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नीतीश कुमार ने MLC पद से इस्तीफा दिया; नितिन नवीन ने भी MLA पद से त्यागपत्र सौंपा
बिहार चुनाव
राज्यसभा सदस्य बनने के बाद संविधानिक प्रक्रिया पूरी, बिहार में राजनीतिक हलचल तेज
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को बिहार विधान परिषद (MLC) की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। यह कदम उनके हाल ही में राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद उठाया गया। उनका 29 शब्दों का इस्तीफा MLC संजय गांधी ने लेकर विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह को सौंपा। इस मौके पर संसदीय कार्य मंत्री विजय चौधरी भी मौजूद थे।
मंत्री चौधरी ने कहा, “मुख्यमंत्री जी राज्यसभा सदस्य निर्वाचित हो चुके हैं। इस्तीफा देना संविधान की प्रक्रिया का हिस्सा है। उनका त्यागपत्र अब मान्य हो गया है।”
साथ ही, BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी बिहार में MLA पद से इस्तीफा दे दिया। उनका इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार को BJP राज्य अध्यक्ष संजय सरावगी ने सौंपा। नितिन नवीन ने इसे असम यात्रा से पहले राज्य अध्यक्ष को दिया था।
सुबह की गतिविधियां और प्रक्रिया
सुबह 9 बजे से CM हाउस में हलचल रही। मुख्यमंत्री से ललन सिंह, अशोक चौधरी, संजय झा और विजेंद्र यादव ने मुलाकात की। करीब 10.30 बजे MLC संजय गांधी नीतीश कुमार का इस्तीफा लेकर विधान परिषद पहुंचे। सभापति ने इस्तीफा स्वीकार कर लिया। इसी बीच संजय सरावगी विधानसभा पहुंचे और नितिन नवीन का इस्तीफा स्पीकर डॉ. प्रेम कुमार को सौंपा।
संवैधानिक प्रावधान और आगे की स्थिति
नीतीश कुमार को 16 मार्च 2026 को राज्यसभा के लिए निर्वाचित किया गया था। संविधान के अनुसार, यदि कोई सदस्य दूसरे सदन के लिए चुना जाता है, तो उसे 14 दिनों के भीतर वर्तमान सदन से इस्तीफा देना जरूरी होता है।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि MLC पद से इस्तीफा देने के बाद भी नीतीश कुमार अगले 6 महीने तक मुख्यमंत्री पद पर बने रह सकते हैं। यह अनुच्छेद 164(4) के तहत संभव है। राजनीतिक विशेषज्ञ मान रहे हैं कि खरमास के बाद राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार भाजपा बिहार में नया मुख्यमंत्री बना सकती है।
मंत्री अशोक चौधरी ने कहा, “नीतीश कुमार की कमी सदन में महसूस होगी, लेकिन बिहार को उनका मार्गदर्शन मिलता रहेगा।”
इसी दौरान नितिन नवीन ने सोशल मीडिया पर अपनी मां को लेकर भावुक पोस्ट साझा की, जिसमें उन्होंने मां की अहमियत, उनके दिए आशीर्वाद और परिवार में खालीपन का जिक्र किया।
नीतीश कुमार और नितिन नवीन के इस्तीफे बिहार की राजनीतिक संरचना में बड़ा बदलाव लाते हैं। राज्यसभा में पदभार ग्रहण करने के बाद दोनों नेताओं का केन्द्र और राज्य स्तरीय प्रभाव बढ़ सकता है। वहीं, मुख्यमंत्री पद पर नीतीश कुमार की छह महीने की संवैधानिक स्थिति राज्य में राजनीतिक स्थिरता बनाए रखने में सहायक होगी।
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नीतीश कुमार ने MLC पद से इस्तीफा दिया; नितिन नवीन ने भी MLA पद से त्यागपत्र सौंपा
बिहार चुनाव
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को बिहार विधान परिषद (MLC) की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। यह कदम उनके हाल ही में राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद उठाया गया। उनका 29 शब्दों का इस्तीफा MLC संजय गांधी ने लेकर विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह को सौंपा। इस मौके पर संसदीय कार्य मंत्री विजय चौधरी भी मौजूद थे।
मंत्री चौधरी ने कहा, “मुख्यमंत्री जी राज्यसभा सदस्य निर्वाचित हो चुके हैं। इस्तीफा देना संविधान की प्रक्रिया का हिस्सा है। उनका त्यागपत्र अब मान्य हो गया है।”
साथ ही, BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी बिहार में MLA पद से इस्तीफा दे दिया। उनका इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार को BJP राज्य अध्यक्ष संजय सरावगी ने सौंपा। नितिन नवीन ने इसे असम यात्रा से पहले राज्य अध्यक्ष को दिया था।
सुबह की गतिविधियां और प्रक्रिया
सुबह 9 बजे से CM हाउस में हलचल रही। मुख्यमंत्री से ललन सिंह, अशोक चौधरी, संजय झा और विजेंद्र यादव ने मुलाकात की। करीब 10.30 बजे MLC संजय गांधी नीतीश कुमार का इस्तीफा लेकर विधान परिषद पहुंचे। सभापति ने इस्तीफा स्वीकार कर लिया। इसी बीच संजय सरावगी विधानसभा पहुंचे और नितिन नवीन का इस्तीफा स्पीकर डॉ. प्रेम कुमार को सौंपा।
संवैधानिक प्रावधान और आगे की स्थिति
नीतीश कुमार को 16 मार्च 2026 को राज्यसभा के लिए निर्वाचित किया गया था। संविधान के अनुसार, यदि कोई सदस्य दूसरे सदन के लिए चुना जाता है, तो उसे 14 दिनों के भीतर वर्तमान सदन से इस्तीफा देना जरूरी होता है।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि MLC पद से इस्तीफा देने के बाद भी नीतीश कुमार अगले 6 महीने तक मुख्यमंत्री पद पर बने रह सकते हैं। यह अनुच्छेद 164(4) के तहत संभव है। राजनीतिक विशेषज्ञ मान रहे हैं कि खरमास के बाद राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार भाजपा बिहार में नया मुख्यमंत्री बना सकती है।
मंत्री अशोक चौधरी ने कहा, “नीतीश कुमार की कमी सदन में महसूस होगी, लेकिन बिहार को उनका मार्गदर्शन मिलता रहेगा।”
इसी दौरान नितिन नवीन ने सोशल मीडिया पर अपनी मां को लेकर भावुक पोस्ट साझा की, जिसमें उन्होंने मां की अहमियत, उनके दिए आशीर्वाद और परिवार में खालीपन का जिक्र किया।
नीतीश कुमार और नितिन नवीन के इस्तीफे बिहार की राजनीतिक संरचना में बड़ा बदलाव लाते हैं। राज्यसभा में पदभार ग्रहण करने के बाद दोनों नेताओं का केन्द्र और राज्य स्तरीय प्रभाव बढ़ सकता है। वहीं, मुख्यमंत्री पद पर नीतीश कुमार की छह महीने की संवैधानिक स्थिति राज्य में राजनीतिक स्थिरता बनाए रखने में सहायक होगी।
