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रूस पर अमेरिकी प्रतिबंध बिल आगे बढ़ा, भारत पर 100% टैरिफ का खतरा
Digital Desk
सीनेट में 86-12 वोट से अहम प्रक्रिया पार, जेलेंस्की ने सांसदों का जताया आभार; रूसी तेल खरीदने वाले भारत समेत पांच बड़े देशों पर पड़ सकता है असर
रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए अमेरिका में तैयार किया गया नया प्रतिबंध विधेयक सीनेट में एक अहम पड़ाव पार कर गया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति Volodymyr Zelenskyy ने इस कदम का समर्थन करते हुए अमेरिकी सांसदों का आभार जताया है। प्रस्तावित कानून भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें रूसी तेल और गैस के सबसे बड़े खरीदार देशों से अमेरिका आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार अमेरिकी राष्ट्रपति को देने की व्यवस्था है। भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता है, इसलिए बिल अपने मौजूदा स्वरूप में आगे बढ़ता है तो भारतीय निर्यात पर अतिरिक्त शुल्क का जोखिम पैदा हो सकता है। हालांकि अभी भारत पर नया 100 प्रतिशत टैरिफ लागू नहीं हुआ है और बिल को कानून बनने के लिए आगे की संसदीय प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
अमेरिकी सीनेट में विधेयक से जुड़ा प्रक्रियात्मक प्रस्ताव 86-12 के बड़े अंतर से आगे बढ़ा। वोटिंग के दौरान जेलेंस्की वॉशिंगटन में मौजूद थे और सीनेट गैलरी से कार्यवाही देख रहे थे। मतदान के बाद उन्होंने इसे रूस पर आर्थिक दबाव बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। जेलेंस्की का कहना है कि इस तरह के प्रतिबंध रूस की युद्ध के लिए आर्थिक संसाधन जुटाने की क्षमता को सीमित करने के साथ यूक्रेन और यूरोप के लिए एक व्यापक संदेश भी देते हैं। यह विधेयक दिवंगत अमेरिकी सीनेटर Lindsey Graham की प्रमुख पहलों में शामिल था। इसे पहली बार अप्रैल 2025 में पेश किया गया था। सीनेट में इससे जुड़ी प्रक्रिया ग्राहम के अंतिम संस्कार वाले दिन आगे बढ़ी, जिससे इस वोटिंग का राजनीतिक और प्रतीकात्मक महत्व भी बढ़ गया।
प्रस्तावित कानून का दायरा केवल रूस के अधिकारियों, संस्थानों या कंपनियों तक सीमित नहीं है। इसमें रूस से बड़े पैमाने पर तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले देशों पर भी दबाव बनाने का प्रावधान है। प्रस्ताव के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को रूसी ऊर्जा के पांच सबसे बड़े खरीदार देशों से होने वाले आयात पर अधिकतम 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का अधिकार मिल सकता है। इस दायरे में भारत और चीन जैसे बड़े ऊर्जा खरीदार आ सकते हैं। कुछ परिस्थितियों के लिए छूट की व्यवस्था भी प्रस्ताव में रखी गई है। मसलन, रूस से प्राकृतिक गैस पर कम निर्भरता रखने और उसे लगातार घटाने की दिशा में कदम उठा रहे देशों को राहत मिलने की संभावना हो सकती है। अंतिम नियम हालांकि बिल के कानून बनने और उसके क्रियान्वयन पर निर्भर करेंगे।
भारत के लिए मामला खास तौर पर कच्चे तेल की खरीद से जुड़ा है। यूक्रेन युद्ध के बाद भारत ने रियायती दरों पर उपलब्ध रूसी क्रूड की खरीद काफी बढ़ाई और अब चीन के बाद रूस के सबसे बड़े तेल ग्राहकों में शामिल है। नई दिल्ली लगातार कहती रही है कि उसकी ऊर्जा खरीद देश की ऊर्जा सुरक्षा, कीमत और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर की जाती है। भारत का यह भी रुख रहा है कि बड़ी आबादी वाले देश के लिए सस्ती और भरोसेमंद ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करना जरूरी है।
अमेरिका इससे पहले भी रूसी तेल खरीद को लेकर भारत पर व्यापारिक दबाव बढ़ा चुका है। अगस्त 2025 में भारत पर रूसी तेल खरीद से जुड़ा अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क लगाया गया था, जिसके बाद कुछ भारतीय उत्पादों पर कुल अमेरिकी टैरिफ 50 प्रतिशत तक पहुंच गया। अब नए प्रतिबंध विधेयक में अधिकतम 100 प्रतिशत शुल्क का प्रावधान होने से भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता पर भी नजर रहेगी। दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर बातचीत करते रहे हैं, जिसमें भारतीय सामान पर शुल्क कम करना अहम मुद्दा है। रूस से ऊर्जा खरीद को लेकर नई पाबंदियां आती हैं तो यह बातचीत और मुश्किल हो सकती है।
