फैलने की आशंका
Digital Desk
फारस की खाड़ी में लंबे समय से खड़े 1,500 से ज्यादा कमर्शियल जहाज अब केवल समुद्री यातायात की समस्या नहीं रह गए हैं। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि ये जहाज दुनिया के अलग-अलग समुद्री तटों तक invasive marine species यानी बाहरी आक्रामक समुद्री प्रजातियां पहुंचाने का जरिया बन सकते हैं। वैज्ञानिक जर्नल Biological Invasions में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक, हॉर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री आवाजाही प्रभावित होने के बाद महीनों से एक ही जगह खड़े कार्गो शिप और ऑयल टैंकर की पानी में डूबी सतह पर बड़ी संख्या में समुद्री जीव जमा होने लगे हैं। इनमें शैवाल, बार्नेकल्स, मसल्स, सूक्ष्म जीव और कई दूसरी प्रजातियां शामिल हो सकती हैं। जहाज दोबारा अलग-अलग देशों के बंदरगाहों की ओर बढ़ते हैं तो ये जीव भी उनके साथ हजारों किलोमीटर दूर पहुंच सकते हैं।
रिसर्च में इस प्रक्रिया को biofouling बताया गया है। सामान्य परिस्थितियों में बड़े कारोबारी जहाज किसी बंदरगाह या एंकरेज पर सीमित समय के लिए रुकते हैं, लेकिन लंबे समय तक एक जगह खड़े रहने से उनके हल, प्रोपेलर और पानी के संपर्क वाले दूसरे हिस्सों पर जीवों को तेजी से बढ़ने का मौका मिलता है। फारस की खाड़ी का गर्म और अधिक खारा पानी इस चिंता को और बढ़ाता है। यहां रहने वाली कई प्रजातियां पहले से ही कठिन समुद्री परिस्थितियों में जीवित रहने के अनुकूल हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि ऐसी प्रजातियां किसी नए और अनुकूल समुद्री वातावरण में पहुंचने के बाद तेजी से फैल सकती हैं। रिसर्च से जुड़े समुद्री जीव वैज्ञानिक मारियो टैम्बुरी के मुताबिक मुश्किल पर्यावरणीय परिस्थितियों को सहने की क्षमता रखने वाले जीव नए इलाकों में पहुंचने के बाद सफल invasive species बन सकते हैं।
इसका असर केवल समुद्री जैव विविधता तक सीमित रहने की आशंका नहीं है। किसी बाहरी प्रजाति के नए तटीय क्षेत्र में स्थापित हो जाने पर वह स्थानीय जीवों के भोजन और आवास पर दबाव डाल सकती है। इससे मछली पालन, स्थानीय समुद्री प्रजातियों और पूरे coastal ecosystem पर असर पड़ सकता है। पावर प्लांट के कूलिंग सिस्टम, बंदरगाह और दूसरी समुद्री संरचनाएं भी प्रभावित हो सकती हैं। शोधकर्ताओं का यह भी मानना है कि लंबे समय से खड़े कुछ जहाजों पर विकसित जीव अपने लार्वा पहले ही आसपास के समुद्र में छोड़ चुके होंगे। अगर ऐसा बड़े स्तर पर हुआ है तो इसका असर फारस की खाड़ी के स्थानीय इकोसिस्टम पर भी देखा जा सकता है।
Biofouling शिपिंग कंपनियों के लिए आर्थिक परेशानी भी बन सकता है। जहाज की सतह पर जीवों की परत बढ़ने से पानी में उसका drag बढ़ता है और इंजन को ज्यादा ताकत लगानी पड़ती है। अध्ययन के अनुसार हल्की जैविक परत भी ईंधन की खपत और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में करीब 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी कर सकती है। बार्नेकल्स की भारी परत बनने पर ईंधन की जरूरत 50 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ने की आशंका बताई गई है। इसी वजह से कुछ कंपनियां जहाजों के हल और प्रोपेलर साफ कराने के लिए विशेष underwater diving teams की मदद ले रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक बढ़ती मांग के बीच ऐसी सफाई की लागत करीब 60 प्रतिशत तक बढ़ी है और औसतन लगभग $8,000 प्रति जहाज तक पहुंच गई है।
वैज्ञानिकों ने सरकारों, पोर्ट अथॉरिटी और शिपिंग कंपनियों से कहा है कि लंबे समय से खड़े जहाजों को दूसरी जगह रवाना करने से पहले उनके hull की जांच और जरूरत के मुताबिक सफाई कराई जाए। International Maritime Organization भी biofouling को समुद्री आक्रामक प्रजातियों के एक महत्वपूर्ण वैश्विक रास्ते के रूप में पहचान चुका है और इसके प्रबंधन को बेहतर करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम चल रहा है। वैज्ञानिकों का जोर फिलहाल जहाजों के दोबारा समुद्री मार्गों पर लौटने से पहले ही जोखिम वाली प्रजातियों की पहचान और उन्हें हटाने पर है।
