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टेलीग्राम फाउंडर पावेल डुरोव पर रूस का शिकंजा, इंटरनेशनल वॉन्टेड लिस्ट में नाम
Digital Desk
FSB ने आतंकी गतिविधियों में मदद से जुड़ा मामला दर्ज किया; Telegram पर संदिग्ध चैनल और बॉट नहीं हटाने का आरोप, दोषी पाए जाने पर हो सकती है उम्रकैद
Telegram के फाउंडर Pavel Durov की रूस में मुश्किलें बढ़ गई हैं। रूसी सुरक्षा एजेंसी FSB ने डुरोव पर आतंकवादी गतिविधियों में कथित तौर पर सहायता करने से जुड़ा मामला दर्ज करते हुए उन्हें अंतरराष्ट्रीय वॉन्टेड लिस्ट में डाल दिया है। रूसी अधिकारियों का आरोप है कि Telegram पर मौजूद कुछ चैनल, ग्रुप और ऑटोमेटेड बॉट्स का इस्तेमाल रूस के भीतर हिंसक गतिविधियों, तोड़फोड़ और दूसरे अपराधों की योजना बनाने के लिए किया गया, लेकिन प्लेटफॉर्म ने इनके खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई नहीं की। डुरोव के खिलाफ Russian Criminal Code के Article 205.1 के Part 1.1 के तहत जांच की जा रही है। इस धारा में आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने या उनमें मदद करने से जुड़े आरोप शामिल हैं। आरोप साबित होने की स्थिति में 41 वर्षीय टेक कारोबारी को रूस में उम्रकैद तक की सजा का सामना करना पड़ सकता है।
FSB का दावा है कि यूक्रेनी खुफिया एजेंसियों से कथित रूप से जुड़े समूहों और चरमपंथी संगठनों ने Telegram का इस्तेमाल रूस में लोगों से संपर्क करने और उन्हें अलग-अलग गतिविधियों के लिए तैयार करने में किया। जांच एजेंसी ने खास तौर पर ‘Dayvinchik’ नाम के एक Telegram chatbot का जिक्र किया है। रूसी अधिकारियों का आरोप है कि इस बॉट के जरिए 12 से 22 साल तक के युवाओं को आगजनी और कानून प्रवर्तन अधिकारियों पर हमलों जैसी गतिविधियों के लिए भर्ती करने की कोशिश की गई। अधिकारियों के अनुसार जुलाई 2025 के बाद इस कथित नेटवर्क से जुड़े मामलों में रूस के 10 क्षेत्रों से 46 लोगों को हिरासत में लिया गया है। जांच एजेंसियां अब Telegram पर मौजूद संबंधित अकाउंट, चैट और नेटवर्क की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं।
डुरोव और रूसी प्रशासन के बीच टकराव नया नहीं है। उन्होंने 2014 में रूस छोड़ दिया था। उस समय उनका रूसी अधिकारियों के साथ यूजर डेटा उपलब्ध कराने को लेकर विवाद हुआ था। बाद में उन्होंने रूस के बड़े सोशल नेटवर्क VKontakte में अपनी हिस्सेदारी भी बेच दी। डुरोव फिलहाल दुबई में रहते हैं और उनके पास फ्रांस तथा संयुक्त अरब अमीरात की नागरिकता है। इस साल की शुरुआत में डुरोव ने दावा किया था कि रूस में उनके खिलाफ चुपचाप आपराधिक जांच शुरू की गई है। उन्होंने रूसी प्रशासन पर Telegram को नियंत्रित करने और यूजर्स की प्राइवेसी कमजोर करने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया था। उनका कहना रहा है कि encrypted communication platforms पर राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर दबाव बढ़ाया जा रहा है।
रूस के अलावा यूरोप में भी डुरोव कानूनी जांच का सामना कर चुके हैं। 2024 में फ्रांस की अथॉरिटीज ने उन्हें पेरिस में गिरफ्तार किया था। वहां Telegram पर कथित तौर पर ड्रग ट्रैफिकिंग, मनी लॉन्ड्रिंग और बाल यौन शोषण सामग्री से जुड़े कंटेंट को पर्याप्त तरीके से मॉडरेट नहीं करने जैसे मामलों को लेकर जांच शुरू हुई थी। कुछ समय तक फ्रांस में न्यायिक निगरानी में रहने के बाद डुरोव 2025 की शुरुआत में दुबई लौट गए थे। रूस की ओर से अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी तलाश की कार्रवाई ने मामले को नया मोड़ दिया है।
डुरोव के प्रत्यर्पण को लेकर भी स्थिति आसान नहीं मानी जा रही। वह UAE के नागरिक हैं और फिलहाल दुबई में रहते हैं। ऐसे में रूस के लिए उन्हें सीधे वापस लाना कानूनी और कूटनीतिक रूप से मुश्किल हो सकता है। खास तौर पर तब तक, जब तक वह किसी ऐसे देश की यात्रा नहीं करते जहां रूसी अनुरोध के आधार पर गिरफ्तारी या प्रत्यर्पण की संभावना बन सके। ताजा आरोपों पर फिलहाल डुरोव या Telegram की तरफ से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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टेलीग्राम फाउंडर पावेल डुरोव पर रूस का शिकंजा, इंटरनेशनल वॉन्टेड लिस्ट में नाम