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रूस पर अमेरिकी प्रतिबंध बिल आगे बढ़ा, भारत पर 100% टैरिफ का खतरा
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रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए अमेरिका में तैयार किया गया नया प्रतिबंध विधेयक सीनेट में एक अहम पड़ाव पार कर गया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति Volodymyr Zelenskyy ने इस कदम का समर्थन करते हुए अमेरिकी सांसदों का आभार जताया है। प्रस्तावित कानून भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें रूसी तेल और गैस के सबसे बड़े खरीदार देशों से अमेरिका आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार अमेरिकी राष्ट्रपति को देने की व्यवस्था है। भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता है, इसलिए बिल अपने मौजूदा स्वरूप में आगे बढ़ता है तो भारतीय निर्यात पर अतिरिक्त शुल्क का जोखिम पैदा हो सकता है। हालांकि अभी भारत पर नया 100 प्रतिशत टैरिफ लागू नहीं हुआ है और बिल को कानून बनने के लिए आगे की संसदीय प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
अमेरिकी सीनेट में विधेयक से जुड़ा प्रक्रियात्मक प्रस्ताव 86-12 के बड़े अंतर से आगे बढ़ा। वोटिंग के दौरान जेलेंस्की वॉशिंगटन में मौजूद थे और सीनेट गैलरी से कार्यवाही देख रहे थे। मतदान के बाद उन्होंने इसे रूस पर आर्थिक दबाव बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। जेलेंस्की का कहना है कि इस तरह के प्रतिबंध रूस की युद्ध के लिए आर्थिक संसाधन जुटाने की क्षमता को सीमित करने के साथ यूक्रेन और यूरोप के लिए एक व्यापक संदेश भी देते हैं। यह विधेयक दिवंगत अमेरिकी सीनेटर Lindsey Graham की प्रमुख पहलों में शामिल था। इसे पहली बार अप्रैल 2025 में पेश किया गया था। सीनेट में इससे जुड़ी प्रक्रिया ग्राहम के अंतिम संस्कार वाले दिन आगे बढ़ी, जिससे इस वोटिंग का राजनीतिक और प्रतीकात्मक महत्व भी बढ़ गया।
प्रस्तावित कानून का दायरा केवल रूस के अधिकारियों, संस्थानों या कंपनियों तक सीमित नहीं है। इसमें रूस से बड़े पैमाने पर तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले देशों पर भी दबाव बनाने का प्रावधान है। प्रस्ताव के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को रूसी ऊर्जा के पांच सबसे बड़े खरीदार देशों से होने वाले आयात पर अधिकतम 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का अधिकार मिल सकता है। इस दायरे में भारत और चीन जैसे बड़े ऊर्जा खरीदार आ सकते हैं। कुछ परिस्थितियों के लिए छूट की व्यवस्था भी प्रस्ताव में रखी गई है। मसलन, रूस से प्राकृतिक गैस पर कम निर्भरता रखने और उसे लगातार घटाने की दिशा में कदम उठा रहे देशों को राहत मिलने की संभावना हो सकती है। अंतिम नियम हालांकि बिल के कानून बनने और उसके क्रियान्वयन पर निर्भर करेंगे।
भारत के लिए मामला खास तौर पर कच्चे तेल की खरीद से जुड़ा है। यूक्रेन युद्ध के बाद भारत ने रियायती दरों पर उपलब्ध रूसी क्रूड की खरीद काफी बढ़ाई और अब चीन के बाद रूस के सबसे बड़े तेल ग्राहकों में शामिल है। नई दिल्ली लगातार कहती रही है कि उसकी ऊर्जा खरीद देश की ऊर्जा सुरक्षा, कीमत और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर की जाती है। भारत का यह भी रुख रहा है कि बड़ी आबादी वाले देश के लिए सस्ती और भरोसेमंद ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करना जरूरी है।
अमेरिका इससे पहले भी रूसी तेल खरीद को लेकर भारत पर व्यापारिक दबाव बढ़ा चुका है। अगस्त 2025 में भारत पर रूसी तेल खरीद से जुड़ा अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क लगाया गया था, जिसके बाद कुछ भारतीय उत्पादों पर कुल अमेरिकी टैरिफ 50 प्रतिशत तक पहुंच गया। अब नए प्रतिबंध विधेयक में अधिकतम 100 प्रतिशत शुल्क का प्रावधान होने से भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता पर भी नजर रहेगी। दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर बातचीत करते रहे हैं, जिसमें भारतीय सामान पर शुल्क कम करना अहम मुद्दा है। रूस से ऊर्जा खरीद को लेकर नई पाबंदियां आती हैं तो यह बातचीत और मुश्किल हो सकती है।