Digital Desk
Telegram के फाउंडर Pavel Durov की रूस में मुश्किलें बढ़ गई हैं। रूसी सुरक्षा एजेंसी FSB ने डुरोव पर आतंकवादी गतिविधियों में कथित तौर पर सहायता करने से जुड़ा मामला दर्ज करते हुए उन्हें अंतरराष्ट्रीय वॉन्टेड लिस्ट में डाल दिया है। रूसी अधिकारियों का आरोप है कि Telegram पर मौजूद कुछ चैनल, ग्रुप और ऑटोमेटेड बॉट्स का इस्तेमाल रूस के भीतर हिंसक गतिविधियों, तोड़फोड़ और दूसरे अपराधों की योजना बनाने के लिए किया गया, लेकिन प्लेटफॉर्म ने इनके खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई नहीं की। डुरोव के खिलाफ Russian Criminal Code के Article 205.1 के Part 1.1 के तहत जांच की जा रही है। इस धारा में आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने या उनमें मदद करने से जुड़े आरोप शामिल हैं। आरोप साबित होने की स्थिति में 41 वर्षीय टेक कारोबारी को रूस में उम्रकैद तक की सजा का सामना करना पड़ सकता है।
FSB का दावा है कि यूक्रेनी खुफिया एजेंसियों से कथित रूप से जुड़े समूहों और चरमपंथी संगठनों ने Telegram का इस्तेमाल रूस में लोगों से संपर्क करने और उन्हें अलग-अलग गतिविधियों के लिए तैयार करने में किया। जांच एजेंसी ने खास तौर पर ‘Dayvinchik’ नाम के एक Telegram chatbot का जिक्र किया है। रूसी अधिकारियों का आरोप है कि इस बॉट के जरिए 12 से 22 साल तक के युवाओं को आगजनी और कानून प्रवर्तन अधिकारियों पर हमलों जैसी गतिविधियों के लिए भर्ती करने की कोशिश की गई। अधिकारियों के अनुसार जुलाई 2025 के बाद इस कथित नेटवर्क से जुड़े मामलों में रूस के 10 क्षेत्रों से 46 लोगों को हिरासत में लिया गया है। जांच एजेंसियां अब Telegram पर मौजूद संबंधित अकाउंट, चैट और नेटवर्क की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं।
डुरोव और रूसी प्रशासन के बीच टकराव नया नहीं है। उन्होंने 2014 में रूस छोड़ दिया था। उस समय उनका रूसी अधिकारियों के साथ यूजर डेटा उपलब्ध कराने को लेकर विवाद हुआ था। बाद में उन्होंने रूस के बड़े सोशल नेटवर्क VKontakte में अपनी हिस्सेदारी भी बेच दी। डुरोव फिलहाल दुबई में रहते हैं और उनके पास फ्रांस तथा संयुक्त अरब अमीरात की नागरिकता है। इस साल की शुरुआत में डुरोव ने दावा किया था कि रूस में उनके खिलाफ चुपचाप आपराधिक जांच शुरू की गई है। उन्होंने रूसी प्रशासन पर Telegram को नियंत्रित करने और यूजर्स की प्राइवेसी कमजोर करने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया था। उनका कहना रहा है कि encrypted communication platforms पर राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर दबाव बढ़ाया जा रहा है।
रूस के अलावा यूरोप में भी डुरोव कानूनी जांच का सामना कर चुके हैं। 2024 में फ्रांस की अथॉरिटीज ने उन्हें पेरिस में गिरफ्तार किया था। वहां Telegram पर कथित तौर पर ड्रग ट्रैफिकिंग, मनी लॉन्ड्रिंग और बाल यौन शोषण सामग्री से जुड़े कंटेंट को पर्याप्त तरीके से मॉडरेट नहीं करने जैसे मामलों को लेकर जांच शुरू हुई थी। कुछ समय तक फ्रांस में न्यायिक निगरानी में रहने के बाद डुरोव 2025 की शुरुआत में दुबई लौट गए थे। रूस की ओर से अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी तलाश की कार्रवाई ने मामले को नया मोड़ दिया है।
डुरोव के प्रत्यर्पण को लेकर भी स्थिति आसान नहीं मानी जा रही। वह UAE के नागरिक हैं और फिलहाल दुबई में रहते हैं। ऐसे में रूस के लिए उन्हें सीधे वापस लाना कानूनी और कूटनीतिक रूप से मुश्किल हो सकता है। खास तौर पर तब तक, जब तक वह किसी ऐसे देश की यात्रा नहीं करते जहां रूसी अनुरोध के आधार पर गिरफ्तारी या प्रत्यर्पण की संभावना बन सके। ताजा आरोपों पर फिलहाल डुरोव या Telegram की तरफ से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
